गिद्ध ज़्यादा हैं, लड़ाके कम

पाकिस्तान ने आज तीसरी बार मीडिया को बालाकोट जाने से रोक दिया।

तबाही बड़ी हुई है।

सफाई में समय लग रहा है।

कुछ मीडिया संस्थानों ने गूगल अर्थ की सेटेलाइट इमेज दिखाते हुए दावा किया था कि हमारे बहादुर बाज़ों का निशाना चूक गया और टारगेट सुरक्षित हैं।

गूगल अर्थ छह माह से पहले इमेज अपडेट नहीं करता। सभी देशों की सुरक्षा को खतरा न पहुंचे इसलिए ऐसा किया जाता है।

केंद्र सरकार को हमले का लाभ न मिल जाए। एयर स्ट्राइक में उसका संतुलित नेतृत्व सराहा न जाए, इसके लिए ये घटियापन किया जा रहा।

आज एक सैनिक के अपहरण की झूठी खबर चलाई गई लेकिन किसी ने भी खंडन नहीं छापा। ब्रेकिंग में खंडन या खेद व्यक्त नहीं किया। सारे चैनल दो घंटे तक सनसनी फैलाकर चुप हो गए।

कश्मीरी को पीटने वाले जब दूसरी पार्टी के निकले तो एक दिन पहले भाजपा-बजरंग दल पर भड़ास निकाल रहे रविश कुमार ने प्राइम टाइम में कोई खंडन नहीं किया।

मीडिया का सर्वाधिक वीभत्स रूप इस समय आप लोग स्पष्ट देख पा रहे होंगे। एक भयानक षड्यंत्र रचा जा रहा है।

इस कड़ी में आगे कुछ बैंड-बाजे वाले भी शामिल हो गए हैं। जेएनयू टाइप इन धूर्त लोगों का भंडाफोड़ सोमवार प्रातः किया जाएगा।

राष्ट्रवादियों सुस्ती छोड़ो। अभी भाजपा-संघ को एक तरफ रख दो।

देश के लिए बैटिंग करने का शाश्वत समय है। सिर्फ देश की बात करो।

कुछ लोग चुनाव जीतने के लिए राष्ट्र को नीलाम करने पर आमादा हो गए हैं। मद में चूर ये सांड भारतवर्ष के सुंदरवन नष्ट करने पर उतारू हैं।

सिर्फ टैग और शेयर से आगे जाना होगा, जो अधिकांश लोग नहीं कर रहे। ज़मीन पर कब आओगे? देश बिकने के बाद!

आपको जानकर हैरानी होगी। जितने राष्ट्रवादी यहां मुखर रूप में हमारे सामने हैं, उससे कहीं ज़्यादा खामोशी से हमारे साथ इस मंच पर हैं। उनसे मुखर होने की अपील करता हूं।

मीडिया का ये उन्माद देश को कहां ले जाएगा, कहा नहीं जा सकता। जितना आप कर रहे, काफी नहीं है। मातृभूमि अधिक मांग रही है। गिद्ध ज्यादा हैं, लड़ाके कम।

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