दो सर्जिकल स्ट्राइक का सामरिक क्षेत्र में दूरगामी परिणाम निकलेगा

प्रधानमंत्री मोदी के दिशा-निर्देश पर की गयी दो सर्जिकल स्ट्राइक का महत्त्व आतंकी हमलों का जवाब देने तक ही सीमित नहीं है। इन स्ट्राइक का सामरिक क्षेत्र में दूरगामी परिणाम है।

आज इसको समझने का प्रयास करते हैं।

आतंकी देश को यह पता था कि भारत पारम्परिक सैन्य शक्ति के मामले में आतंकी देश की तुलना में काफी आगे था और एक पारम्परिक युद्ध में आतंकी देश भारत को नहीं हरा सकता।

अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत यूनियन के बाहर निकलने के बाद आतंकी देश ने सारे आतंकी पाइप भारत की तरफ मोड़ दिए। जितने भी जिहादी अफ़ग़ानिस्तान में लड़ रहे थे, उन्हें अब भारत भेज दिया गया।

इन आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की, पंडित महिलाओं से बलात्कार किया और पंडितों को घाटी से बाहर खदेड़ दिया। इसके बाद इन्होंने लगातार भारत में आतंकी हमले किये। इंडियन एयरलाइन्स का जहाज़ हाईजैक किया।

हर हमले के बाद भारत कड़ी निंदा करता, जवाबी कार्रवाई की बात करता, संयुक्त राष्ट्र में शिकायत करता, अन्य शक्तिशाली देशों से आतंकी देश को समझाने का आग्रह करता।

आतंकी देश को पता था कि भारत जवाबी कार्रवाई नहीं कर सकता क्योंकि उसने भारतीय नेतृत्व को परमाणु बम की धमकी दे रखी थी। उसे यह भी पता था कि भारत इस धमकी के कारण सहम कर बैठ जाएगा।

साथ ही, भारत ने परमाणु हथियार के पहला उपयोग नहीं करने की नीति अपना रखी थी। फिर, जनता की नाराज़गी के जवाब में हमारे नेता और बुद्धिजीवी बोलते थे कि आतंकवादी हमलों का विकल्प युद्ध नहीं है।

एक तरह से भारत ने अपना एक हाथ स्वयं पीठ पीछे बाँध रखा था। हमारे सामरिक संयम को कमज़ोरी समझा गया।

एक तरह से हमने आतंकी हमला करने वालों को उनकी रक्षा की गारंटी दे दी थी।

इस रणनीति को आतंकी देश ने नाम दिया : हज़ार घावों के द्वारा मृत्यु (death by a thousand cuts). यानि कि आतंकी हमले के द्वारा भारत पर हज़ारो घाव कर दो जिनसे खून बहाकर भारत का खंडित कर दो।

प्रधानमंत्री मोदी ने दो सर्जिकल स्ट्राइक कर इस गारंटी को तोड़ दिया। अब आतंकी देश भारत से मिलने वाले जवाब को लेकर निश्चित नहीं रह सकता।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह सन्देश दे दिया है कि भारत सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों का तगड़ा जवाब देगा, चाहे उसके लिए घर में घुसकर मारना पड़े।

दूसरा, अभी तक आतंकी देश के लिए ऐसे आतंकी हमले करवाना कम लागत का विकल्प (low cost option) था – न ही टैंक या बड़ी बंदूकों का प्रयोग, न ही लड़ाकू जहाजों या नौसेना का उपयोग, जिसमें बहुत व्यय होता। बस आतंकी लौंडो में थोड़ा ‘निवेश’ – जैसे कि एक पुस्तक और उसे पढ़ाने वाला एक जेहादी – से भारत को बड़ी चोट पहुंचाना।

अब आतंकी देश को पता है कि भारत सेना, वायु सेना, और नौसेना का भी प्रयोग कर सकता है। आतंकी हमले के जवाब में अगली भारतीय सर्जिकल स्ट्राइक कब, कहाँ और कैसे होगी, इसे लेकर आतंकी देश के मन में आशंका और भय बैठ गया है। स्ट्राइक होने, न होने का प्रश्न ही नहीं है, क्योकि आतंकी देश को भी पता है मोदी सरकार जवाब ज़रूर देगी; घर में घुस कर मारेगी।

आतंकी देश का लाभ-हानि वाला गणित पलट गया है। आतंकी हमले अब low cost option नहीं रहे।

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