CBI डायरेक्टर को सज़ा मिल सकती है तो प्रशांत भूषण को क्यों छोड़ा?

कल सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने स्वीकार कर लिया कि उन्हों ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव की नियुक्ति पर उच्चाधिकार चयन समिति की बैठक की कार्यवाही के विवरण को गढ़ा हुआ बताने सम्बन्धी ट्वीट करके “सही में गलती” की थी।

उल्लेखनीय है कि उक्त ट्वीट में भूषण ने कहा था कि सरकार ने शायद गढ़ा हुआ कार्यवाही का विवरण अदालत में पेश किया है।

इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की खंडपीठ से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि वो भूषण के बयान को देखते हुए उनके खिलाफ दायर अपनी अवमानना याचिका को वापस लेना चाहेंगे।

वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा कि वो अपने पहले के बयान पर कायम हैं। वह इस मामले में भूषण के लिए कोई सज़ा नहीं चाहते।

हालाँकि कोर्ट ने कहा कि इस व्यापक मुद्दे पर विचार किया जायेगा कि कोई व्यक्ति क्या अदालत के विचाराधीन किसी मामले में जनता को प्रभावित करने के लिए न्यायालय की आलोचना कर सकता है।

पीठ अब 3 अप्रैल को सुनवाई करेगी।

ये भी याद रखना चाहिए कि 2 दिन पहले भूषण को सुप्रीम कोर्ट में समर्थन करने इनके 10 लोग सुप्रीम कोर्ट में गए थे जो किसी तरह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं कहा जा सकता।

प्रशांत भूषण ने जस्टिस अरुण मिश्रा को सुनवाई से अलग होने के लिए भी कहा था और ऐसा करने के लिए माफ़ी मांगने से भी मना कर दिया जबकि उनके वकील दुष्यंत दवे ने उनकी तरफ से माफ़ी मांगी।

यहां अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल जी के रुख से सहमत नहीं हुआ जा सकता। जब भूषण ने अदालत की अवमानना की है तो केवल गलती मानने से उन्हें छोड़ा नहीं जा सकता।

सीबीआई के तत्कालीन अंतरिम निदेशक नागेशवर राव के खिलाफ भी एक अवमानना याचिका थी, जिस पर राव ने अदालत से माफ़ी मांग ली थी और वेणुगोपाल ने भी अदालत से माफ़ करने के लिए प्रार्थना की मगर राव को सज़ा दी गई। एक लाख रुपये जुरमाना और पूरा दिन कोर्ट में बैठने की सज़ा।

फिर प्रशांत भूषण को सजा क्यों ना मिले? ऐसा व्यक्ति जो सरकार के लिए परेशानियां खड़ी करने में लगा रहता है और नागेश्वर राव के मामले में भी उसने नाहक सरकार को घेरने की कोशिश की, उसे भला कैसे माफ़ किया जा सकता है!

भूषण वो व्यक्ति है जिसे करीब 4 चीफ जस्टिस ऊटपटांग जनहित याचिका दायर करने पर लताड़ चुके हैं।

वेणुगोपाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी कि किसी वकील को सज़ा मिले ये अच्छी बात नहीं होगी और वेणुगोपाल ने शायद अदालत का मान रख कर याचिका वापस लेने की बात की है। ये उचित नहीं माना जा सकता।

वेणुगोपाल को याद रखना चाहिए कि प्रशांत भूषण को मौका मिला तो वे वेणुगोपाल को कभी भी नहीं बख्शेंगे।

ये व्यक्ति कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करता है और पुलवामा हमले पर पाकिस्तान के साथ खड़ा है।

अभी ये भी नहीं भूलना चाहिए कि रफाल के चोरी हुए दस्तावेज़ों को भी आधार बना कर भूषण लड़ रहे हैं जबकि हो सकता है चोरी में इन पर भी शक की सुई घूम जाए।

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