अयोध्या प्रकरण : रिटायर्ड जस्टिस ख़लीफ़ुल्ला होंगे मध्यस्थता समिति के मुखिया

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर तीन मध्यस्थ नियुक्त किए हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया आठ हफ्तों में पूरी होनी चाहिए।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस फ़कीर मोहम्मद इब्राहिम ख़लीफ़ुल्ला के नेतृत्व में तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति का गठन किया है।

इस समिति में श्री श्री रविशंकर और सीनियर एडवोकेट श्रीराम पंचू शामिल हैं। अदालत ने कहा है कि मध्यस्थ चाहें तो समिति में और सदस्यों को भी शामिल कर सकते हैं।

ये फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने दिया। जस्टिस गोगोई के अलावा बेंच में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर शामिल थे।

कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता की कार्यवाही पर मीडिया रिपोर्ट नहीं कर सकेगा। कोर्ट के आदेश के मुताबिक मध्यस्थता की प्रक्रिया अगले एक हफ़्ते में शुरू कर देनी होगी।

अदालत का आदेश है कि मध्यस्थता बंद कमरे में और पूरी तरह गोपनीय होगी। आदेश के मुताबिक़ मध्यस्थता की कार्यवाही फ़ैज़ाबाद में होगी।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने साफ कहा है, ‘कोर्ट की निगरानी में होने वाली मध्यस्थता की प्रक्रिया गोपनीय रखी जाएगी।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता की प्रक्रिया कैमरे के सामने होनी चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 6 हफ्ते बाद होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ तो मध्यस्थ पैनल में किसी और को भी शामिल कर सकते हैं। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से फैजाबाद में मध्यस्थों को सभी सुविधाएं प्रदान करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अगर जरूरी हुआ तो मध्यस्थ आगे कानूनी सहायता भी ले सकते हैं।

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह केवल जमीन का नहीं बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला है। कोर्ट ने इस बात को प्रमुखता से कहा था कि मुगल शासक बाबर ने जो किया उसपर उसका कोई नियंत्रण नहीं है और उसका सरोकार सिर्फ मौजूदा स्थिति को सुलझाने से है।

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