“प्रत्येक न्यायाधीश में होने चाहिए नारीत्व के कुछ अंश”

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी ने कहा कि पूर्ण न्याय करने के लिए प्रत्येक न्यायाधीश में “नारीत्व के कुछ अंश” होने चाहिए।

जस्टिस सीकरी बुधवार को अपनी सेवानिवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

न्यायमूर्ति सीकरी ने पूरे करियर के दौरान मिली मदद के लिए न्यायपालिका एवं वकीलों का धन्यवाद किया।

शाम में शीर्ष अदालत के लॉन में एससीबीए के कार्यक्रम के दौरान न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा, “प्रकृति से मेरा कुछ अंश नारी सा है। इस लिंग में जिस तरह के गुण होते हैं अगर उस पर जाएं तो मेरे विचार में पूर्ण न्याय करने के लिए प्रत्येक न्यायाधीश में नारीत्व के कुछ अंश होने चाहिए।”

उन्होंने कहा, “आखिर न्याय की प्रतीक एक देवी हैं। बेशक उनकी आंख पर पट्टी बंधी है लेकिन उनका दिल बंद नहीं है जहां से निष्पक्ष न्याय के गुण निकलते हैं।”

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायमूर्ति सीकरी द्वारा प्रदर्शित आचरण एवं संवेदनशीलता युवाओं को प्रेरित करना जारी रखेगी।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोगोई पहले उस पीठ के साथ बैठे जिसमें न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस ए बोबडे शामिल थे। न्यायमूर्ति सीकरी पीठ का हिस्सा इसलिए थे क्योंकि आज उनका उच्चतम न्यायालय में अंतिम कार्य दिवस था। शीर्ष अदालत में यह प्रथा है कि सेवानिवृत्त हो रहा न्यायाधीश अंतिम दिन प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ का हिस्सा होता है।

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