वैद्य राजेश कपूर : जानिये कैसे सिर्फ पानी और भोजन के सही तरीकों से दूर होती हैं बीमारियाँ

Vaidya Rajesh Kapoor - Ma Jivan Shaifaly

जिन दिनों आचार्य राजेश कपूर का पहला एक वीडियो प्राप्त हुआ, उन दिनों में रोग हारिणी शक्ति पर प्रयोग कर रही थी. उनको जब पहली बार देखा तो देखते से ही इनकी सूरत किसी योगी जैसी नज़र आई, देखते ही समझ गयी थी कि इन्हें उसी शक्ति ने मेरे पास भेजा है… फिर एक एक करके इनके बहुत सारे वीडियो देखे….

इनके माथे पर उभरती लकीरें तो बहुत कुछ कहती ही हैं, लेकिन इनकी आवाज़ में गज़ब का सम्मोहन है, आप बस आँख बंद करके इन्हें सुनेंगे तो वे जो कह रहे हैं उसका पालन नहीं भी करेंगे तब भी आप इनकी आवाज़ मात्र से खुद में एक विशेष ऊर्जा अनुभव करेंगे…

चूंकि उनकी वाणी बहुत कोमल और धीमी है इसलिए माइक न होने के कारण संलग्न वीडियो में उनकी आवाज़ धीमी सुनाई देगी, जिसे मैंने उनकी बातों से सम्बंधित कैप्शन जोड़कर दर्शकों के लिए आसान कर दिया है.

रोग हारिणी शक्ति, अस्तित्व की ऊर्जा का जादू, आधुनिक जीवन में हमारे द्वारा उपयोग में लाई जा रही चीज़ें जैसे साबुन, शैम्पू, टूथ पेस्ट का दुष्परिणाम, ध्यान का महत्व, जीवन शैली में प्रकृति का जुड़ाव, जैसी कई बातें उनके वीडियो से प्रामाणिक प्रयोग के माध्यम से जानने को मिलेगी.

हम आधुनिक जीवन शैली के गर्त में गिरते हुए खुद को मृत्यु के मुंह में धकेल रहे हैं, जबकि हमारी प्राचीन जीवन शैली हमें स्वस्थ जीवन जीते हुए भी आध्यात्मिक यात्रा की ओर उन्मुख करे रहती है.

आचार्य राजेश कपूर के एक वीडियो में उन्होंने कहा था – “बस सोचने भर से सब हो जाता है… आप जैसा सोचते जाएंगे आपका जीवन वैसा होता चला जाएगा.” जिसे आप सकारात्मक सोच का जादू कहकर पढ़ते आए हैं, अब पढ़ना छोड़ इसे जीना शुरू कर दीजिये, इस बारे में सोचना शुरू कर दीजिये क्योंकि सच में सिर्फ़ सोचने भर से सब हो जाता है, और इस जादू की मैं साक्षी हूँ.

क्योंकि मात्र छ: महीने पहले मेरा वैद्यजी से परिचय हुआ और मन से प्रार्थना उठी कि मुझे इनके दर्शन करना है. और एक दिन सुबह सुबह सात बजे उनका फोन आता है मैं आपके शहर में हूँ. मेरी प्रसन्नता आप समझ सकते हैं, क्योंकि जब जब मेरा शिष्यत्व भाव प्रबल हुआ है, जीवन में गुरुओं का प्राकट्य अवश्य हुआ है.

परन्तु गुरु के दर्शन इतने भी आसान नहीं होते. सुबह सात बजे हुई फोन पर बातचीत के बाद जब मैंने दस बजे उनसे मिलने का समय तय किया तो इस बीच इतनी बाधाएं आईं कि उनके ठहरने के स्थान को खोजते हुए मुख्य गंतव्य पर मुश्किल से हम साढ़े ग्यारह बजे पहुँच पाए…

लेकिन जब मैं और स्वामी ध्यान विनय उनके ठहरने के स्थान पर पहुंचे तो उनके और हमारे बीच एक बड़ा सा लोहे का गेट था जो बंद था और उस पर ताला लगा था…

गेट के इस पार खड़ी मैं उनको आते हुए देख रही थी और उनके समीप आते ही मैंने हाथ जोड़ते हुए कहा, आज एक बार फिर यह सिद्ध हुआ कि गुरु के दर्शन बहुत दुर्लभ होते हैं… इतने पास खड़े होकर भी मैं उनके चरण स्पर्श न कर सकी…

फिर लोगों से उस रेस्ट हाउस में पहुँचने का अन्य मार्ग खोजते हुए जब उनके चरण स्पर्श किये तो मन भर आया… हमें लगा शिविरों में व्यस्तता के चलते कदाचित अब उनसे वार्तालाप के लिए अधिक समय न मिल पाएगा… लेकिन मैं कम समय के अफ़सोस और उनके दर्शन की प्रसन्नता के मिले जुले भाव के साथ उनके सम्मुख पहुँची तो एक बार फिर अस्तित्व के जादू पर अचम्भित हुई कि जब आप पाने की कामना से मुक्त हो जाते हैं तो आपकी उम्मीद से अधिक आपको मिल जाता है.

तो ईश्वर कृपा से उनका शिविर अगले दिन हमारे शहर से दूर किसी गाँव में था. तो बकौल स्वामी ध्यान विनय हम उनका अपहरण करके घर ले आए. और जीवन के उन 21 घंटों में हमने जो कुछ भी जाना वह हमारे लिए अमूल्य धरोहर है.

आधुनिक जीवन शैली और साबुन, शैम्पू, टूथ पेस्ट के उपयोग से ऊर्जा के क्षरण का साक्षात प्रमाण, लोहे ताम्बे, पीतल, मिट्टी के बर्तनों के उपयोग से बीमारियों से छुटकारा और प्राचीन भारतीय जीवन शैली की ओर लौट आने के लिए लोगों को जागरूक करने का संकल्प… इसके अलावा धूप बत्ती, मोबाइल टीवी रेडिएशन से बचने के लिए “देसी” गाय के गोबर से बनने वाली चिप बनाना सिखाया जिसको मोबाइल पर चिपकाने से उसकी तरंगों के दुष्प्रभाव से बचाव के साक्षात प्रमाण मिले. इसके अलावा घर की सब्जियों के छिलकों और मुरझा चुके फूलों से पानी को शुद्ध करने के लिए बनाया जाने वाले एंजाइम की विधि और उनके आध्यात्मिक प्रवचनों का आशीर्वाद भी मिला….

ये 21 घंटे हमारी जीवन शैली को बदलने के लिए जैसे उत्प्रेरक थे.. अब घर में जितने लोहे, कांसे, ताम्बे, मिट्टी के बर्तन है सब पुराने ट्रंक से बाहर आकर रसोई घर में चमचमा रहे हैं.

ऐलोपैथिक दवाइयों से दूरी के लिए तो मैंने कई लेख लिखे और खुद भी उसका पालन किया है. अब उनके आशीर्वाद से स्वस्थ रहकर आध्यात्मिक ऊर्जा को उच्च स्तर पर ले जाने के लिए बहुत सारी जानकारियाँ और ज्ञान प्राप्त हुआ, जिसे मैं अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के लिए कृतसंकल्पित हूँ.

यह वीडियो एक छोटा सा प्रयास है. आगे भी वीडियो-ऑडियो माध्यम से गुरूजी के दिए ज्ञान की एक-एक बात विस्तार से आपको बताती रहूंगी.

परिचय

वैद्य राजेश कपूर गोविज्ञान पर अनेक वर्षों से अध्ययन और शोध कार्य कर रहे हैं। इन्होंने पंचगव्य के अनेक शास्त्रीय एवं नए योग बनाए हैं और हजारों गोभक्तों को प्रशिक्षित किया है।

इनके शोध पत्र आयुष विभाग (भारत सरकार) व प्रदेश सरकारों द्वारा छापे गए हैं। विज्ञान भवन दिल्ली में भी शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। नवीन पंचगव्य उत्पाद बनाने पर इतना शोधकार्य शायद ही किसी और ने किया होगा।

ऊर्जा विज्ञान पर इनकी खोजों के कारण देश ही नहीं, विदेशों में भी इनकी एक पहचान बनी है। सैकड़ों पंचगव्य चिकित्सक इनका मार्गदर्शन प्राप्त कर रहे हैं। यह सब सीखने का अवसर आपको कहीं और शायद ही मिले।

अमर हुतात्मा श्री राजीव दीक्षित जी के अधूरे अभियान को पूरा करने में वैद्य राजेश कपूर जी का ज्ञान अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है।

वैद्य राजेश कपूर से सीखिए सब्ज़ी के छिलकों और मुरझाए फूलों से एंजाइम बनाना

600 ml पानी, 300 ग्राम सब्ज़ी के छिलके या मुरझाए फूल और पत्तियाँ और 100 ग्राम गुड़
(अनुपात – 6:3:1)
विधि

एक या दो लीटर की प्लास्टिक (यही एक मात्र वस्तु है, जिसमें प्लास्टिक का प्रयोग हो रहा है) की बड़ी बोतल में 600 ml पानी भरकर, उसमें 300 ग्राम के करीब मुरझाए फूल पत्ती, या भगवान को अर्पित किये जा चुके फूल जो हम दूसरे दिन फेंक देते हैं उन्हें इकट्ठा करके उस बोतल में डाल दें.
यदि आप सब्ज़ी के छिलकों का प्रयोग कर रहे हैं तो लहसुन और प्याज़ के छिलके बिलकुल न लें.
प्रयास यह रहें कि या सिर्फ फूल पत्ती का बनाएं, या सिर्फ सब्ज़ी के छिलकों या फेंकी जाने वाली कच्ची सब्जियों का बनाएं.

अब इस बोतल में 100 ग्राम गुड़ डाल दें.

इस बोतल को घर के किसी कोने में रख दें.

एक महीने तक 24 घंटे में एक बार सिर्फ ढक्कन ढीला कर उसकी गैस निकाल दें, ढक्कन पूरा नहीं खोलना है.

ऐसा एक महीने तक करने के बाद अगले महीने हफ्ते में एक बार बोतल का ढक्कन ढीला कर उसकी गैस निकाल लेना है.

फिर तीसरे महीने में पन्द्रह-पन्द्रह दिन में दो बार ऐसे ही ढक्कन खोलकर गैस निकाल लेना है.

और इस तरह नब्बे दिन पश्चात आपका एंज़ाइम बनकर तैयार हो गया है.

अब इसे मोटे कपड़े से छानकर उसका तरल पदार्थ किसी कांच के बर्तन में भर लीजिये.

फूल और सब्जियों के अवशेष आप अपने गमलों में खाद के रूप में उपयोग में ले लीजिये.

और यह एंज़ाइम इतना कारगर है कि दस लीटर पानी में सिर्फ एक ml डालना है और आपका पानी शुद्ध हो जाएगा.

सहजन के सूखे बीज से पानी की शुद्धिकरण के बारे में आपने सुना ही होगा. वैद्य राजेश कपूर ने एक नई जानकारी दी कि हरी सहजन की फली का एक टुकड़ा आप पीने के पानी में कुचलकर डाल दीजिये. इससे भी पानी शुद्ध और पौष्टिक हो जाता है.

आयोडीन युक्त पैकेट वाले नमक की जगह खड़ा नमक, सैंधा नमक और काले नमक का उपयोग करने से थाइरॉइड जैसी बीमारियों से छुटकारा मिल जाएगा.

बाकी पानी और भोजन किस भाव से आपको ग्रहण करना है इसका प्रमाण आप इस वीडियो में प्रत्यक्ष देखें.

अब समय आ गया है कि हम अंग्रेजों की दी हुई तथाकथित आधुनिक जीवन शैली छोड़कर हमारी प्राचीन हिन्दू जीवन शैली की ओर लौट चलें और भारत को फिर से स्वस्थ बनाएं और थाइरॉइड, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और ऐसी कई बीमारियों के बहाने से दवाइयों का जो माया जाल बिछाया गया है उससे मुक्त हो पाएं.

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