न तो हम कश्मीर छोड़ने जा रहे हैं, न ही हमें युद्ध या आतंकी हमले से हरा सकते हैं वे

समय-समय पर कुछ आतंकी यह ताल ठोकते हैं कि अफगानिस्तान से बाहर निकलने के लिए अमेरिका समझौता करने को तैयार है।

वे यह भी हुंकार भरते है कि उन्होंने रूसियों को अफगानिस्तान से खदेड़ दिया। अतः शीघ्र ही भारत भी कश्मीर पर समझौते के लिए तैयार हो जाएगा या वे कश्मीर को भारत से छीन लेंगे।

यद्यपि ये लोग परले दर्जे के मूर्ख और गंवार हैं, फिर भी इनके दिवास्वप्न को तोड़ना आवश्यक है। नहीं तो ये अपने गुमान में 72 हूरों के सपने देखते रहेंगे, जो इन्हे मिलनी नहीं।

पता नहीं, ये लोग चीन का उदाहरण क्यों नहीं देते। न केवल चीन को इन आतंकियों ने कश्मीर का एक छोटा भाग दे दिया, साथ ही वे चीन द्वारा दस लाख लोगों को कैंप में रखने और सुवर का मांस खिलाने की संस्तुति भी करते हैं। क्या चीन से वे उसका कोई भाग अलग कर सकते है?

सबसे पहले, सोवियत यूनियन इसलिए अफगानिस्तान से बाहर खदेड़ दिया गया क्योंकि उस समय पूंजीवादी और साम्यवादी विचारधारा के मध्य वर्चस्व को लेकर लड़ाई थी और पूंजीवादी देशों – जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन इत्यादि प्रमुख है – ने पकिस्तान को मोहरा बनाकर रूसियों को हरा दिया। उस समय रूस की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल थी और वह किसी भी तरह से अफगानिस्तान से पीछा छुड़ाकर अपनी वित्तीय स्थिति को संभालना चाहता था।

अब आते हैं अमेरिका पर। यह सच है कि अमेरिका अफगानिस्तान को उसके हाल पर छोड़ने को उत्सुक है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि अमेरिका ने ओसामा को मारकर, 9/11 का बदला ले लिया। साथ ही लीबिया से लेकर इराक, सीरिया, यमन और पाकिस्तान तक अस्थिरता फ़ैल गयी (इशारों में कही गयी इस बात को समझने का प्रयास करिये)।

सोचने की बात यह है कि अफगानिस्तान न तो अमेरिका, न ही रूस का अभिन्न अंग था, न ही उनके निकट पड़ोस में स्थित था (यद्यपि अफगानिस्तान सोवियत यूनियन का ‘दूर’ का पड़ोसी था)।

लेकिन क्या अमेरिका ने अपने पड़ोस में स्थित किसी भी देश को आतंकवाद फ़ैलाने दिया या अपने किसी भी क्षेत्र अलग होने दिया?

इसी प्रकार, रूस ने चेचन्या और दागेस्तान में आंतकियों के शरीर में पीतल भर दिया। रूस अपने पड़ोस में स्थित किसी भी देश को अपने हितों को नुकसान नहीं पहुंचाने देता, भले ही वे देश विश्व के सबसे शक्तिशाली मिलिट्री संगठन नाटो के सदस्य हों।

क्या पड़ोस के आतंकियों को लगता है कि वे रूस या अमेरिका से उनका कोई क्षेत्र छीन सकते हैं या उनके पड़ोसी देशों में आतंकवाद का सहारा ले सकते हैं?

यहीं पर इन आतंकियों की बुद्धि घुटने में है। क्योंकि वे यह समझ ही नहीं पा रहे कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भारत आस-पास के क्षेत्रों की न केवल भाषा समझता है, बल्कि उनकी मानसिकता से भी परिचित है।

न तो भारत कश्मीर छोड़ने जा रहा है, न ही वे भारत को किसी भी युद्ध या आतंकी हमले से हरा सकते हैं।

उलटे, भारत – जो इस समय विश्व की चौथी सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति है – वह पलट कर उनका समूल विनाश और कर देगा।

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