निहत्थे हिन्दुओं को मारने इंदिरा ने बुलाई थी जम्मू कश्मीर मिलिशिया

वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन शर्मा बता रहे हैं कि कैसे 07 नवम्बर 1966 को इंदिरा गाँधी ने दिल्ली को किया था फौज के हवाले और 2500 निहत्थे साधु, संत, औरतों, बच्चों को गोलियों से भूना.

शायद इस निर्णय के कारण ही इंदिरा ‘आयरन लेडी’ कहलाती हैं.

नई बात जो इस इंटरव्यू से पता चली वो ये कि दिल्ली पुलिस द्वारा साधुओं पर गोली चलाने से इनकार किए जाने की आशंका के चलते इंदिरा ने Jammu-Kashmir Militia (Later in 1976 J&K militia was renamed as Jammu and Kashmir Light Infantry) को दिल्ली बुलाया था.

मनमोहन शर्मा कहते हैं – जम्मू-कश्मीर मिलिशिया को इसलिए बुलवाया था क्योंकि उसमें एक विशेष सम्प्रदाय के ही लोग थे.

और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का आलम तो देखिए कि सरकार एडवाइज़री (लिखित नहीं, मौखिक… यानी सरल शब्दों में धमकी कहा जाए) जारी करती है कि तमाम अख़बार सिर्फ सरकार का प्रेस नोट ही प्रकाशित करें, न कि अपने संवाददाताओं की रिपोर्ट!

और इस प्रेस नोट में क्या था? सिर्फ 11 मौतों का उल्लेख!!!

हज़ारों निहत्थे साधु, संत, औरतों, बच्चों को मार कर सिर्फ 11 मौतों का उल्लेख!

लोग काँग्रेस के अत्याचारों में इमरजेंसी और सिख नरसंहार को ही गिनते हैं, पर इस घटना को भूल जाते हैं. एक मायने में ये सिख नरसंहार से अधिक दुर्दांत घटना थी, जिसमें सरकार के निर्देश पर, एक सरकारी फ़ोर्स ने दिनदहाड़े अपने ही हज़ारों लोगों को देश की राजधानी में, संसद के सामने, संसद के जारी रहते मौत के घाट उतार दिया.

क्या वाकई इंदिरा हिन्दू थीं?

पप्पू-पप्पी-उनकी मम्मी और उनके चम्मचों से सवाल तो पूछे ही जाने चाहिए. प्रश्न हिंदुओं की राजनीति करने वालों से भी पूछे जाने चाहिए कि भई, आप भी कई-कई बार सत्ता में रहे, आपने क्यों नहीं इस हत्याकांड की जांच कराई?

माना कि इंदिरा ने कोई सबूत बाक़ी न रखा होगा, पर देश के वरिष्ठतम पत्रकार श्री मनमोहन शर्मा जो इस नरसंहार के प्रत्यक्षदर्शी थे, आज भी हमारे बीच हैं, उनके संस्मरणों, बयानों के आधार पर शुरुआत तो की जा सकती है.

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