ऐसे देश के दावों के साथ हाँ में हाँ मिला रहे हैं हमारे विपक्षी नेता!

  • अतुल कुमार

किसी हवाई हमले में हताहत हुए लोगों की संख्या कैसे पता चलती है?

या तो जिस देश पर हमला हुआ वो बताता हैं कुछ दिन बाद नुकसान का जायजा लेकर, या फिर जिन्होंने हमला किया वो अनुमान लगाकर बताते हैं।

हमला करने वालों ने वहां जा कर लाशों की गिनती करके उनकी फोटो खींच कर दिखाईं हों ये कभी सुना नहीं।

अनुमान कैसे लगाया जाता है?

जहाँ हमला किया वहां अंदाज़न उस वक़्त कितने लोग थे, किस तरह के बम या मिसाइल से हमला किया, बम या मिसाइल ने टारगेट को कितना ध्वस्त किया आदि आदि।

हिरोशिमा व नागासाकी पर परमाणु बम मार के क्या अमेरिका ने वहां लाशें गिनी थी? कुछ सौ मीटर के दायरे में तो लोगों की हड्डियां भी भाप बन के उड़ गयी होगी। फिर कैसे बोला जाता है कि इतने लाख मरे? अंदाज़ ही तो है कि वहां उस वक़्त लगभग कितने लोग थे और उस तरह का परमाणु बम कितना नुकसान करता है।

26 फरवरी की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट व पाक अधिकृत कश्मीर के कुछ ठिकानों पर हमला किया। इस हमले में मिराज 2000 युद्धक विमानों का प्रयोग हुआ।

इन युद्धक विमानों पर हवा से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें लगी होती हैं ये सर्वविदित है। ये मिसाइलें एक मोहल्ले जितने इलाके को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती हैं और इनको टारगेट के ऊपर जाकर छोड़ने की ज़रुरत भी नहीं है क्योंकि ये गाइडेड होती हैं और 40-50 किलोमीटर दूर से भी मारी जाये तो भी सटीक निशाने पर मार करती हैं (ये भी सर्वविदित है)।

ऐसे में अगर वायुसेना कह रही है कि उन्होंने बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के उस खास ठिकाने पर घातक हवाई हमला किया, ऐसा हमला जो टारगेट को पूरी तरह नष्ट कर देता है, ऐसे समय जब वहां मौजूद अधिकतर आतंकवादी सो रहे होंगे, तो ये बोलना कि हवाई हमले में वहां मौजूद अधिकतर आतंकवादी व उनके हैंडलर/ट्रेनर मारे गए व बाकि गंभीर रूप से घायल हुए, इसमें शक की गुंजाईश कहाँ है?

शक के दो ही कारण हो सकते हैं। पहला ये कि वायुसेना के विमानों ने उस टारगेट पर मिसाइल मारी ही नही और ऐसे ही हवाई सैर करके इधर उधर सादे बम मार कर आ गए (ठीक यही पाकिस्तान ने उसी सुबह कहा था)। दूसरा ये कि जिस टारगेट को ध्वस्त किया वहां कोई था ही नहीं।

पहले में तो सीधा सीधा वायुसेना को झूठा बोलना है, क्योंकि वायुसेना के तो चीफ ने भी बोल दिया है कि हमने वो टारगेट ध्वस्त किया। दूसरे में भी सेना व इंटेलिजेन्स को ही झूठा बोलना है।

कोई राजनेता तो खुद ये पता नहीं करता कि दुश्मन देश में कहाँ कहाँ ठिकाने हैं और वहां क्या क्या होने का अनुमान है। ये काम सेना की इंटेलिजेन्स, अन्य इंटेलिजेन्स एजेंसियां, अंतरिक्ष से नज़र रखने वाले उपग्रह व मोबाइल तथा अन्य संचार के सिग्नल को मॉनिटर करने वाली एजेंसियां करती हैं।

इतना बड़ा ऑपरेशन तभी किया जाता है जब सभी सूत्र, अलग अलग एजेंसियां एक ही बात की तरफ इशारा कर रही हो। इसलिए ये बोलना कि जहाँ हमला किया या तो वो अड्डा जैसा समझा था वैसा था ही नहीं, या फिर वहां उस रात जितने आतंकवादी होने का अनुमान था उतने थे नहीं।

दोनों सूरत में राजनेताओं को नहीं बल्कि मिलिट्री इंटेलिजेन्स, इसरो, रॉ, NTRO आदि को झूठा बोला जा रहा है। अब ये बात अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी बोलना शुरू कर दिया है कि पाकिस्तान ने बालाकोट का वो इलाका सील कर दिया है और लोकल पुलिस को भी वहां जाना मना है।

अगर कुछ हुआ ही नहीं तो ये सब क्यों? ये बात पाकिस्तान में कई लोगों व अन्य देशों की एजेंसियों को पता है कि बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद का एक रेसोर्ट जैसा अड्डा है। ये भी कोई छुपी बात नहीं है कि जब भारत में कोई आतंकी हमला होता है और उसके बाद PoK स्थित आतंकियों के लॉन्चपैडों को भारत के हमले का खतरा होता है तो इनके सरगना आतंकियों को पाकिस्तान के अंदर स्थित बालाकोट जैसे ठिकानो में शिफ्ट कर देते हैं कुछ दिन के लिए जब तक मामला ठण्ड न पड़ जाये।

क्योंकि 26 फ़रवरी से पहले पाकिस्तान ने सोचा भी नहीं था कि भारत पाकिस्तान के अंदर (PoK नहीं) के ठिकानों पर भी हवाई हमला कर सकता है, इसलिए अगर वहां कुछ सौ आतंकवादियों को शिफ्ट कर दिया गया था तो ये कोई यकीन से परे वाली बात तो है नहीं।

वहां की उपग्रह से ली गयी तस्वीरें अभी केवल दुनिया की कुछ खास एजेंसियों के पास होंगी। कमर्शियल उपग्रहों द्वारा लिए गए चित्र अभी बहुत महंगे होंगे (जितनी ताज़ी तस्वीर, उतनी मंहगी)। पर कुछ दिन में कमर्शियल उपग्रहों की तस्वीरें सस्ते में आम लोगों को भी मिल जाएँगी व मैप/अर्थ आदि साइट चलाने वाली कंपनियां भी उनको आम लोगों को दिखाने लगेंगी।

फिर दिख जायेगा की 25 फ़रवरी को शाम को वो जगह कैसे दिखती थी और 26 को सुबह कैसे दिख रही थी। तब क्या बोलेंगे? पर जिनको बेशर्मी से झूठ बोलकर सत्ताधारी पार्टी पर आरोप लगाने के लिए अपनी वायुसेना को ही झूठा साबित करने में कोई परहेज़ न हो, उनको क्या फ़र्क पड़ेगा? हज़ार झूठ में एक और सही। और ये तो फिर भी बोल ही सकते हैं कि ठीक है ठिकाना नष्ट हुआ होगा पर लाशें कहाँ हैं?

क्या ये केवल संयोग मात्र है कि ठीक यही बात पाकिस्तान भी बोल रहा है? कि भारतीय वायुसेना के मिराज आये तो थे पर कुछ पेड़ गिरा के चले गए।

पाकिस्तान की सेना का ट्रैक रिकॉर्ड भी जरा देख लेते हैं। जब अमेरिका ने पाकिस्तान की सेना की गोद से खींच कर ओसामा को गोली मारी थी तो पाकिस्तानी सेना व सरकार ने बड़ी बेशर्मी और ढीठता से सपाट चेहरे के साथ बोला “अच्छा, तो ये हमारी गोद में बैठा हुआ था? अरे हमे पता ही नहीं चला कि कब आकर गोद मे बैठ गया।”

कारगिल को लेकर पाकिस्तानी सेना ने आज तक नहीं माना कि वो उनकी सेना का कारनामा था। अभी भी यही बोलते हैं कि वो मुजाहिद्दीन थे। पाकिस्तान सेना के कई सैनिक व अफसर अपने कमांडरों के आदेश पर बहादुरी से लड़े और वीरगति को प्राप्त हुए पर पाकिस्तान ने उनकी लाशें भी न स्वीकार कीं। भारतीय सेना ने ही उनका कफ़न दफ़न किया। झूठ को कायम रखने के लिए पाकिस्तान की सेना अपने सैनिकों के साथ यही करती है।

उरी के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक को भी पाकिस्तान बोलता है कि कुछ हुआ ही नहीं था बस भारत का झूठ था (यही बात अपने देश के राजनेता भी बोले थे जबकि उस सर्जिकल स्ट्राइक की सूचना खुद वर्दी पहने आर्मी के एक लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अफसर ने प्रेस को आधिकारिक और पर दी थी)।

ज्यादा दूर क्यों जाना, 27 फ़रवरी को जिस F-16 को विंग कमांडर अभिनन्दन ने मार गिराया था, उसके पायलट पाकिस्तानी वायु सेना के विंग कमांडर शहज़ाज़उद्दीन थे जो घायल होकर पाकिस्तान के कब्ज़े वाले इलाके में गिरे। उनको जाहिल, धर्मोंमादी जनता ने पीट पीट कर मार डाला। उनको भी पाकिस्तान ने गुमनाम मौत दे दी, क्योंकि उनको सैनिक सम्मान के साथ दफनाने से ये मानना पड़ता कि उस दिन वो F-16 उड़ा रहे थे और उनका F-16 मार गिराया गया।

ऐसे देश के दावों के साथ हमारे यहाँ के नेता हाँ में हाँ मिला रहे हैं!

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