नौ सौ चूहे खाकर काँग्रेसी बिल्ली हज को चली

काँग्रेस आज आरोप लगा रही है कि एयर स्ट्राइक पर देश का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजनीति कर रहा है।

काँग्रेस शायद भूल गयी है कि अपनी रणनीतिक कूटनीतिक सफलताओं का जयगान करना कोई गलत कार्य नहीं होता। केवल देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हर सत्ताधारी दल यह करता है।

लेकिन राहुल गांधी के पिताश्री के मार्गदर्शन और संरक्षण में एक लाश को हथकंडा बना कर उस पर राजनीति करने का जो रक्तरंजित कलंकित इतिहास काँग्रेस ने लिखा था, वैसी कोई दूसरी मिसाल दुनिया में नहीं मिलती।

31 अक्टूबर 1984 को प्रातः लगभग 10 बजे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके अंगरक्षकों द्वारा कर दी गयी थी। लेकिन उनका अंतिम संस्कार पांचवें दिन 4 नवम्बर 1984 को शाम 5 बजे किया गया था। इन 5 दिनों के दौरान दूरदर्शन पर लगातार केवल इंदिरा गांधी की लाश का ही लाइव प्रसारण होता रहा था।

लाश के पास दंगाई काँग्रेसियों द्वारा लगाए जाते रहे ‘खून का बदला खून से लेंगे’ सरीखे खून खौलाऊ/ भड़काऊ नारे उस समय देश में उपलब्ध सरकारी नियंत्रण वाले दूरदर्शन के माध्यम से कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरे देश में में लगातार 5 दिन तक गूंजते रहे थे।

परिणामस्वरूप केवल दिल्ली में 2800 सिक्खों समेत पूरे देश में लगभग 10,000 निर्दोष सिक्खों को दंगाइयों ने सरेआम मौत के घाट उतार दिया था।

उस समय और उसके बाद वर्षों तक केवल देश ही नहीं विदेशों तक में इस बात पर गम्भीर बहसें होती रहीं थीं कि उस समय देश में उपलब्ध एकमात्र टीवी चैनल दूरदर्शन पर इंदिरा गांधी की लाश और लाश के इर्दगिर्द मंडराते दंगाई काँग्रेसियों द्वारा लगाए जाते रहे ‘खून का बदला खून से लेंगे’ सरीखे भड़काऊ नारों के लगातार 5 दिनों तक लाइव प्रसारण ने दिल्ली और देश में सिक्ख विरोधी दंगों और 10,000 सिक्खों के सरेआम कत्लेआम की हिंसक आग भड़काने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उल्लेख कर दूं कि खून खौलाऊ भड़काऊ नारों के बैकग्राउंड म्यूज़िक के साथ इंदिरा गांधी की लाश का तमाशा इसलिए दिखाया गया था क्योंकि कुछ ही दिनों में चुनाव होने थे।

इसे इस उदाहरण से समझ लीजिए कि 4 नवम्बर तक सरकारी दूरदर्शन पर इंदिरा गांधी की लाश नॉन स्टॉप दिखाई गई थी। और इसके 56 दिन के भीतर देश में चुनाव सम्पन्न हो चुके थे और 31 दिसम्बर 1984 को राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी?

क्या काँग्रेसी नेता, विशेषकर राहुल गांधी यह बताएंगे कि 5 दिनों तक इंदिरा गांधी की लाश का अन्तिम संस्कार क्यों नहीं कराया गया था? क्या उन 5 दिनों में दिल्ली में लाशों का ढेर लग गया था? अर्थात क्या किसी का भी अंतिम संस्कार नहीं हुआ था?

दरअसल लगातार 5 दिनों तक इंदिरा गांधी की लाश का तमाशा खून खौलाऊ भड़काऊ नारों के बैकग्राउंड म्यूज़िक के साथ सिर्फ इसलिए दिखाया गया था ताकि भावनाओं की भरपूर खाद और पानी देकर वोटों की फसल लहलहाई जाए। यह काँग्रेसी हथकण्डा भरपूर सफल भी हुआ था। लोकसभा की 543 में से 412 सीटें काँग्रेस ने जीती थीं।

भारत के राजनीतिक इतिहास में 1984 का लोकसभा चुनाव, भावनाओं को भड़का कर वोट बटोरने की राजनीति का सर्वाधिक शर्मनाक अश्लील और घृणित उदाहरण है।

50 की आयु सीमा पार कर चुकी वर्तमान पीढ़ी के किसी भी सदस्य से बात करिये वह उपरोक्त शर्मनाक सच्चाई की पुष्टि तत्काल कर देगा।

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