ज्योतिष के अनुसार अगले 8 माह में देश-विदेश में किस प्रकार के बन रहे हैं प्रबल योग

इस समय बुध कमज़ोर है – रिश्ते कमज़ोर है, भाईचारा कमज़ोर है और बुद्धिमानी कमज़ोर है।

शनि कमज़ोर है – धैर्य चूक रहा है, क्रोध बढ़ रहा है, अग्निकाण्ड और विध्वंस की संभावनायें बढ़ रही है।

कर्मयोग धुंधला हो रहा है और धर्मयोग प्रबल हो रहा है। शक्तिशाली लोग, शक्ति संचालक और ऊँचे ओहदों पर बैठे लोग स्वतंत्रता का उपयोग करेंगे और शक्ति संचालन करेंगे। इससे अधिकारों का हनन होगा और शक्ति की जय होगी।

तीव्रगामी बृहस्पति है –

रचनात्मकता, ज्ञान, बड़प्पन और शालीनता को ताक पर रख देगा और पुरुषार्थ को प्रबल बना देगा। जो लोग इसके फलों से चूक जायेंगे वो लोग पुरुषार्थ का प्रदर्शन करने से नहीं चूकेंगे।
इससे अहंकार, अभिमान और बल प्रयोग के विचार प्रकट होंगे।

गुरु बृहस्पति –

वर्तमान में, देश, काल और परिस्थियों के अनुसार चीन का कारक बना हुआ है। गुरु बृहस्पति के संचार का विश्लेषण करने पर पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों का पता लग सकता है। गुरु बृहस्पति की तीव्र गति दर्शाती है कि – इस समय चीन बहुत सक्रीय है और उस पर दृष्टि रखे हुये देश उसकी गतिविधियों का अंदाज़ा नहीं लगा पा रहे हैं। गुरु रहस्य कारक ग्रह है और तीव्रगामी होने पर और रहस्यमय हो जाता है। ऐसे में गुरु के रूप में चीन कई स्तरों पर अपने खेल-खेल सकता है। इसका प्रभाव पूरे विश्व पर पड़ेगा।

विश्व के छोटे देश –

आपसी रिश्तों, तालमेल और सौहार्द के लिये दिशाहीन होंगे और बड़े देशों के क्रिया-कलापों से आशंकित होंगे। दक्षिण चीन सागर के आसपास बसे देश इससे सर्वाधिक प्रभावित होंगे। क्योंकि चीन की गतिविधियां संदेहास्पद होगी।

गुरु तीव्रता से शनि की ओर बढ़ रहा है और शनि इस समय पाकिस्तान का कारक बना हुआ है। शनि के दूसरी ओर से केतु बढ़ा चला आ रहा है जो 7 मार्च को मिल भी जाएगा।

इस समय केतु – भारत का कारक बना हुआ है। वक्री केतु और मार्गी शनि साथ-साथ रहने वाले हैं।

तीव्रता से शनि की ओर बढ़ता गुरु – शनि पर नियंत्रण बनाने का प्रयास करेगा।

दूसरी ओर से केतु – शनि रूपी पाकिस्तान को को भस्म कर देने के लिये तीव्रता से उसकी ओर बढ़ेगा।

यहां भारत और पाकिस्तान आपस मे 24 जनवरी 2020 तक प्रबल तनावपूर्ण स्थिति में होंगे।

तभी गुरु बृहस्पति की गति शिथिल होने लगेगी और शनि पर से उसका नियंत्रण हट जायेगा। 10 अप्रेल आते-आते गुरु बृहस्पति की गति शून्य हो जायेगी।

यही वो समय होगा – जब चीन और पाकिस्तान की मिलीभगत की कुछ बातें उजागर हो सकती हैं। और फिर गुरु वक्री हो जायेगा अर्थात चीन अपनी स्थिति को सुधारने में लग जायेगा।

लेकिन – वक्री गुरु जैसे ही राशि बदलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा – उसका राहु के साथ षड-अष्टक योग बन जायेगा। तब पश्चिमी देश अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस – चीन के शत्रु बन जायेंगे और चीन को आड़े हाथ ले सकतें हैं।

क्योंकि – इस समय राहु, पश्चिमी देशों का कारक बना हुआ है।
इसी समय – यानि 14 अप्रेल से सूर्य उच्च राशि का होने जा रहा होगा।

ये संकेत होगा कि – शक्तिशाली देश और विश्व को दिशा देने वाले देश विश्वव्यापी निर्णय लेंगे जिससे सारी दुनिया प्रभावित होगी।

इधर शनि भी शून्य गति का होने लगा है और उच्च के केतु का सामना नहीं कर पायेगा तथा हथियार डाल देगा। फिर मई के महीना आरम्भ होते-होते शनि वक्री हो जायेगा और अपनी पहले वाली स्थिति में लौटने लगेगा।

यही हालत शनि के रूप में पाकिस्तान की भी होने वाली है। केतु के रूप में भारत आने वाले डेढ़ वर्ष तक प्रबल रहेगा और मोक्ष कारक केतु की तरह किसी का भी मोक्ष करा देने में सक्षम होगा। पाकिस्तान की तो बात ही क्या है ।

फिर चार-चार वक्री ग्रहों से प्रभावित धनु-राशि जाग्रत हो जायेगी और आक्रामकता प्रबल हो उठेगी।
यही वो समय होगा जब युद्ध भड़कने की संभावना बहुत बढ़ जायेगी।
ये जरूरी नही है कि ये युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच ही भड़के अपितु इसके परिणाम विश्वव्यापी हो सकते हैं ।

और इस समय प्राकृतिक आपदा की संभावनायें भी प्रबल हो सकतीं हैं। ऐसे ही समय में जब-जब चंद्र – वृश्चिक, धनु और मकर राशि मे गोचर करेगा – प्राकृतिक आपदाओं की संभावनायें बढ़ जायेगी।

ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखार्विंद पोद्दार

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