कितने तृणमूली मारे गए बालाकोट में!

पाकिस्तान पर हवाई हमले के बाद तृणमूली क्यों इतना बौखलाए है? तृणमूल काँग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन का चेहरा तमतमाया हुआ है और वह एकदम बदहवास हैं।

मेरे दिमाग में आया कि कहीं हमले में कुछ तृणमूली तो नहीं टपक गए।

सिर खुजाते-खुजाते अचानक डेरेक ओ ब्रायन के सितंबर, 2013 में इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक लेख की याद आई। और थोड़ी देर मेहनत करने पर वह लेख Two nations and a divided family मिल भी लग गया।

[डेरेक का लेख पढ़ें – Two nations and a divided family]

बहुत कम लोग जानते हैं कि एंग्लो इंडियन डेरेक ओब्रायन के परिवार के ज्यादातर लोगों ने देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान में ही रहना पसंद किया। यह परिवार लाहौर से लेकर कराची तक फैला था।

डेरेक की दादी-दादा तो कलकत्ते में रहे लेकिन इनके चाचा-भतीजे और बुआ पाकिस्तान में ही जमे रहे।

डेरेक बताते हैं कि उनके भाई और खेल पत्रकार एंडी 1984 में चैंपियंस ट्राफी हाकी कवर करने कराची गए थे। तब उन्होंने अपने बिछड़े हुए घऱ वालों को खोज निकाला।

सेवा सत्कार बढ़िया हुआ लेकिन थोड़ी ही देर में समझ में आ गया कि अब ये लोग एंग्लो इंडियन ईसाई नहीं बल्कि मुसलमान हैं।

एंग्लो-इंडियन समुदाय के ज्यादातर पुरुष अमेरिका-कनाडा में बस गए और पाकिस्तान में बची महिलाओं को मुसलमान बना लिया गया।

अब इतने वर्षों और इतनी पीढ़ियों बाद यह पूरी तरह संभव है कि उनमें कुछ जेहादी मिजाज़ के हो गए हों और जैश के लश्कर में शामिल हो गए हों। इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

डेरेक ओ ब्रायन को सरकार से सबूत मांगने के बजाय पहले अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्हें देश को बताना होगा कि कहीं बालाकोट में मारे गए जेहादियों में उनके परिजन तो नहीं थे।

Now the onus is on you TMC.



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