ऐ पाकिस्तानी सैनिकों, किस एहसानफ़रामोश मुल्क के लिए तुम खड़े हो मरने!

ऐ पाकिस्तान के सैनिकों… मैं सीधे तुम सबसे मुखातिब होकर बात कर रहा हूँ।

किस एहसानफ़रामोश मुल्क के लिए तुम खड़े हो मरने के लिए! ये वही मुल्क है जो अपने ही टॉप जनरल को खुद कुत्ते की मौत मार देता है। ये वही मुल्क है जो अपने नेताओं को फांसी पर लटका देता है।

ये वही मुल्क है जिसके नेताओं और जनरलों के एक आदेश पर तुम कारगिल – द्रास – तुरतुक की चोटियों पर चढ़ जाते हो… और जब भारत की सेना मार गिराती है तो वो तुमको अपना सैनिक मानने से इंकार कर देता है।

तुम जिसके लिए लड़े, मरे और शहीद हुए वो मुल्क तुमको शहीद का दर्ज़ा नहीं देता, न पेंशन मिलती है, न ही अन्य सुविधाएं… तुम बनते हो सैनिक लेकिन मारे जाते हो आतंकी की मौत।

अभी ताज़ा ताज़ा 27 फरवरी 2019 का मामला देखो… विंग कमांडर शहज़ाज़-उद-दीन को तुम्हारे मुल्क ने एक गुमनाम मौत दी… जो तुम्हारे इस गलीज़ मुल्क के लिए F 16 लेकर लड़ने निकला था, लड़ाई में घायल हुआ… तुम्हारे मुल्क की एहसानफरामोश जनता ने पीट पीट कर उस decorated अफसर को ही मार डाला।

तुम्हारी नीच और गलीज़ सेना तथा सरकार और महामूर्ख जनता एक शहीद अफसर को गुमनामी में मरने देती है… लड़ाई में शहीद होने पर जिसका जनाज़ा निकलना चाहिए था, जिसको शहीद का दर्ज़ा मिलना चाहिए था, जिसको तोपों की सलामी मिनली चाहिए थी… वो गुमनाम है… वो गायब है… तुम्हारी महाधूर्त और महा एहसानफरामोश सरकार तथा सेना उसको अपना मान तक नहीं रही है।

इसके उलट भारत को देखो… जिसने आने एक एयर फ़ोर्स के अफसर लिए पूरे पाकिस्तान को मटियामेट करने के लिए प्लान तय कर लिया था… जिसके लिए पूरे विश्व को भारत द्वारा बता दिया गया थे कि अगर कल सुबह तक पाकिस्तान ने हमारे अफसर को नहीं छोड़ तो पाकिस्तान मिट्टी में मिल जाएगा।

भारत… जहाँ की सरकार ने अपने सेना पर उरी में हुए हमले का बदला सर्जिकल स्ट्राइक करके लिया… पुलवामा का बदला पाकिस्तान में घुस के बालाकोट में आतंकी कैंप को मटियामेट करके लिया।

भारत का सैनिक भारत की शान है… भारत अपने सैनिक की हत्या का बदला लेता है… अपने वीरगति को प्राप्त हुए सैनिक का मान करता है, यहां की सेना, सरकार और जनता अपने वीरगति को प्राप्त सैनिक के परिवार का ख्याल रखता है।

हे पाकिस्तानी सैनिकों, ये सुना ही होगा…

शहीदों के चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।

लेकिन तुम्हारा एहसान फरामोश मुल्क शहीदों का अपमान करता है… शहीदों को अपनाता नहीं… शहीद गुमनामी की मौत मरते हैं… सैनिक आतंकी की मौत मरते हैं… किसी शहीद की कब्र पर मेला तो छोड़ो ढंग से चादर भी नसीब नहीं होती… और ये अय्याश जनरल दुनिया भर के फ़र्ज़ी तमगे लटकाए घूमते हैं।

ऐसे मुल्क के लिए जान देने का क्या फायदा… जिबह कर दो ऐसे एहसानफरामोश मुल्क को… ऐसे नेताओं और जनरलों के इशारों पर काम करने वाली इस वर्दी को उतार फेंको… इनकी गुलामी का पट्टा अपनी गर्दनों से उतार के खुद को आज़ाद करो…

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