भारत के सेक्युलर्स से मिलता है पाकिस्तानी दुष्प्रचार को सबसे मज़बूत समर्थन

कल का लेख था कि कैसे पाकिस्तान विश्व स्तर की मीडिया में अपना प्रोपेगेंडा प्लांट करने की कोशिश करेगा।

आज फिर इन मीडिया हाउस में पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा की दूसरी क़िस्त आयी है।

पहला प्रोपेगेंडा जाबा (बालाकोट) के निवासियों के इंटरव्यू, सो कॉल्ड पाकिस्तान बेस्ड वेस्टर्न डिप्लोमेट्स के बयान पर आधारित था। रायटर्स, बीबीसी, अल जजीरा ने अपना आँखों देखा कुछ बयान नहीं किया।

बालाकोट के निवासियों के इंटरव्यू पर बेस्ड अपनी रिपोर्ट पब्लिश की। जिसमें कहा गया कि वहां कोई मौत नहीं हुई। वहां ट्रेनिंग कैम्प नहीं जैश ए मोहम्मद द्वारा संचालित मदरसा था जिसमे गांव के बच्चे पढ़ने जाते थे।

[Pakistani village asks: Where are bodies of militants India says it bombed?]

आज प्रोपेगेंडा की दूसरी क़िस्त के रूप में बीबीसी उर्दू ने पाकिस्तानी विदेशी मंत्री शाह महमूद कुरैशी का इंटरव्यू छापा है। जिसमें कुरैशी ने इसी प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया है।

कुरैशी जी ने सबसे पहले यही ख़ारिज किया कि जैश ए मोहम्मद का कोई भी रोल पुलवामा अटैक में है। कुरैशी ने कहा कि जैश ए मोहम्मद से हमारी बात हुई है, उन्होंने इस अटैक की जिम्मेदारी नहीं ली है।

कुरैशी ने कहा पुलवामा अटैक जैश ए मोहम्मद ने किया इस पर कन्फ्यूज़न है क्योंकि जैश की लीडरशिप ने रिस्पॉन्सिबिलिटी नहीं ली है। जैश ए मोहम्मद की भूमिका पर कन्फ्लिक्टिंग रिपोर्ट्स हैं।

बेसिकली ध्यान दिया जाये तो साफ़ है कुरैशी खुद इसमें कन्फ्लिक्ट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

आगे कुरैशी कहते हैं जहाँ एयर स्ट्राइक हुई वहां एक मदरसा था, कोई ट्रेनिंग कैम्प नहीं। वहां हम कल मीडिया को ले गए और उन्होंने खुद देखा।

अब कल मीडिया रिपोर्ट बालाकोट के निवासियों के इंटरव्यू पर आधारित थीं, आँखों देखी नहीं।

धीरे धीरे क्रमबद्ध रूप में मीडिया इस्तेमाल किया जाता है, रूप बदला जाता है।

अब कुरैशी पूछते हैं कि अगर 300 लोग मारे गए तो उनकी बॉडीज़ कहाँ हैं?

ये वही सवाल है जो अपने देश में विरोधी पूछ रहे हैं।

कुरैशी आगे कहते हैं कि पाकिस्तान शांति प्रिय देश है और वो अपनी ज़मीन का इस्तेमाल आतंकवाद के खिलाफ नहीं होने देता है।

कुरैशी कहते हैं कि भारत पाकिस्तान में विवाद हैं लेकिन क्या उसका फैसला एक दूसरे पर मिसाइल्स फ़ेंक कर होगा या बातचीत द्वारा होगा। क्या दो एटमिक पावर्स युद्ध की तरफ जा सकती हैं। ये आत्मघाती होगा।

कुरैशी यहाँ क्रॉस बॉर्डर फायरिंग, शेलिंग जिसमें कल कई भारतीय नागरिक मारे गए की बात नहीं करते। क्रॉस बॉर्डर टेररिज़्म की बात नहीं करते। क्योंकि ये आत्मघाती नहीं हैं।

और हमारे यहाँ के बौद्धिक आतंकवादी भी इनकी बात नहीं करते। इमरान शांति के फ़रिश्ते हैं। Say No To War.

पाकिस्तानी प्रोपगेंडे को सबसे मज़बूत सपोर्ट भारत के सेक्युलर्स से मिलता है।

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