पाकिस्तान कभी नहीं मानेगा कि भारत की एयर स्ट्राइक में मारा गया कोई भी आतंकी

पाकिस्तान कभी ये स्वीकार नहीं करेगा कि भारत की एयर स्ट्राइक में कोई भी आतंकवादी मारा गया। उसके लिए एक भी आतंकवादी की लाश का हिसाब देना मुश्किल होगा कि वो वहां क्या कर रहा था।

‘आतंकवादी मारे गए’, ये स्वीकार करने का अर्थ है दुनिया के सामने स्वीकार करना कि पाकिस्तान की ज़मीन आतंकवाद के लिए इस्तेमाल होती है।

पाकिस्तान के वेस्टर्न बॉर्डर पर अमेरिका ड्रोन हमले करता रहता है और तालिबानी आतंकवादी मारे जाते रहते हैं। स्वयं पाकिस्तान की आर्मी भी वहां अभियान चलाती रहती है।

ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में ही छुपा बैठा रहा था। पाकिस्तान ने ओसामा को शरण देना कभी स्वीकार नहीं किया, न तालिबानी आतंकवादियों को शरण देना।

पाकिस्तान को इन्ही आतंकवादियों से निपटने के लिए अमेरिका से आर्थिक मदद और हथियार मिलते हैं।

ट्रम्प पाकिस्तान पर आरोप लगा चुके हैं कि वो आतंकवाद से लड़ने के बजाय उसे बढ़ावा देता है। अमेरिका पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद बहुत कम कर चुका है।

ऐसे हालात में पाकिस्तान कैसे मान ले कि उसकी धरती पर हुई एयर स्ट्राइक में कोई भी आतंकवादी मारा गया है। घटना के इतने दिनों के बाद उसने विदेशी मीडिया को घटनास्थल का दौरा कराया।

पाकिस्तान जानता है कि उसे गलत खबरें प्लांट करनी होगी। इसीलिए तमाम विदेशी मीडिया बीबीसी, रायटर ऐसी ख़बरें प्रकाशित कर रहे हैं कि एयर स्ट्राइक में कोई नहीं मरा, केवल कुछ पेड़ उखड़े हैं। यहाँ तक कि खबरें ऐसी प्लांट की जा रही हैं कि वहां बालाकोट में जैश ए मोहम्मद का आतंकवादी ट्रेनिंग कैम्प नहीं, बच्चों को पढ़ाने का मदरसा था।

कारगिल वॉर में पाकिस्तान ने कभी कबूल नहीं किया कि मरने वाले सैनिक उसकी आर्मी के थे। पाकिस्तान ने उनके शव नहीं लिए।

पाकिस्तान के लिए ये करना ज़रूरी है।

दिक्कत पाकिस्तान के इस रवैये से नहीं है।

अफ़सोस होता है जब भारतीय पाकिस्तानी दुष्प्रचार को इस्तेमाल करते हैं मोदी सरकार का विरोध करने के लिए।

इन लोगों और ऐसी मीडिया के मुताबिक कोई आतंकवादी नहीं मरा, और सबूत के तौर पर वो पाकिस्तानी दुष्प्रचार के ही लिंक देते हैं। उसी तरह, जैसे कुलभूषण जाधव के खिलाफ पाकिस्तान इन्ही भारतीय मीडिया रिपोर्टो को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करता है।

दो साल पहले चीन ने मसूद अज़हर को आतंकवादी मानने से इंकार किया था, संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को वीटो किया था। तब चीन के तमाम कारणों में एक कारण ये था कि भारतीय मीडिया में मसूद अज़हर को आतंकवादी मानने में खुद विरोध है।

पाकिस्तान और ये सो कॉल्ड बुद्धिजीवी और मीडिया एक दूसरे के हाथ धोते हैं।

आज यही बुद्धिजीवी सेक्युलर लिबरल प्रचार कर रहे हैं कि इन हमलों में भारत की किरकिरी हुई है, पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत हुई है।

ऐसे लोगों के चलते भारत को बाहरी दुश्मनों की ज़रूरत नहीं। पाकिस्तान को सीधे युद्ध की ज़रूरत नहीं।

भारत को टेररिज़्म और बौद्धिक आतंकवादियों दोनों से निपटना है।

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