राजनीति क्यों ना हो?

ध्यान रहे कि हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है। हमारे जीवन की दशा दिशा निर्धारित करने वाली नीतियां कौन बनाएगा?

देश का मान/ सम्मान/ स्वाभिमान/ एकता/ अखंडता/ सम्प्रभुता को सुरक्षित रखने में कौन सक्षम है, कौन नहीं सक्षम है?

इसका दायित्व किस को सौंपा जाए। किस को नहीं सौंपा जाए?

इसका फैसला हम प्रत्येक पांच वर्ष के अंतराल पर चुनाव की राजनीतिक प्रक्रिया के द्वारा ही करते हैं।

अतः यही तो सही समय है राजनीति का। आज यही तो सही मुद्दा है राजनीति का। आज इसी मुद्दे पर ही तो राजनीति होनी चाहिए और जमकर होनी चाहिए।

ध्यान रहे कि आज भारत के चिर शत्रु पाकिस्तान के आतंकी विषदंतों को वर्तमान केन्द्र सरकार बेरहमी से तोड़ रही है। पाकिस्तान को घुटने और एड़ियां रगड़ने को मजबूर कर रही है। अतः उस सरकार को चला रहा राजनीतिक दल अपनी सरकार की इस अभूतपूर्व सफलता/ उपलब्धि की चर्चा सार्वजनिक मंचों पर क्यों नहीं करे?

आज यह बात इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि सरकार की इस नीति के सफल क्रियान्वयन से बुरी तरह हताश निराश कांग्रेस के साथ मिलकर देश के कुछ मीडियाई दलालों ने एक पाखंडी हुड़दंग शुरू किया है कि सर्जिकल स्ट्राइक पर भाजपा राजनीति कर रही है।

यह कांग्रेसी-मीडियाई गठबंधन आरोप लगा रहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक को, पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को भाजपा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

अपने इस आरोप के द्वारा यह कांग्रेसी-मीडियाई गठबंधन कहना क्या चाहता है?

इस कांग्रेसी-मीडियाई गठबंधन से हम आप और पूरा देश यह जानना चाहता है कि केवल दो माह बाद जब देश में आम चुनाव होने वाले हैं। देश अपने लिए एक नई सरकार चुनने जा रहा है। ऐसे समय पर देश का मान/ सम्मान/ स्वाभिमान /एकता/ अखंडता/ सम्प्रभुता की सुरक्षा का मुद्दा चुनावी मुद्दा क्यों नहीं होना चाहिए? इस मुद्दे पर अपनी नीति और नीयत की सार्वजनिक राजनीतिक चर्चा किसी राजनीतिक दल को क्यों नहीं करनी चाहिए?

दरअसल कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के 10 वर्ष के शासनकाल के दौरान कश्मीर के अलावा शेष देश में 100 से अधिक आतंकी घटनाएं हुईं थीं। देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुम्बई भी कई कई बार आतंकी धमाकों और हमलों से दहली थी। 1500 से अधिक निर्दोष नागरिकों को पाकिस्तान प्रेषित/ प्रायोजित आतंकियों ने मौत के घाट उतारा था।

जबकि केन्द्र की वर्तमान मोदी सरकार में कश्मीर के अलावा शेष देश में ऐसा एक भी आतंकी हमला या धमाका नहीं हुआ है। यह एक ऐसा तथ्य है, ऐसी कसौटी है जिस पर मोदी सरकार के 5 वर्षीय शासनकाल का चेहरा और चरित्र सूर्य के समान दमकता चमकता दिखाई देता है। जबकि इसकी तुलना में कांग्रेसी यूपीए के 10 वर्षीय शासनकाल का चेहरा और चरित्र कोयले से भी काला दिखाई देता है।

यही वह मुख्य कारण है जिसके चलते कारण कांग्रेस के साथ मिलकर उसके चाटुकार, देश के कुछ मीडियाई दलालों ने एक पाखंडी हुड़दंग शुरू किया है कि पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति ना की जाए अर्थात उसकी चर्चा ना की जाए।

जबकि मेरा मानना है कि आज यही सही समय है इस मुद्दे पर राजनीति का। आज यही सबसे सही मुद्दा है राजनीति का।

आज इसी मुद्दे पर ही राजनीति होनी चाहिए, जमकर होनी चाहिए।

क्योंकि यही चुनावी मुद्दा तय करेगा कि अगले 5 वर्षों में देश का निर्दोष नागरिक आतंकी बम धमाकों हमलों में बेमौत मारा जाएगा या निर्भय निर्भीक होकर देश में घूम सकेगा।

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