विपक्ष की खाट खड़ी करने के लिए मत लीजिये फेक न्यूज़ का सहारा

डिजिटल क्रांति इतनी विकसित हो चुकी है कि ऐसा माना जाता है कि इस वर्ष के अंत तक लोग किसी राजनीतिज्ञ या अधिकारियों के बारे में फेक वीडियो अपने घर में ही बना लेंगे।

उनका चेहरा, बातचीत, आवाज़ – सब कुछ इतनी वास्तविक लगेगा कि क्या सत्य और क्या झूठ है इसकी पहचान करना लगभग असंभव हो जाएगा। बोलते समय चेहरे की मांसपेशियों के हिलने का तरीका, आवाज़ में उतार-चढ़ाव, आँखों की भाव-भंगिमा – यह सब कुछ बिल्कुल ऐसा ही लगेगा कि किसी ने उस व्यक्ति की चुपचाप रिकॉर्डिंग की हो या उसकी आवाज़ टेप की हो।

ऐसी फेक न्यूज़ को फैलाने में ना केवल विपक्ष के लोग लगे हुए हैं बल्कि भाजपा समर्थक भी अपने विवेक का प्रयोग नहीं कर रहे। उदाहरण के लिए, किसी भाजपा समर्थक ने स्टोरी चलाई कि सोनिया परिवार की एक सदस्य का दूसरा विवाह इटली के मिलान में स्थित एक भव्य चर्च में किसी पाकिस्तानी से हुआ।

अब जिसे भी यूरोपियन देशों के बारे में पता है, वो जानता है कि वहां के पत्रकार सेलिब्रिटी या प्रसिद्ध व्यक्तियों के निजी जीवन की खबरें एकत्र करने को लेकर पागल हैं। यूरोप की जनता भी प्रसिद्ध व्यक्तियों की निजी जिंदगी के बारे में चटखारे लेकर पढ़ना चाहती है, जानना चाहती है।

गांधी परिवार के सदस्य को तो छोड़िए, उन्होंने ब्रिटिश शाही परिवार, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपतियों, इटली के प्रधानमंत्री, टॉप एक्टर और बिज़नेसमैन, सभी के बारे में अति शक्तिशाली कैमरे से एक किलोमीटर दूर से फोटो खींची, आवाज़े और सीन चुप-चाप रिकॉर्ड की और करोड़ों रुपए लेकर किसी न्यूज़पेपर को बेच दिया।

सोनिया परिवार इटली में एक सेलिब्रिटी है और उसके किसी भी सदस्य के किसी चर्च में विवाह के बारे में चर्चा ना हो, यह संभव ही नहीं है।

इसी प्रकार से किसी व्यक्ति ने हाल ही में यह दावा किया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जानबूझकर आतंकी देश से युद्ध चाहते थे और उसकी बात-चीत की रिकॉर्डिंग वह अपने फेसबुक पेज में चला रहा है।

जब इस रिकॉर्डिंग को एक मित्र मेरे संज्ञान में लाएं और मेरी राय जाननी चाही तो मैंने बताया कि ज़रा ज़रा सी बात पर बिना किसी सबूत के विपक्ष के नेता सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं और सुप्रीम कोर्ट उनकी पेटिशन को एडमिट भी कर लेता है। जैसा कि यह बंदा क्लेम कर रहा है अगर उसके पास इतने सारे व्हाट्सएप मैसेज, रिकॉर्डिंग तथा भाजपा के खिलाफ प्रूफ है तो वह सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गया? या किसी अन्य मीडिया ने क्यों नहीं उठाया। हिंदू, वायर, कैरावन – यह सब के सब भाजपा के विरुद्ध खड़े हुए हैं और उनके लिए तो बहुत बड़ा मसाला है। राहुल ने इस विषय पर अब तक कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की?

इस विषय पर मैं इसलिए लिख रहा हूं कि समय-समय पर मित्र ऐसे समाचारों को मेरे संज्ञान में लाते हैं और मेरी राय मांगते हैं। इससे हम दोनों का समय नष्ट होता है। हमारे पास ऑलरेडी बहुत से ऐसे समाचार हैं जिनसे झूठ का सहारा लेने की आवश्यकता ही नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी का निजी आचरण – चाहे वह कुंभ मेला में हो, किसी मंदिर में पूजा करते हुए या दिल्ली मेट्रो में आम नागरिकों से बातचीत करते हुए – उसकी तुलना विपक्ष के नेताओं से कर सकते हैं। सार्वजनिक मंच पर भी वह सरकार की उपलब्धियों और अपनी बात बहुत दमखम और तर्क के साथ प्रस्तुत करते हैं।

हमें तो सिर्फ मोदी सरकार के पहले क्या विकास प्रक्रिया हुई और पिछले 5 वर्षों में क्या हुआ, इन्हीं का लेखा जोखा प्रस्तुत कर देना है। हवा बनाने के लिए यही काफी है। अगर आप कुछ इमोशनल बातें लाना चाहते हैं तो प्रधानमंत्री का निजी आचरण, एक निर्धन परिवार में उनके जीवन यापन का वर्णन, किसी नामदार खानदान से ना होना, आतंकवाद से निपटने के बारे में उनका दृढ़ निश्चय, तथा भाजपा की टॉप लीडरशिप का भ्रष्टाचार रहित होने का ही प्रचार कर सकते हैं।

विपक्ष का आचरण ही उनकी करतूतें सामने लाने के लिए पर्याप्त है। कैसे एक ही परिवार ने सत्ता पर कब्जा किया हुआ था और पुनः करने का प्रयास कर रही है; कैसे समाजवादी पार्टी एक परिवारवादी पार्टी बन गई; कैसे मायावती ने अपने शासनकाल में अपनी मूर्तियों और हाथियों पर पैसा उड़ा दिया; कैसे उन्होंने सफाई कर्मचारियों की भलाई के लिए कोई कार्य नहीं किया; कैसे सैफई में सरकारी खर्चे पर नाच गाने होते थे; कैसे कांग्रेसियों के समय दिल्ली से एक फोन के आधार पर बड़े उद्योगपतियों को लोन दे दिए जाते थे; कैसे सोनिया परिवार ने नेशनल हेराल्ड की हजारों करोड़ की प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया था जिसे अब दिल्ली हाई कोर्ट की एक बेंच ने 15 दिन के अंदर खाली करने का आदेश दिया है; ममता बनर्जी कैसे तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है; मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था कैसे चरमरा गई है; कैसे राहुल एक लाइन भी ठीक से नहीं बोल या लिख सकते।

अगर मोदी सरकार ने इतना ही खराब कार्य किया है तो क्यों पूरा विपक्ष उनके विरुद्ध एकजुट हो रहा है। विपक्ष की खाट खड़ी करने के लिए यही मुद्दे काफी है।

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