क्यों सच है, मोदी है तो मुमकिन है?

माना सिकन्दर का काल और परिस्थितियां भिन्न थी किन्तु यदि सिकन्दर महान हुआ तो अपने विश्व विजयी पताका के कारण। क्यों? क्या सिकन्दर अकेले निकला था जगत को जीतने? क्या उसने अकेले ही लड़ाई लड़कर दुनिया जीत ली थी?

सिकन्दर की सेना, उसकी कूटनीति, उसकी राजनीति और उसके पक्ष में खड़ा उसका देश सिकन्दर की जीत का प्रमुख कारण थे। सिकन्दर तभी महान भी हुआ, सिकन्दर ने तभी खुद को महान भी कहलवाया।

कोई भी राष्ट्र उसके मुखिया के कारण जीतता और हारता है। आप जब पुलवामा जैसे आतंकी काण्ड को इंटलीजेंस फेलियर आदि इसी तरह की कुछ कमियां कहकर इसका जिम्मेदार सरकार को ठहराते हैं तो तब क्यों पीछे हट जाते हैं जब वो सरकार प्रतिकार कर दुश्मन देश को पीछे भी खिसकाती है और आतंक के खिलाफ अपनी व्यूह रचना बनाकर उसके अंत के लिए निकलती है?

निश्चित तौर पर मुखिया अपने इस कृत्य के लिए सेना का उपयोग करता है। उसे करना ही होता है क्योंकि किसी भी देश की सेना होती ही इसीलिए है कि वो राष्ट्र को सुरक्षित रख सके..

सफल लोकतंत्र में चूंकि सेना शासकों के हाथ में हैं तो शासक के पास ही अधिकार हैं वो उसका कैसा प्रयोग करे। तो अव्वल इस बात को समझें कि जीत और हार मुखिया के जिम्मे है। जब हार का श्रेय मुखिया को दिया जाता है तो जीत का भी उसे ही दिया जाना चाहिए, भले ये सेना का शौर्य होता है।

जीतें सेना को स्वतः ही सूर्य की भांति दमका देती है। शायद यही वजह है कि भारतीय सेना विश्व की सेनाओं में अपना अहम् महत्व रखती है। यही वजह है कि उसकी वायुसेना दुनिया में महान कहलाती है। और ऐसा इसलिए भी होता है कि देश का प्रधान मजबूत होता है।

अब आइए उस बात पर कि राष्ट्र का सत्ताधारी दल सारा श्रेय क्यों ले जाना चाहता है? वो क्यों इस बात को प्रचारित कर दर्शाना चाह रहा कि सब उसका कराया धराया है? चूंकि देश में चुनाव है तो वो इसका लाभ क्यों उठाना चाह रहा? आदि ऐसे ही कुछ प्रश्न है जो विपक्ष और विरोधी उठाते हैं।

राजनीति की थोड़ी भी समझ वाला व्यक्ति ये भलीभांति जानता है कि यदि सत्ताधीश ऐसा नहीं करेंगे तो कौन करेगा? विपक्ष यदि सत्ताधीश को कटघरे में खड़ा नहीं करेगा तो कौन करेगा? ये विपक्ष का काम होता है। उसे कमियां देखनी है और सत्ताधीश को अपनी अच्छाइयां व्यक्त करनी है।

मोदी है तो मुमकिन है। ये एक नारा है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार विपक्ष के अपने नारे हैं । इस नारे का प्रयोग वो क्यों नहीं करेगा जब उसने हासिल किया है कुछ? पाकिस्तान पर दबाव बनाने से लेकर अभिनन्दन की वापसी तक में सरकार की भूमिका है। उसकी कूटनीति है। उसकी राजनीति है।

ऐसे वक्त यदि कोई इस नारे का प्रयोग कर अपनी सफलता दर्शाए तो क्या गलत है? उसका पूरा अधिकार है। और क्यों न हो! क्या आप जानते हैं कि जिस जेनेवा संधि की बात कर विरोधी ये कहते नजर आ रहे कि अभिनन्दन को तो छूटना ही था, उन्हें बता देना उचित है कि यदि यही सच है तो फिर क्या वजह रही कि पाकिस्तान ने कारगिल के दौरान युद्धबन्दी भारतीय सैनिक अभी तक नहीं छोड़े? और उन्होंने अमानवीयता तथा क्रूरता का जो परिचय दिया वो क्या किसीसे छिप पाया है?

क्यों क्या उस वक्त जिनेवा संधि नहीं थी? भले बीजेपी शासित देश रहा हो, उसका मुखिया भी उसी तरह असफल रहा जिस तरह उसके पहले तथा उसके बाद दो-तीन टर्म्स में कांग्रेस शासक बने रहने के बावजूद अपने सैनिकों को नहीं छुड़वा पाए। कभी आवाज इतनी बुलंद क्यों नहीं की गई??

आज जब इस सरकार ने ठोस कदम उठाया तो उसे इसका श्रेय भी नहीं लिया देने जा रहा है। क्यों? मोदी के होने से जो मुमकिन हो रहा उसे नज़रअंदाज़ क्यों किया जाए और कैसे किया जाए! नहीं, विपक्ष और विरोधी निस्संदेह देश के सम्मान को लगातार ठोकरें मार कर बुनियादी चीजों को जनता की नज़रों से ओझल रखना चाहते हैं।

आज हो ये रहा कि विपक्ष और विरोधी इसकी आलोचना कर रहे.. उन्हें क्या लगता है कि मोदी सरकार ये कहेगी कि जितना कुछ मुमकिन हुआ वो राहुल गांधी की वजह से हुआ? जबकि हालात को विपक्ष ने इतना जटिल बना रखा है कि सत्ताधीश के लिए कुछ कहना ही कठिन हो चला है। उसने कुछ कहा नहीं कि विपक्ष और उसके समर्थक उसका विरोध करने लग जाते हैं।

यहाँ तक कि युद्ध जैसी परिस्थितियों तक में विपक्ष और विरोधियों ने वो सारे काम किए जिससे मोदी सरकार पस्त भी हो जाए और परास्त भी। ये पहली बार किसी देश में हो रहा है जब विपक्ष और विरोधी किसी मुखिया से अपनी नफरत के चलते देश को दांव पर लगाकर राजनीति खेलने लगा, लोकतंत्र का जिसने दुरूपयोग करते हुए हर सम्भव ये प्रयत्न किया कि देश झुक जाए तो मोदी सरकार के खिलाफ पुख्ता सबूत प्राप्त हो सकें और उसे चुनाव में हराया जा सके।

ये अबतक के इतिहास का सबसे घिनौना कार्य है जो विपक्ष द्वारा केवल एक व्यक्ति से अपनी निजी नफरत के कारण फैलाया गया और देश को घुटने टेकने के सारे प्रयत्न किए गए किन्तु विधाता और देश की जनता के समर्थन से मोदी सरकार ऐसे घिनौने विपक्ष की व्यूहरचना से भी पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से बाहर निकलने में सफल हुई, अन्यथा सोचा जा सकता है कि प्रधानमंत्री सहित हमारी बहादुर सेना की दुनिया में क्या गत होती।

खैर.. ये विपक्ष और विरोधियों का काम है। ऐसे में सत्ताधीश अपनी जीतो, सफलताओं को प्रचारित नहीं करेंगे तो क्या विपक्ष के गुण गाएंगे? आज के दौर में विपक्ष मजबूत नहीं है। अक्लमंद नहीं है। इसलिए वो अपने स्वभाव को निचले स्तर पर ले जा चुका है। जब वो गिर चुका है, निचले स्तर पर आ चुका है तो स्वभाविक रूप से उसके समर्थक भी उसके स्तर पर जा चुके हैं।

गंदी भाषाओं के प्रयोग से लेकर उनके बुद्धिजीवी समर्थक तक शब्दों के जाल से भ्रम पैदा कर देश की जनता के मानस का अपहरण करना चाह रहे हैं। ऐसे में हाथ पर हाथ धरे सत्ताधारी बैठे तो नहीं रह सकते। वो अपनी उपलब्धियां दर्शाएंगे। वे मोदी है तो मुमकिन है जैसी अपनी बात को सत्यापित करेंगे ही। इसमें कुछ भी गलत नहीं। कुछ भी गलत नहीं। स्मरण रखिए सिकन्दर महान यूं ही नहीं हुआ था। उसने जंगे जीती थी। इसलिए मोदी है तो ही मुमकिन है, ये सच है।

– अमिताभ श्रीवास्तव 

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