चीन और पाकिस्तान के 2 मोर्चों से खतरनाक, दुश्मन का आधा मोर्चा भारत के अंदर

कल मोदी सरकार की अभिनन्दन को छोड़ने के लिए खुली चेतावनी और विश्व के दबाव के चलते डरे सहमे इमरान खान ने अपनी संसद में Peace Gesture कहते हुए अभिनन्दन को छोड़ने का ऐलान करते हुए “हीरो” बनने की कोशिश की थी। और हमारे देश में कुछ सिरफिरों ने भी उसे “हीरो” कहने की मूर्खता की थी जैसे वो ही दुनिया में शांति चाहता है ।

“हीरो” तो हमेशा सीना तान के चलता है, मगर कल का “हीरो” इमरान खान आज मुंह छिपा कर बैठ गया, वो भी किसी और के सामने नहीं बल्कि अपनों में ही।

आज OIC की विदेश मंत्रियों की बैठक में इमरान खान शकल दिखाने लायक नहीं रहा जबकि सुषमा स्वराज उन्हें “Guest of Honor” के रूप में दहाड़ कर आई और पाकिस्तान के आतंक को बेनकाब किया।

याद रहे OIC केवल मुस्लिम देशों की संस्था है जहाँ जाने की हिम्मत नहीं कर सका इमरान का विदेश मंत्री।

आज अगर हमारे देश के कुछ सिरफिरे इमरान को “हीरो” बना कर शांति का पुजारी बना रहे थे, वो क्या बता सकते हैं कि, 14 फरवरी को 44 जवानों की नृशंस हत्या कराते हुए इमरान कौन सी शांति की बात कर रहा था और उसने उस हत्याकांड में शहीद हुए जवानों के लिए एक शब्द भी नहीं बोला। एयर स्ट्राइक के बाद भी इस “हीरो” की आर्मी चुप नहीं है और रोज बॉर्डर पर हमला कर रही है।

कल सेना के तीनो अंगों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी जिस तरह कुछ पत्रकारों ने सवाल किये उनसे मैं हैरान था। अजित दुबे जानना चाहता था कि कितने आतंकी बालाकोट में मारे गए (ये सवाल कल लेडी बगदादी ने भी किया है)।

पत्रकार मंजीत जानना चाहता था सीधा सीधा कि पाकिस्तान बालाकोट में और ऍफ़ -16 के बारे में कह रहा है कि भारत ने ऐसा कुछ नहीं किया, तो भारत कैसे साबित करेगा। एयरफोर्स अधिकारी के ऍफ़ -16 के बारे में जवाब देने पर मंजीत ने फिर पूछा – बालाकोट को कैसे साबित करेंगे, क्या सबूत देना चाहेंगे पाकिस्तान को?

इसके अलावा एक पत्रकार नंदिता ने तो इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स ही मांग ली आतंकी कम्पों के बारे में।

एक अन्य पत्रकार श्रेया ने तो अधिकारियों से इमरान खान को जैसे प्रमाण पात्र देने के लिए कह दिया ये पूछ कर कि क्या अभिनन्दन को वापस भेजना इमरान का “Peace Gesture” या “Goodwill Gesture” है?

आप ध्यान से देखिये इन सभी पत्रकारों के सवालों में वो सब कुछ छुपा था जो कांग्रेस कहना चाहती है या मांगना चाहती और कहिये तो जो पाकिस्तान चाहता है। यही लोग इमरान को “हीरो” बना रहे हैं – ऐसे पत्रकार पत्रकारिता का चोला ओढ़ कर विपक्ष और पाकिस्तान का काम कर रहे थे। यही घटिया लोग “Say No to War” हैश टैग चला रहे हैं और पाकिस्तान को अभय दान दे रहे हैं।

घृणा होती है ऐसी मानसिकता पर, पाकिस्तान के मीडिया में बैठ कर उसके आर्मी के अफसर इमरान को लताड़ मार रहे हैं। सीनेट में एयर स्ट्राइक होते ही उनकी संसद में इमरान के लिए “शर्म शर्म” के नारे लग गए मगर यहाँ विपक्ष और पत्रकार चाहते हैं उसे “नोबल शांति पुरस्कार” दे दिया जाये। चीन और पाकिस्तान के 2 मोर्चों से खतरनाक है, दुश्मन का आधा मोर्चा भारत के अंदर।

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