बॉब कट आंटी

प्रतीकात्मक चित्र

आंटी कद में लंबी थीं, खूबसूरत और बेहद कॉंफिडेंट। एकदम सीधे चला करती थी, मानो चलते समय भी सावधान की पोजीशन में हो।

आंटी की अंग्रेज़ी ज़बरदस्त थी, आंटी हमेशा सफेद साड़ी पहना करती थी, उनके पति सेना में बड़े अधिकारी थे जो युद्ध में शहीद हुए थे।

हम सब आंटी को बॉब कट आंटी बुलाते थे, उनका एकलौता बेटा जो कि हमारा दोस्त था, इस पर बहुत चिढ़ता था और कई बार लड़ाई हो जाती थी।

पर आंटी ने कभी बुरा नहीं माना उल्टा जब भी हम सबके लिए कुछ लातीं तो कहती “तुम सब की बॉब कट आंटी आज तुम्हारे लिए ये लायी है।”

आंटी दिल की बहुत अच्छी और अनुशासन की बहुत कड़क थीं, आंटी कभी भी हम दोस्तों की चर्चा के बीच नहीं आती थी, जब बुलाओ तो दोस्त की तरह बीच में बैठ कर गप्पें भी मारतीं और ज़ोर ज़ोर से ठहाके लगा कर हंसतीं।

एक दिन आंटी ने सब को घर पर खाने पर बुलाया। डायनिंग टेबल एकदम फौजी स्टाइल में सेट थी। खाने से पहले बातचीत होने लगी।

आंटी की एक फोटो डायनिंग हॉल में लगी थी जिसमें उनके बाल कमर तक आते थे। सब के सब चौंक गए, बॉब कट आंटी के इतने लंबे बाल?

आंटी ने हंसते हुए मज़ाक में कहा मेरी जुड़वा बहन है, फिर बताया अंकल के जाने के बाद बाल कटवा लिए, बालों की देखभाल के समय नहीं मिलता था क्योंकि अपने बेटे की देखभाल जो करनी थी।

अचानक एक मित्र ने अंकल की बात छेड़ दी। हम सब कभी अंकल की बात नहीं करते थे ताकि आंटी या हमारे मित्र को बुरा न लगे। सब अचानक चुप हो गए। आंटी ने सब को डायनिंग टेबल पर बुलाया और खाना परोसते हुए अंकल की वीर गाथा हंसते हंसते सुनाने लगीं।

मैं हैरान था… एक विधवा अपने पति के लिए रोने के बजाए हंस रही है? जब आंटी की तरफ देखा तो उनका चेहरा सूरज की तरह तेज लिए दिखाई दे रहा था, उनकी आंखों में गज़ब की चमक थी, उनके चेहरे पर आत्मविश्वास देखते ही बनता था।

वीर गाथा सुनाते सुनाते बोलीं “He killed the bastards, destroyed their entire base, captured their tanks and ammo, before going to front he promised he will return with a gift, but while returning his luck run out and a mortar hit him straight, but he kept his promise, he returned with a gift not just for me but for the nation he returned with a victory.”

(उन्होंने सालों को घर में घुस कर मारा, दुश्मनों का बेस तबाह कर दिया, टैंक्स गोला बारूद सब अपने कब्जे ले लिया। उन्होंने मुझ से वादा किया था कि वो मेरे लिए एक उपहार ले कर आएंगे, लेकिन किस्मत ने साथ न दिया और लौटते वक्त एक मोर्टार सीधे उन्हें आ कर लगा, पर उन्होंने अपना वादा निभाया। वो उपहार ले कर आए सिर्फ मेरे लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए, वो भारत की जीत उपहार स्वरूप ले कर आए थे।)

मैं उनकी तरफ एक टक देख रहा था। आंटी के चेहरे पर सिर्फ एक ही भाव था गर्व का, न कोई पछतावा, न अंकल को खो देने का अफसोस। मैने झट से अपने मित्र की ओर देखा, खाना छोड़ कर वो कुर्सी पर एकदम सीधा बैठा हुआ था, उसका सीना चौड़ा हो गया था, गर्व से सर ऊंचा था।

आंटी ने शुरू से ही डिसाइड कर लिया था कि वे अपने लड़के को सेना में भेजेंगी, और हुआ भी वही। लड़का जल्दी ही कमीशंड ऑफिसर बन कर लौटा।

मैं दिल्ली में उस से मिलने पहुँचा। वर्दी उसके व्यक्तित्व को 1000 गुणा और निखार रही थी। दूर से देखते ही बोला ओए शुक्ला कैसा है यार तू? गले मिला और सीधे दिल्ली में अपने मुख्यालय ले गया, वहाँ बड़ी गर्मजोशी से उसके सब से मेरा परिचय करवाया।

अपने सर्वोच्च अधिकारी से जब उसने मिलवाया तो उनके चैम्बर में ज़ोर का कड़क सैलूट कर के बोला “सर ये मेरा दोस्त है”, सुनते ही सर्वोच्च अधिकारी उठ कर खड़ा हो गया और पूरी गर्मजोशी के साथ कड़क हाथों से हाथ मिलते हुए मुझ से पूछा “welcome, which regiment?”

मेरे दोस्त ने जवाब दिया सर ये सिविलियन है। अचानक इस अधिकारी का हाथ एकदम नरम हो गया और हाथ छुड़ाते हुए उसने कहा please have a seat. मुझे बहुत बुरा लगा कि सिविलियन्स को ये उतना सम्मान नहीं देते, फिर भी मेरे आने की शान में अधिकारी ने शाम को पार्टी रखी, बहरहाल वो सब किसी और दिन…

देश पर फिर खतरा मंडरा रहा था और ऐसे में उसे युद्ध करने जाना पड़ा। अपनी टीम को और अपने सैनिकों को लीड करते हुए वो वीर गति को प्राप्त हो गया। बॉडी जब घर आई तो लोगों ने रोना पीटना शुरू कर दिया, पर बॉब कट आंटी की आंखों से एक आँसू नहीं निकला, चट्टान की तरह वो आज भी वैसी ही खड़ीं थीं।

उन्होंने सब को चुप करवाया और कहा “we should be proud of him, he laid his life for this country, i am sorry i dont have another son to offer.” (हमारे लिए गर्व की बात है कि उसने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, मुझे अफसोस है मेरे पास एक और बेटा नहीं है देश पर न्यौछावर करने के लिए।)

आंटी के चेहरे पर बेटे को खोने का दुख कम और गर्व ज़्यादा दिखाई दे रहा था। उनकी बात सुन कर सर झुकाए खड़े सैनिक और अधिकारी भी सीना तान कर, सर ऊपर कर के खड़े हो गए।

लोग श्रद्धांजलि देने आते रहे, आंटी एकदम सीधी दोनों हाथ बांधे खड़ी रहीं। जब बॉडी को ले जाने लगे तो उन्होंने रोका और अपने इकलौते बेटे के पार्थिव शरीर को सैलूट किया, नारों से गगन गूंज उठा, पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गयी।

आज मुझे समझ में आया कि उस अधिकारी ने ‘सिविलियन’ सुनते ही हाथ ढीला क्यों कर दिया था, क्यों उसने हाथ छुड़ा कर बैठने के लिए कहा था! क्योंकि जो जज़्बा एक फौजी में होता है वो जज़्बा किसी सिविलियन में हो ही नहीं सकता।

एक माँ जब अपने बेटे को फौज में भेज रही होती है उसे उसी वक्त मालूम होता है कि उसका बेटा कभी भी वीरगति को प्राप्त हो सकता है। फौलाद का कलेजा होता है फौजी के घरवालों का।

भारतीय पायलट पाकिस्तान के कब्जे में क्या आ गया, लोगों ने हिजड़ों की तरह छाती पीटना शुरू कर दिया, जबकि वो पायलट दुश्मन की धरती पर भी सीना तान कर खड़ा रहा।

शर्म आनी चाहिए हमें, अरे हम खुद कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम सेना का मनोबल तो ना तोड़ें। आज सिविलियन्स से मुझे नफरत हो रही है, मुझे खुद से भी नफरत हो रही है कि मैं सिविलियन हूँ, मैं सेना में नहीं गया। एक सैनिक को आपकी सहानभूति की ज़रूरत नहीं होती, सहानभूति नहीं सम्मान कीजिये उस अदम्य साहस का, उस शौर्य का उस बलिदान का।

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