Connect the Dots & ‘घात’ लगाने वाले को ‘आघात’ पहुंचाएं

आज जब कहीं जा रही थी तब एक ऐसे रास्ते से गुज़रना हुआ जहाँ मात्र 2 किलोमीटर से कम का भी रास्ता तय करने के लिए कभी-कभी 30 मिनट भी लग जाते हैं peak hours में।

आज का दिन भी वैसा ही था। सम्पूर्ण रोड गाड़ियों से ठसा ठस भरा हुआ, चींटी की भाँति वाहनों की चाल। मैं भी उसी भीड़ में शामिल थी।

सहसा चालवाहकों के एक typical व्यवहार पर ध्यान गया। शायद आपने भी देखा या गौर किया हो कभी – कि जब आप चल रहे होते हैं ऐसे भीड़ भाड़ वाले स्थान में तो निश्चय ही आगे उतनी जगह होती नहीं है कि आप जल्दी से अपनी गाड़ी निकाल सकें (भले ही आप कितने भी हड़बड़ी में हों), फिर भी आपके ठीक पीछे वाली गाड़ी हॉर्न बजाती रहेगी – पीं पीं पीं….।

और बस यहीं पर आपने देखा होगा कि जैसे ही आप अपनी गाड़ी को अगर, बस ज्यादा नहीं, ‘आधा / एक इंच’ भी बढ़ा दें तो पीं पीं रुक जाती है। मैंने तो यह बात सौ में सौ बार देखी है, अतिश्योक्ति बिलकुल भी नहीं कह रही। और एक शहर में ही नहीं अपितु आज तक जहाँ जहाँ भी गई या गाड़ी चलाई है।

तो ऐसे में, जैसे आप बस आधा / एक इंच भी बढ़े, पीछे वाले को मन की तसल्ली हो जाती है कि यह उसके हॉर्न बजाने का नतीजा था जबकि असल में मैं इधर बस उसके मानसिक स्थिति का फायदा उठाते हुए कुछ ही आगे (नहीं के बराबर) बढ़ती हूँ किन्तु वह तब तक relax mode में आ चुका होता है और मुझे भी राहत उसकी पीं पीं से।

यहाँ पर मुद्दे की बात यह है कि इस देश की जो तथाकथित सबसे पुरानी पार्टी है, मेरी समझ से उसने भी कुछ वैसा ही किया उनके ‘काल’ (बहु आयामी अर्थ में इस शब्द का प्रयोग कर रही हूँ) के करीबन छह दशकों तक भारत की जनता के साथ।

अब ऊपर की स्थिति में आगे वाली गाड़ी के स्थान पर उसकी सरकार को रखें तथा पीछे जो निरंतर हॉर्न देते रहते हैं, वहाँ पर भारत की जनता को। जनता बीच बीच में हॉर्न बजाती रही कि आगे बढ़ो किन्तु सरकार ने बस उतने से ही हमेशा काम चलाया जितने में जनता चुप हो जाए। वही ‘मानसिक स्थिति’ का दोहन करती रही। जनता को पता भी न चला और करीब करीब शांत ही रही। उसे कुछ समझने भी न दिया गया। कैसी दाल पक रही है अंदर अंदर, भनक तक न लगने दी। थोड़े में बस होते रहे खुश।

इसके और भी आगे की स्थिति जंगल के माध्यम से रखना चाहूंगी।

आप सभी ने कभी न कभी डिस्कवरी या किसी अन्य चैनल में देखा होगा – कैसे तेंदुआ घात लगाता है अपने शिकार के लिए। वह बहुत देर तक बिना हिले डुले, दबे पाँव, एक ही अवस्था में तब तक प्रतीक्षा करता है जब तक उसे भरोसा न हो जाए अपने कृत्य के समय की सटीकता को लेकर…

…और जैसे ही उसे इस बात का भरोसा होता है, उसी क्षण वह अपने शिकार पर हमला कर देता है जिसमें अधिकतर मामलों में उसे सफलता मिलती है। हाँ, कुछ में असफलता भी हाथ लगती है अगर शिकार अपने अदम्य साहस को न छोड़े तो।

सो ध्यान से अगर अपने इतिहास पर नज़र डालें और थोड़ा संयम से, तो अनगिनत क्षेत्रों में देश की सबसे पुरानी पार्टी का भी यह व्यवहार दिखेगा। लिखना शुरू करूँ तो ख़त्म ही न हो। हमेशा भारत की जनता पर घात लगाई है और जनता शिकार हुई भी है, यह बात अप्रत्यक्ष रूप से सिद्ध भी होती है। कई जगहों पर प्रत्यक्ष रूप से भी।

इस प्रकार उपरोक्त दोनों उदाहरणों से ही जो कि मैंने – एक हमारे आपके दैनिक दिनचर्या से उठाया है और दूसरा जंगल के बीहड़ों से, आपको इस पार्टी का व्यवहार ठीक से ज्ञात हो सके।

2019 के चुनाव सर पर हैं। इसने और अन्य विरोधी पार्टियों ने गत साढ़े चार वर्षों में पुरज़ोर कोशिश की मोदी सरकार को डिगाने की, ज्ञात रहे कि सही मुद्दों को यह कभी भी तलाश न पाए। उन्हें भी मालूम है देश की नब्ज़ कैसी चल रही है, हवा का रुख क्या है।

घात लगा कर एक और कोशिश हुई राफेल को लेकर। इसी बीच देश के ‘दामाद जी’ पर केस पर केस और नकेल भी कसती गई। अब यह तो परिवार के घोर खिलाफ है। राफेल को मुद्दा बनाने की कोशिश जारी रही और 13 फरवरी तक झूठ पर झूठ और मनगढंत कहानियां कहते रहे मीडिया से। इतने दिनों में आदत सी हो गई थी हर सुबह इनका एक और झूठ सुनने के लिए।

यह 14 फरवरी की सुबह थी, फिर दोपहर भी बीत गई और कुछ खबर न आई। और फिर जो खबर आई उसने पूरे देश को हिला कर रख दिया – पुलवामा आतंकी हमला। इसके कुछ घंटों पश्चात् इनका मोदी सरकार को घेरना भी शुरू हुआ। ‘इनका’ यह व्यवहार बहुत कुछ कहता है। क्यूंकि इसके पीछे के दिनों में एक पैटर्न सा बन चुका था।

किन्तु नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी टीम पूरे संयम से इस हेतु अपना काम करते रहे। फिर 14 फरवरी से लेकर 26 फरवरी तक बहुत कुछ हुआ दुश्मन देश को लेकर, यह सब को विदित है। और पूरे देश को सम्पूर्ण भरोसा है मोदी जी पर। देश की गाड़ी आज एक सजग ‘ड्राइवर’ के हाथों में है, और विरोधियों के लिए यही सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात है। आज नए भारत की जनता भी सजग हो रही है और उसे अपने ‘ड्राइवर’ पर पूरा भरोसा है।

इसी बात से विरोधी घबराए हुए और अब भी घात लगाने की कोशिश में जुटे हैं। अभी भी जिनको भरोसा नहीं है, वह अपनी आँखें खोलें, कूप मंडूक न बनें और देखें कि आज का नया भारत किस प्रकार आगे की ओर अग्रसर है नरेंद्र मोदी के कुशल, दृढ़, सशक्त नेतृत्व में।

‘घात’ लगाने वाले को ‘आघात’ लगाएं। कुछ गलत बातें फैलाई जाएंगीं, उसके rippling effect से बचें।

इसीलिए सचेत होइए, बिंदुओं को जोड़िये।

और अपने विवेक से वोट करें।

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