भीखिस्तान लड़ना तो चाहता है, पर युद्ध का खर्च उठाने की औकात नहीं

भीखिस्तान ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का बहुत ही मरियल सा जवाब दिया है। यह देना भी उनकी मजबूरी ही थी, अपनी अवाम के सामने इज्ज़त बचाने के लिए इतना तो ज़रूरी था।

अब इसके तुरंत बाद बातचीत की पेशकश मनोरंजक है।

असलियत यह है कि भीखिस्तान के दोनों आधारस्तम्भ – अमेरिका और चाइना – ने उसके समर्थन में बोलने से इंकार कर दिया है। अमेरिका को अब भीखिस्तान की आवश्यकता कम महसूस हो रही है, भारत से business करना अधिक आकर्षक है US Inc के लिए।

ऑफ कोर्स वैसे तो वह देश अपने स्वार्थों पर ही चलता है, इसलिए भावुक होने की आवश्यकता नहीं। हमें अपने हितों को ही वरीयता देनी चाहिए। राजनीति ऐसी ही होती रही है, है और रहेगी।

सारे विपरीत सबूतों के बावजूद भाई भाई के झूठे नारों को ही सत्य मानकर देशहित की बलि चढ़ानेवाले नेहरू जैसे प्रधानमंत्री हमारा ही दुर्भाग्य रहे हैं, अन्य देशों के नेता अपने देश का ही हित देखते हैं और उसमें कुछ गलत भी नहीं है। अब मोदी जी देश हित को ही वरीयता दे रहे हैं।

रही चाइना की बात, तो पाकिस्तान अगर युद्ध की घोषणा कर दे तो भारत, पाकिस्तान की भूमि पर कहीं भी बम गिरा सकता है और चाइना का इतना सारा पैसा वहाँ अपने लिए बनाए इनफ्रास्ट्रक्चर में फंसा है कि वो नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान किसी भी ताकतवर देश से युद्ध करे। न भारत से, न ईरान से। चाइना को अपना इनफ्रास्ट्रक्चर बचाने की पड़ी है, पाकिस्तान की किसी भी सरकार से उसे कोई लेना देना नहीं।

इसलिए वो भी भीखिस्तान को सब्र करने के लिए दो टूक सलाह दे रहा है।

मुफ़्तमांग देश भीखिस्तान को लड़ने की तीव्र इच्छा तो है लेकिन लड़ाई से जो उसका नुकसान होगा उसका खर्चा उठाने की उसकी खुद की औकात नहीं रही और उसके हमेशा के साहूकार खुद अपना नुकसान होने के डर से उसका कान पकड़े हुए है।

युद्ध में हार होगी तो भीखिस्तानी लश्कर का दबदबा भी खत्म हो जाएगा, जनता सड़क पर दौड़ाकर मारेगी। हथियार तो खुलेआम मिलते हैं वहाँ और उस कौम को खून से परहेज़ भी नहीं होता।

इसलिए भीखिस्तान का otherwise मुँहज़ोर लश्कर भी लड़ाई नहीं चाहता। उनकी कठपुतली इमरान खान भी लड़ाई नहीं चाहते। लेकिन आज तक केवल उपद्रव के लिए पाले पोसे जिहादी और अन्य उठाईगीरे भी उनके बस में नहीं रहे। इसलिए इनकी हरकतें मनोरंजक रहेंगी।

शत्रु की मुश्किलों की जानकारी होना और उसका उपयोग करने की कुव्वत रखना बड़ी बात होती है। जानकारी काँग्रेस सरकार को भी उपलब्ध थी, लेकिन उसका देशहित में उपयोग करने की कुव्वत मोदी जी ने पैदा की है क्योंकि उनकी नीयत निहायत देशहित की है।

काँग्रेस की नीयत देखनी हो तो रिपब्लिक पर डिबेट्स देखिये, पता चल जाएगा। वैसे न्यूज़ चैनल भी बहुत लीपापोती नहीं कर पा रहे हैं उनके इरादों पर।

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