‘धरती के स्वर्ग’ की सफाई..!

उसे ‘पृथ्वी का स्वर्ग’ कहते हैं। कहा गया हैं, “गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त / हमी अस्तो हमी अस्तो हमी अस्त” (धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं)।

मुजफ्फराबाद, बालाकोट, चकोठी… यह सारे उस स्वर्ग के ठिकाने हैं। बालाकोट के नीचे, दस किलोमीटर पर जो जगह है, उसे कहा जाता है, ‘नैनसुख वैली’। अत्यंत नेत्रसुखद..!

लेकिन पिछले बीस वर्षों से धरती का यह स्वर्ग नरक में बदला जा रहा था।

अफगानिस्तान का संघर्ष समाप्त होने के बाद, आतंकवादियों को नये ठिकानों की आवश्यकता थी। आई. एस. आई. ने उन्हे यह धरती का स्वर्ग तश्तरी में सजा कर दिया। उनके बाप का क्या जा रहा था… ज़मीन तो हिंदुस्थान की थी। पाकिस्तान ने जबरन हथियायी थी।

और फिर शुरु हुई, इस हरे-भरे, फले-फूले भूभाग को नरक मे बदलने की प्रक्रिया… यहां पाकिस्तान ने आतंक के अड्डे बनाने प्रारंभ किये। जैश-ए-मुहम्मद ने तो यहां अपना कंट्रोल सेंटर (केंद्रीय कार्यालय) बना डाला। नये नये आतंकियों को यहां प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया।

इन आतंकियों को न तो किसी का डर था, और न ही खौफ..! पाकिस्तानी सेना का पूरा संरक्षण उन्हे था। उन्होंने ही तो इन आतंकियों को यहां बसाया था।

बालाकोट से मात्र 68 किमी. अंतर पर, एबटाबाद में पाकिस्तानी सेना ने अनेक वर्षों तक ओसामा बिन लादेन को छुपा के रखा था। और भारत से डर का तो प्रश्न ही नही था… इतनी हिम्मत कहां थी भारत में..? वो तो ‘सॉफ्ट स्टेट’ था।

1971 के बाद, अनेक हमले झेलने के बाद भी भारत ने कभी LoC को लांघा नहीं था। अंतर्राष्ट्रीय दबाव के नाम पर भारत हमेशा बचता आ रहा था…

सेना के पास इन आतंकवादी अड्डों की जानकारी हमेशा से रहती आयी है। लेकिन राजनैतिक इच्छाशक्ति के अभाव में सेना हमेशा मन मसोस कर रह जाती थी।

लेकिन सन् 2019 के 26/2 का भारत अलग था। बिलकुल अलग। यह आत्मविश्वास से लबालब, शौर्य से भरपूर, अपने पर हुए हमले का खूंखार जवाब देने वाला भारत था।

धरती के स्वर्ग को साफ करने का काम प्रारंभ हो चुका है। आज नहीं तो कल, यह धरती का स्वर्ग प्रत्यक्ष रुप से हमारे देश का हिस्सा बनेगा ही।

इस नये भारत को प्रणाम..!

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