मसूद अज़हर के पुराने मीडिया-साथियों ने शुरू किया अपना पुराना खेल

मसूद अज़हर के पुराने मीडिया वाले साथी, वही पुराने खेल में लगे हैं।

कंधार कांड में भारतीय मीडिया और काँग्रेस की एकत्रित रूदाली ऑर्केस्ट्रा के कारण जो आतंकी छोड़ने पड़े थे उसमें एक अज़हर मसूद भी था।

आज यही मीडिया पाकिस्तान के विरुद्ध एक्शन करने पर सभी जगह विषैली उल्टियाँ कर रहा है।

कुछ ये कह रहे हैं कि भारत कितने दिन लड़ पाएगा? भाई, पाकिस्तान से अधिक लड़ने की क्षमता निश्चित है, attrition की तैयारी है, आप शांति रखिए।

एक मिग 21 गिराया गया है और उसका पायलट मिसिंग इन एक्शन है इसपर रुदाली चालू हुई है। उस ‘आपियन’ गुरमेहर के कई clone पैदा हुए हैं जो ‘युद्ध कितना बुरा है’ इस पर गंभीर मुद्रा से लेक्चर दे रहे हैं।

कुछ ऐसे भी नमूने हैं जो कह रहे हैं कि अभी भी मिग 21 उड़ाए जा रहे हैं? क्या कर रही थी मोदी सरकार इतने दिन?

ज़ाहिर है इनको हर चीज मार्केट में आये लेटेस्ट मोबाइल खरीदने जितनी आसान लगती होगी। सेना की RFQ प्रोसीजर जरा जानें-समझें फिर मुंह खोलें। और भी एक बात यहाँ रखना चाहूँगा।

(Copied) “जब इज़रायल ने मोरारजी देसाई को प्रस्ताव दिया कि हमें अपने एयरपोर्ट प्रयोग करने दो तो हम पाकिस्तानी एटम स्टेशन को नष्ट कर देंगे तो मोरारजी ने ना कह दिया यह कहकर कि हम पाकिस्तानी काउंटरअटैक को नहीं रोक पाएँगे। (बल्कि उन्होंने इज़रायल की योजना के बारे में पाकिस्तान को भी बता दिया। धिम्मी ऐसे ही होते हैं।)

तो हम पाकिस्तान के काउंटरअटैक को क्यूँ नहीं रोक पाते? क्यूँकि लुटयन ख़ानदान ने कभी हमारी सेनाओं को युद्ध के लिए तैयार ही नहीं किया। जिन सौदों में दलाली मिल गयी वे सौदे ही होने दिए, जिनमें नहीं मिली वे रद्द कर दिए। घरेलू रक्षा उद्योग खड़े नहीं होने दिये – हमारे साथ साथ ही अस्तित्व में आए इज़रायल का उदाहरण इसके विपरीत है। समाजवाद थोपे रखा तो धन भी कभी पर्याप्त नहीं रहा सरकार के पास। सेना को सुसज्जित करने में दशकों लगते है।

हमारा एक पायलट आज अगर पाकिस्तान की जेल में है तो केवल इसलिए क्योंकि लुटयन ख़ानदान जेल में नहीं है। न्यायिक व्यवस्था को ख़रीद कर ज़मानत पर है लुटयन ख़ानदान और राफ़ेल को भी ब्लॉक करने के प्रयास में है।”

और हाँ, 1965 में पाकिस्तानी सेबर जेट उस जमाने के लेटेस्ट अमेरिकन लड़ाकू जेट थे और अपने नैट लगभग दूसरे विश्वयुद्ध के समय के थे। सभी दुनिया के एक्सपर्ट मान रहे थे कि युद्ध पाकिस्तान के लिए एकतरफा मैच होगी। पैटन टैंक भी भारतीय सेना के पुराने टैंक से बेहतर थे। फिर भी जो हुआ वह इतिहास है।

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