युद्ध शक्ति और शौर्य से लड़े जाते हैं, कायरता और रुदन से नहीं

आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक युद्ध चल रहा है, कोई सास-बहू का ड्रामा या क्रिकेट का मैच नहीं। इसमें क्या करना है और कैसे करना है, ये सेना और सरकार को मालूम है।

कृपया हर मामले में उनका मार्गदर्शन करने वाली पोस्ट लिखकर अपने अतिज्ञान का प्रदर्शन मत कीजिए और छोटी-छोटी बातों में आंसू बहाकर अति-भावुकता भी मत दिखाइए। युद्ध शक्ति और शौर्य से लड़े जाते हैं, कायरता और रुदन से नहीं।

मीडिया और सोशल मीडिया दोनों को ध्यान रखना चाहिए कि युद्ध में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जीत-हार होती रहती है; हर स्थिति में अपना साहस और संयम बनाए रखना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। छोटी-छोटी बातों से उत्साहित या निराश हो जाना बंद कीजिए।

अफ़सोस की बात है कि सारे न्यूज़ एंकर भी और सोशल मीडिया पर कई धुरंधर भी अब रातोंरात खुद को रणनीति और युद्ध-कौशल के विशेषज्ञ समझ रहे हैं।

सीमा-पार क्या हो रहा है, उसकी जानकारी रखने के लिए खबरों पर ध्यान देना तो ठीक है, लेकिन सेना को क्या करना चाहिए और सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए, यह बताने में समय लगाने की बजाय शांत रहकर आप बेहतर योगदान कर सकते हैं। हर पल के अपडेट सोशल मीडिया पर शेयर करने और हर घटना के बारे में पोस्ट या कमेन्ट लिखकर अपनी राय देते रहने की ज़रूरत नहीं है।

जब युद्ध होगा, तो बहुत चीज़ों की कीमतें बढ़ेंगी, हवाई सेवाएं, रेल सेवाएं बाधित होंगी, कई जगह सड़कें और हाइवे बंद करने पड़ सकते हैं, कहीं घायल सैनिकों के लिए रक्तदान करने की ज़रूरत पड़ सकती है, कहीं आर्थिक योगदान करने की आवश्यकता हो सकती है।

क्या आप ऐसी परिस्थितियों में देश के लिए कुछ कष्ट सहकर भी सरकार के साथ खड़े रहेंगे या नहीं? ज़रूरत पड़ने पर सेना की मदद के लिए रक्तदान या अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक योगदान करने को तैयार हैं या नहीं? क्या आप अपने आसपास की गतिविधियों के बारे में जागरूक हैं या नहीं? या आप केवल सोशल मीडिया पर ही जोश भरे नारे लगाने वाले हैं और खुद पर थोड़ी-सी आंच आते ही सरकार को कोसने लगेंगे?

याद रखिये कि दुष्प्रचार भी युद्ध का एक हथियार होता है। मुझे पूरी आशंका है कि भारत के बाहर वाले भी और भारत के भीतर बैठे भारत-विरोधी भी जल्दी ही भारत के खिलाफ और भारत सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार की शुरुआत करेंगे, ताकि हमारी सेना का और नागरिकों का मनोबल गिरे और आतंकियों को मदद मिले। आपको भावुक और उद्विग्न होने की बजाय इतना सतर्क और जागरूक होना चाहिए ताकि ऐसे दुष्प्रचार से आप भी भ्रमित न हों और दूसरों को भी भटकने से बचा सकें।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY