बोलो जुबां केसरी : युद्ध और परिपक्वता

अब जबकि हो सकता है युद्ध शुरू हो जाय, और कुछ अप्रिय दृश्य या अनपेक्षित स्थितियों से सामना हो, हमें परिपक्वता दर्शानी चाहिए।

1.
बच्चों, महिलाओं और डिप्रेशन के मरीजों से युद्ध की चर्चा न करें तो ही अच्छा रहेगा। युद्ध के दृश्य कोई फ़िल्मी सीन नहीं होते।
उन्हें शेयर न करें और यदि कोई ऐसा कर रहा है तो उसे रोकें, टोकें, न मानने पर शिकायत करें।

2.
अफवाह से बचें। अनावश्यक भ्रमण न करें। सुरक्षा के बारे में विचार करें। निहित स्वार्थी तत्व इन दिनों अनुचित हरकतें कर सकते हैं, सो सजग रहें। अपनी ऊर्जा बचाये रखें। आवश्यकता सीमित रखें। मौज-शौक और विलासी जीवन से दूर रहें।

3.
सैन्य बलों का उत्साह वर्धन करें। सरकार के साथ खड़े रहें। मीडिया के प्रवाह में बहकर प्रतिक्रिया न दें। भावावेश में हो तब कोई पोस्ट कमेंट आदि न करें। रूदन, चीत्कारें, खून-खराबा, वीभत्स वर्णन आदि के माहौल से बचें क्योंकि कच्चे मन वाले लोगों पर इसका बुरा असर पड़ता है। कई लोगों को अनिद्रा, रात में चलने की बीमारी और हिस्टीरिया हो सकता है, इसलिए यथासंभव शांत रहें।

4.
समूह में रहें। देर रात तक जग रहे हैं तो हल्की फुल्की शास्त्रीय चर्चा से टाइम पास करें। मित्रों/सहेलियों/परिजनों की काउंसलिंग करते रहे। किसी भी इमरजेंसी से निबटने की मानसिकता बनाए रखें। व्यस्त रहें। tv फोन आदि का न्यूनतम इस्तेमाल करें।

5.

no_more_war गैंग पर नजर रखें। उनके स्क्रीन शॉट लेकर रखें और उनकी पिछली पोस्ट पढ़ें, ये वही लोग हैं जो पहले उकसा रहे थे और अब भड़का रहे हैं। कोई यदि देश विरोधी नजर आए तो पास के थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज करवाने में संकोच नहीं करें। संदिग्ध आचरण और ओवरस्मार्ट लोगों पर भी नजर रखें। कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं, यह आपको स्वयं देखते रहना चाहिए।

6.
त्याग की आदत डालें। मिलबांटकर सहयोग की भावना रखें। जब जैसा आह्वान हो, धन, समय, रक्त, सेवा, आपदा प्रबंधन इत्यादि विषय में अपनी व्यक्तिगत भूमिका के बारे में सोचें। आस्तिक बने रहें। अपने इष्टदेव का ध्यान करें। मंत्र जाप करें। सद्साहित्य पढ़ें और महाभारत, रामायण इत्यादि को सुनें या सुनाएँ।

7.
अपने प्रोफेशन पर पूरा ध्यान दें। परिवार को सम्भालते रहें। किसी के मोहताज न रहें। सकारात्मक सोचें। नोटा गैंग, भारत विरोधी ग्रुप, धर्म द्रोही लोग, जातिवादी टटपुँजिये, छद्म सेक्युलर्स, पापकर्म में लीन, भ्रष्ट जन, अशुद्ध कमाई से पेट भरने वाले, मौकापरस्त इत्यादि लोगों से सम्बंध विच्छेद कर दें। न उन्हें सलाह दें और न ही उनकी सलाह मानें। इन मामलों में सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें।

8.
युद्ध, क्षत्रिय के लिए उत्सव होता है। परिस्थिति अनुसार हरेक क्षत्रिय है। किसी भी क्षण कुछ भी हो सकता है। हरेक घण्टे बाद नई स्थिति के दर्शन हो सकते हैं। तो क्षत्रिय बनें। हो सकता है रात को ठीक से सोएं और सुबह कोई और ही समाचार सुनाई दे। उसे एन्जॉय करें। गीता के वचनों के अनुसार निर्भय बनें।आत्मचिंतन करें। न टालने योग्य इस आसन्न संकट को प्रसव-पीड़ा के रूप में समझते हुए आचरण करें।

निश्चित रूप से प्रभु इस अभागे देश के कल्याण के लिए यह अवसर ले कर आए हैं, उसमें अपनी सहभागिता तय कर कर्त्तव्य कर्म पर डटे रहे।

9.
विजय निश्चित ही हमारी होगी। विगत 48 वर्ष से कोई भयंकर युद्ध न देख सकने वाली पीढ़ी के लिए यह अवसर है, जगत के द्वंद्व और संसार की कटु सच्चाई के यथार्थ तत्व को समझने का। इसमें अपने पूर्वाग्रह और डेढ़ हुशियारी अलग रखें तो ही अच्छा।

इति शुभम।
आप सबका जीवन राष्ट्र के अनुकूल, मंगलमय हो।

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