सारा विश्व पाकिस्तान के खिलाफ और काँग्रेस उसके साथ!

मुझे इसमें रत्ती भर भी संदेह नहीं है कि इमरान खान ने पुलवामा मामले में काँग्रेस के कहने पर सबूत मांगे।

इमरान की भाषा अगर सुनें तो उसमें भारत को पुलवामा के सबूत देने को कहा। किस बात के लिए, ये कुछ भी समझा जा सकता है। हमला हुआ और 44 जवान मारे गए, इसके सबूत या पाकिस्तानी हाथ होने के!

ये हमला काँग्रेस और पाकिस्तान के बीच चल रहे संवाद का नतीजा है। जब मणिशंकर अय्यर ने मोदी को हटाने के लिए पाकिस्तान से मदद मांगी थी।

अब जैश-ए-मुहम्मद द्वारा हमले की ज़िम्मेदारी लेने के बाद इमरान के सबूत मांगने का क्या आधार है, ये आप काँग्रेस के नए मणिशंकर बने सिद्धू के 15 फरवरी को दिए गए बयान से समझिए।

सिद्धू ने खुलेआम कह दिया कि “एक आदमी की हरकतों के लिए किसी पूरे देश को दोष नहीं दे सकते, आतंक का कोई धर्म नहीं होता और ना कोई देश होता है।”

ये कह कर सिद्धू ने पाकिस्तान के खिलाफ सबूत मांग लिए और इस बयान से ना काँग्रेस ने किनारा किया और ना किसी नेता ने विरोध किया।

मज़े की बात है कप्तान अमरिंदर सिंह पाकिस्तान सेना के जनरल बाजवा को तो सबक सिखाने की बात करते हैं मगर अपने सिद्धू को लगाम नहीं लगा सकते।

अगले दिन फिर सिद्धू की नॉन-स्टॉप बकवास जारी रही जब उसने कहा कि जिसे प्लेन में बिठा कर कंधार छोड़ कर आये थे उसे पकड़ कर लाओ और गोली मारो तो मैं तुम्हारे साथ हूँ।

आज ये महाशय कहना चाहते हैं कि अटल जी 176 लोगों को मरवा देते तो ठीक था, जबकि मसूद अज़हर और दो अन्य को छोड़ने का फैसला करने में काँग्रेस समेत समूचा विपक्ष शामिल था।

14 फरवरी को आतंकी हमला होते ही काँग्रेस के तीन बड़े नेताओं, रणदीप सुरजेवाला, कपिल सिबल और सुशील कुमार शिंदे ने सरकार पर सवाल उठा दिए थे और सर्वदलीय मीटिंग के प्रस्ताव में सरकार को समर्थन भी नहीं दिया, बस खानापूर्ति के लिए ज़बान हिला दी।

लेकिन अज़हर मसूद और पाकिस्तान पर जब विश्व भर से उसके कुकृत्य के लिए निंदा हुई तब एक तरफ इमरान खान ने काँग्रेस के बनाये आधार पर भारत से सबूत मांग लिए और मसूद ने हमले में उसका हाथ होने से इंकार कर दिया।

मज़े की बात है जब मसूद बयान दे रहा था तब उसी समय सुरजेवाला प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ प्रलाप कर रहे थे कि वो शूटिंग में व्यस्त थे जबकि राहुल गाँधी ठीक हमले के समय गोवा में डांस कर रहे थे।

सुरजेवाला ही क्या, कोई भी काँग्रेस या विपक्ष का नेता ना पाकिस्तान के खिलाफ एक शब्द बोल रहा है और ना आतंकियों के खिलाफ। अलबत्ता पाकिस्तान के नेताओं के साथ मोदी के खिलाफ ज़रूर जुगलबंदी कर रहे क्योंकि दोनों का शत्रु एक ही है और वो है मोदी।

काँग्रेस हो या विपक्ष का कोई भी दल, इनमें कोई फर्क नहीं है। हमले से कुछ दिन पहले केजरीवाल ने तेलंगाना में कहा, जिसकी वीडियो मैंने सुनी है – “मैं जितना सोचता हूँ, काँप उठता हूँ, अगर ये मोदी और अमित शाह की जोड़ी 2019 में जीत कर आ गई तो पाकिस्तान नहीं बचेगा, ये दोनों पाकिस्तान को ख़त्म कर देंगे।”

इनके लिए पाकिस्तान से प्रेम सर्वोपरि है चाहे वो हमारे देश को कुछ भी नुकसान पहुंचा दे।

लेकिन आतंक के साथ खड़े होने वालों, एक बात याद रखना, आतंकी किसी का सगा नहीं होता। आप जब तक उसका साथ दे रहे हैं, तब तक ठीक है, जिस दिन उसे एहसास हुआ कि आप उसके किसी काम के नहीं रहे तो फिर आप दुनिया में किसी काम के नहीं रहोगे। इतिहास देख सकते हो। गाँधी परिवार तो अपने घर का ही इतिहास देख सकता है।

पुलवामा हमला करके पाकिस्तान आज दहशत में है जबकि 26/11 करके वो खुशियां मना रहा था… क्योंकि तब मनमोहन सिंह थे और अब मोदी हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यवहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति मेकिंग इंडिया (makingindiaonline.in) उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार मेकिंग इंडिया के नहीं हैं, तथा मेकिंग इंडिया उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY