जिस दिन सैनिक जान देने से पहले सोचेगा, उस दिन देश नहीं बच पायेगा

जिस देश के 44 सैनिकों को बम विस्फोट में उड़ा दिया जाता है और परखच्चे भी ऐसे उड़े कि जवानों चीथड़े चीथड़े हो जाते हैं।

और कुछ दिनों बाद उस देश के लोग यह बहस कर रहे हैं कि दुश्मन देश के साथ क्रिकेट खेला जाये या नहीं, नहीं खेलेंगे तो कितना नुकसान होगा और खेलेंगे तो कितना!

लोग दो पॉइंट के लिये मरे जा रहे हों, लेकिन चाहते हैं कि सरकार दुश्मन को इज़राइल की तरह सबक़ सिखा दे और हम क्रिकेट खेलते रहें!

सचिन न सिर्फ खिलाड़ी हैं बल्कि भारत रत्न हैं और वायुसेना में ग्रुप कैप्टन हैं। जिस देश ने उन्हे इतना सम्मान दिया है, पैसा दिया है, उन्हें भी उस देश के बारे कुछ सोचना चाहिये। भारत रत्न होकर भी नून तेल बेचने का विज्ञापन करते रहे लेकिन देश ने बुरा नहीं माना।

सचिन वही हैं ना, जो राज्यसभा में नॉमीनेट होकर गये और वहां सबसे कम उपस्थित रह कर देश के साथ एक तरीके का भ्रष्टाचार किया। भई जब आपके पास राज्यसभा के लिये समय नही था तो इसे स्वीकार ही क्यों किया?

फिर एक बार फ़ेरारी में टैक्स बचाने के लिये कई तरह फ्रॉड किया। राज ठाकरे के समय जब वो उत्तर भारतीयों को प्रताड़ित कर रहे थे तो भारत रत्न सचिन ने एक भी बयान नहीं दिया। लेकिन आज भारत रत्न से सुशोभित खिलाड़ी 2 अंक के लिये तड़प कर बयान दिया परन्तु देश के लिये ज़बान नही खुलती!

यही तर्क बॉलीवुड वालो को भी रखना चाहिये और रखते हैं कि हमारा युद्ध क्षेत्र तो आर्ट है, एक फ़िल्म में पाकिस्तानी कलाकारों को भी लेंगे और उनसे अच्छा अभिनय करके पाकिस्तान को कड़ा संदेश दे देंगे! या उनसे अच्छी फ़िल्म बनायेंगे और पाकिस्तान को सबक़ सिखा देंगे।

दोनों देशों के सिंगर्स को भी सिंगिंग कॉम्पीटिशन रखना चाहिये और उन्हें हरा कर प्रतिशोध ले लेना चाहिये।

कला और साहित्य के क्षेत्र में यही करना करना चाहिये, जो अच्छी कहानी या शायरी लिखे वो जीत जाये।

बिज़नेस वालों को भी यही करना चाहिये कि बिज़नेस चालू रखें और उन्हे कम प्रॉफिट देकर बदला लेना चाहिये!

बल्कि हमें तो कुकरी कॉम्पीटिशन भी करवाना चाहिये और अच्छी डिश बनाकर पाकिस्तान को सबक़ सिखाना चाहिये!

देशभक्ति दिखाने के लिये सैनिक हैं तो है ना, वो मरे या जियें देश को क्या फर्क पडता है? कभी उन सैनिकों में अपने परिवार जनों को रखकर सोचिये कि आप शहीद होने के बाद भी क्या दुश्मन देश के साथ खेल खेलना पसंद करेगें?

कितने और सैनिकों के बलिदान के बाद दोनों देशों का खेल का रिश्ता खत्म होना चाहिये? कोई निश्चित संख्या हो तो बता दीजिये या ये यूँ ही अंतहीन चलता रहेगा। या इस प्रकार के प्रतिशोध से सैनिकों के परिवारजन और देशवासियों संतुष्ट हो पायेंगे?

क्रिकेट युद्ध नहीं है, महज़ एक खेल है, लेकिन खेल किसके साथ खेलना है ये देश तय करेगा। वैसे भी Cricket is a game of uncertainties. जिसमें हारना जीतना लगा रहता है, लेकिन उसके साथ तो नहीं खेल सकते तो हमारे जवानों के साख ख़ूनी खेल खेलते हैं।

ये देश और देश के सिद्धांत तय करेंगे कि किसके साथ खेल के रिश्ते रखने हैं? फिर उसके कारण जो नुकसान हो वो सहने को तैयार हो जायें। पहले हम अपनी प्राथमिकता और शर्तें तो तय कर लें, फिर दूसरे भी हमारा साथ देने आ जायेंगे!

और हां, युद्ध क्षेत्र सिर्फ एक है वो है बॉर्डर, देश का कोई और युद्ध क्षेत्र नहीं होता। सैनिक अपने लिये नहीं लड़ता है, देश के लिये लड़ता है और देश के लिये मरता है। उसकी क़ुरबानी को ज़ाया मत होने दीजिये, नहीं तो जिस दिन सैनिक जान देने से पहले सोचेगा उस दिन ये देश नहीं बच पायेगा।

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