हमारा भी खून बिखरा है वहां, तुम्हारे बाप का कश्मीर थोड़े है

कश्मीर से पूर्व IAS शाह फैसल जिसने IAS की नौकरी छोड़कर कश्मीरी पॉलिटिक्स में घुसने का मन बनाया।

शाह फैसल को डर लग रहा है… इस समय के कश्मीर के हालत को Doomsday (प्रलय का दिन/ क़यामत का दिन) बोल रहा है…

आज इसको बताते हैं कि Doomsday क्या होता है…

Doomsday से याद आया… ये तो कुछ नही है शाह फैसल… Doomsday पता है क्या होता है? आज सही ढंग से बताते हैं तुमको…

14 september 1989 से शुरू हुआ था doomsday कश्मीर में, जब सरेआम पंडित टीकालाल टपलू की हत्या कर दी गयी थी। फिर श्रीनगर हाई कोर्ट के जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गयी थी, उनका अपराध था एक आतंकवादी को सज़ा देना… वो था Doomsday.

फिर दिसंबर 1989 में तत्कालीन गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी का अपहरण किया गया, जिसके बदले में 5 आतंकवादियों को छोड़ा गया था। ये अपहरण भी एक inside job था, तथ्य तो ये साबित करते हैं कि रुबिया सईद को खाना भी रोज़ाना घर से पैक हो कर जाता था।

और जिस दिन 5 आतंकवादियों को छोड़ा गया, उस दिन पूरी रात कश्मीर घाटी में जश्न मनाया गया था… दरअसल वो था Doomsday.

4 जनवरी 1990 को श्रीनगर के प्रमुख अखबार ‘आफताब’ ने एक पूरे पन्ने का धमकी भरा पत्र निकाला था, हिजबुल मुजाहिद्दीन का, जिसमें घाटी के सभी हिन्दुओं को तुरंत कश्मीर छोड़ने की धमकी दी गयी थी… वो था Doomsday.

14 अप्रैल को ‘अल-सफा’ नामक अखबार ने इस धमकी को फिर से छापा… वो था Doomsday.

लोगों को घड़ियों का टाइम IST से बदल कर PST (पाकिस्तान स्टैण्डर्ड टाइम) कर देने के लिए धमकाया गया था, वो था Doomsday.

घाटी के अधिकांश मंदिरों को तोड़ दिया गया था, सभी प्रतिष्ठानों और दुकानों को ‘हरे’ रंग से रंग दिया गया था, ताकि एक खास धर्म का संदेश दिया जा सके… वो था Doomsday.

18 जनवरी 1990 की रात को पूरी घाटी की बिजली सप्लाई काट दी गयी थी, सिवाय मस्जिदों के… और पूरी रात ये नारे लगाए गए थे और लाउडस्पीकर द्वारा फैलाये गए थे… वो था Doomsday.

“ज़ालिमों, ओ काफ़िरों, कश्मीर हमारा छोड़ दो”
(O! Merciless, O! Kafirs leave our Kashmir)

“कश्मीर में अगर रहना है, अल्लाह-ओ-अक़बर कहना होगा”
(Any one wanting to live in Kashmir will have to convert to Islam)

“ला शर्किया ला ग़र्बिया, इस्लामिया! इस्लामिया!”
(From East to West, there will be only Islam)

“मुसलमानों जागो, काफ़िरों भागो”
(O! Muslims, Arise, O! Kafirs, scoot)

“इस्लाम हमारा मक़सद है, क़ुरान हमारा दस्तूर है, जेहाद हमारा रास्ता है”
(Islam is our objective, Q’uran is our constitution, Jehad is our way of our life)

“कश्मीर बनेगा पाकिस्तान”
(Kashmir will become Pakistan)

“काशिर बनावन पाकिस्तान, बताव वरिए, बतानेव सान”
(We will turn Kashmir into Pakistan alongwith Kashmiri Pandit women, but without their men)

“पाकिस्तान से क्या रिश्ता? ला इलाही इलल्लाह”
(Islam defines our relationship with Pakistan)

“दिल में रखो अल्लाह का खौफ़, हाथ में रखो कलाश्निकोव”
(With fear of Allah ruling your hearts, wield a Kalashnikov)

“यहां क्या चलेगा, निज़ाम-ए-मुस्तफ़ा”
(We want to be ruled under Shari’ah)

“पीपल्स लीग का क्या पैग़ाम, फ़तह, आज़ादी और इस्लाम”
(What is the message of People’s League? Victory, Freedom and Islam)

लाखों कश्मीरी पंडित जो हज़ारों साल से कश्मीर में रह रहे थे, उन्हें रातों रात अपने ही देश मे रिफ्यूजी बना दिया गया, वो था Doomsday.

उसके बाद हर दिन हमारे जवान आप लोगों की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त होते हैं, हमारे लिए हर दिन होता है Doomsday.

ये होता है Doomsday फैसल मियां, आज तो कुछ हुआ ही नहीं है… और तुम्हें पसीना आ गया… मिर्गी के दौरे पड़ने लगे गए।

अभी तो कुछ हुआ ही नही है, बाकि आपका डर मुझे अच्छा लगा…

और जाते जाते एक बात और… “हमारा भी खून बिखरा है वहां, तुम्हारे बाप का कश्मीर थोड़े है।”

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