जब कोई ये पूछे कि मोदी ने आखिर किया ही क्या है…

जो कोई ये पूछे कि मोदी ने आखिर किया ही क्या है… तो उसके मुंह पर ये लेख खींच के मारना।

1984 में पहली बार राजीव गांधी ने मरती हुई गंगा को बचाने की बात की थी। 1986 में गंगा एक्शन प्लान बना।

1986 से ले कर 2014 तक, जब मोदी आये… इन 28 सालों में गंगा एक्शन प्लान पर कुल 20,000 करोड़ रूपए खर्च हुए। किसी ने नहीं पूछा कि इन 28 सालों में 20,000 करोड़ खर्च कर के गंगा कितनी साफ हुई!

फिर 2014 में मोदी बनारस आये। उन्होंने कहा, ‘मैं आया नहीं, मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है’… मोदी के इस वाक्य का खूब मज़ाक उड़ाया गया। सुप्रीम कोर्ट और रविश कुमार जैसे पत्रकार रोज़ाना पूछते थे कि ‘कब होगी गंगा साफ? होगी भी या नहीं?

जिन लोगों ने 28 साल में एक बार भी नहीं पूछा वो रोज़ाना पूछते थे… काम हालांकि उमा भारती ही शुरू कर गयी थीं पर जब गडकरी आये तो काम ने स्पीड पकड़ी…

गडकरी ने घोषणा की कि बहुत जल्दी मने 2019 में ही गंगा जी 100% साफ हो जाएंगी… उनके इस कथन को भी लफ़्फ़ाज़ी कह के हवा में उड़ा दिया गया।

गडकरी झूठ बोल सकते हैं। पर गंगा जी में रहने वाली Gangetic Dolphins जिन्हें स्थानीय भाषा में सोंइस या सोंस भी कहते हैं… वो झूठ नहीं बोलती।

Gangetic Dolphin सिर्फ स्वच्छ मीठे पानी में ही रहती हैं। जब गंगा जी में प्रदूषण हद से ज़्यादा हो गया तो Gangetic Dolphins पलायन करके Delta क्षेत्रों में चली गईं थीं। भारी संख्या में इनकी मृत्यु भी हो गयी थी। लगभग पूरी गंगा जी डॉलफिन विहीन हो गयी थी।

जैसे ही गंगा जी साफ हुईं, डॉलफिन फिर लौट आयी हैं। हाल ही में हुई गणना में बिहार में 1100 से ज़्यादा डॉलफिन पाई गई हैं। ये गणना Zoological Survey of India ने तिलक मांझी यूनिवर्सिटी भागलपुर के सहयोग से 18 नवम्बर से 10 दिसंबर 2018 के बीच गंगा जी और सहायक नदियों गंडक और घाघरा के पानी में कराई।

इस गणना में 1150 से ज़्यादा Dolphins देखी गईं। इसके अलावा इस साल गंगा जी में Siberian Birds भी भारी संख्या में आई हैं। ये जलचर पशु पक्षी ही बता रहे हैं कि मोदी ने किया क्या है…

नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में उमाश्री भारती और नितिन गडकरी ने एक असंभव काम को संभव कर दिखाया है।

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