पाकिस्तान जाने वाली नदियों के पानी पर रोक : अर्धसत्य का सत्य

कल जब से केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी का यह ट्वीट आया है कि भारत, पाकिस्तान जाने वाले नदियों के पानी को रोकेगा, तब से भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में सनसनी सी फैल गयी है।

लोगों में इस समाचार को लेकर एक तरफ अति उत्साह का संचार अवश्य हुआ है लेकिन वहीं दूसरी तरफ इस समाचार को लोगों ने पढ़ने व उसके मूल को समझने में भूल भी की है।

मेरे लिए नितिन गडकरी का यह ट्वीट एक बासी खबर है, जिसे भारत की सरकार ने अपनी जनता में पाकिस्तान के विरुद्ध उफनती भावनाओ को तृप्त करने के लिए एक नए कलेवर में सामने रखा है।

मैं शुरू से मानता रहा हूँ कि भारत की ज्यादातर जनता स्मृति लोप से ग्रसित रहती है और वह उन समाचारों या सरकार के क्रांतिकारी निर्णयों के प्रति उदासीन रहती है जिसका लाभ दीर्घकालीन होता है या जिससे उनके स्वार्थों को तुरन्त लाभ नहीं मिलता है। कमोबेश, नरेंद्र मोदी भी भारतीय जनता की इस मानसिकता पर सहमत दिखाई देते है, इसलिये गडकरी का यह ट्वीट सामने आया है।

सत्य तो यही है कि मोदी ने पाकिस्तान को अंदर से तोड़ने और सुखाने के लिए यह काम पहले ही शुरू कर दिए थे, जिसका संज्ञान भले ही भारत की मीडिया ने नहीं लिया था लेकिन पाकिस्तान की मीडिया इसको लेकर चिंतन पहले से ही कर रही है।

जो लोग मुझे पढ़ते रहे है उन्हें यह समाचार नया नहीं लगना चाहिए, क्योंकि 11 अप्रैल 2018 को मैंने इसी विषय पर विस्तार से लिखा है। [देखें : पाकिस्तान तो तबाही की कगार पर, अब विदेश व रक्षा नीति के केंद्र में चीन] आज जब बहुत से अधीर पाकिस्तान से तुरन्त युद्ध किये जाने की मांग कर रहे है, वहीं मैं बिना बड़े युद्ध के पाकिस्तान को समूल नष्ट होते देख रहा हूँ।

जब से नरेंद्र मोदी की सरकार आयी, वे कई बार रिवर लिंकेज प्रोजेक्ट और साथ में भारत पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई ‘इंडस वॉटर ट्रीटी’ को लेकर इशारा करते रहे हैं।

यहां भारत के लोगों को तो वह शायद कम ही समझ में आया लेकिन पाकिस्तान में लोगों को 2016 से थोड़ा थोड़ा समझ में आ गया था लेकिन 2017 में पूरा समझ में आ गया जब उन्हें उरी आतंकवादी हमले के बाद मोदी ने पाकिस्तान के शासकों की तरफ इशारा करते हुये कहा था कि ‘खून और पानी, दोनो एक साथ नहीं बह सकते है’ और पाकिस्तान को धमकी दी थी कि भारत पाकिस्तान को बूंद बूंद के लिये तरसा देगा।

जिनको उस वक्त यह नरेंद्र मोदी का बड़बोलापन लग रहा था वही आज पानी के लिये युद्ध को लेकर 2025 तक सिंध व बलावल की जमीन बंजर होने के ख़ौफ़ के साये में जी रहे हैं।

यह 1960 में हुई ‘इंडस वॉटर ट्रीटी’ दरअसल वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच एक ऐसी सन्धि है जिसने इंडस यानी सिंधु नदी प्रणाली की उन 6 नदियों का बंटवारा था जो तिब्बत के पलटू से निकल भारत होते हुये पाकिस्तान में जाती हैं।

सन्धि में अनुसार पूर्वी हिस्से की तीन नदियों रावि, व्यास और सतलज नदी और उसके जल पर पूर्ण नियंत्रण भारत का है और पश्चिम की तीन नदियों इंडस (सिंधु), चेनाब और झेलम के पानी पर पाकिस्तान का नियंत्रण है।

इसमें एक दिक्कत यह थी कि पाकिस्तान को 136 MAF (मीन एवरेज फ्लो) का पानी मिल रहा था और भारत को उससे बहुत कम 33 MAF पानी था इसलिये यह तय हुआ कि पाकिस्तान के नियंत्रण में आने वाली नदियों सिंधु, चेनाब और झेलम का 20% पानी भारत को सिंचाई, बिजली बनाने और जलमार्ग के लिए उपयोग करने के लिए मिलेगा।

यह ट्रीटी इतनी मज़बूत मानी जाती है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 व 1971 का युद्ध होने के बाद भी इस पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन अब मामला गर्मा गया है। इसका कारण यह है कि पहले तो भारत ने अपने हिस्से में आई नदियों पर तेजी से बांध बना कर, पाकिस्तान को जाते पानी को लगभग रोक दिया है और जो जा रहा है उसका फ्लो इतना कम है जो पाकिस्तान की सिंधु नदी के बेसिन को कमज़ोर कर रहा है।

भारत का इरादा है कि अपने हिस्से के 100% पानी को सिंचाई के लिये उपयोग में लाना है। यह पाकिस्तान के लिये बुरी खबर है क्योंकि कालांतर में पाकिस्तान की कृषि भूमि जहां बंजर होगी, वहीं सिंधु नदी में पानी की आवक कम होने के कारण समुद्र का खारा पानी ऊपर चढ़ आयेगा और अच्छी ज़मीन को कृषि के लिये अनुपयोगी बना देगा।

यही नहीं, भारत ने पाकिस्तान के नियंत्रण की सिंधु, चेनाब और झेलम नदी के अपने हिस्से के पूरे 20% पानी का उपयोग करने का निर्णय किया है। अभी तक भारत सिर्फ लगभग 8% पानी का उपयोग करता रहा है और शेष 12% पिछले 58 वर्षों से पाकिस्तान जाता रहा है।

मामला सिर्फ इतना ही नहीं है, भारत ने इससे आगे जाकर सिंधु, चेनाब, झेलम और रावि नदी को ‘राष्ट्रीय जलमार्ग’ घोषित कर दिया है जो जल द्वारा ट्रांसपोर्ट और टूरिज़्म को बढ़ावा देगा। इसमें नदियों के पानी को तो रोका नहीं जायेगा लेकिन उसको जगह जगह रोका जायेगा, जिससे उसका प्रवाह धीरे हो जायेगा जिससे पाकिस्तान स्थित सिंधु नदी प्रणाली को कमजोर हो जाएगी।

यह मोदी सरकार का एक महत्वकांक्षी मास्टरस्ट्रोक है जो पाकिस्तान के कृषि उद्योग के लिये घातक होगा, वहीं उसके आंतरिक आर्थिक विकास के स्रोतों को एक दशक में ही तोड़ कर रख देगा।

यहां यह भी बताना महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान को भारत से बर्बाद होते आ रहे पानी की इतनी आदत लग चुकी थी कि उसने 1976 से कोई भी बड़ा बांध नहीं बनाया है और मोदी ने पाकिस्तान की इसी कमजोरी का फायदा उठा कर इंडस रिवर ट्रीटी से मिले अपने हक को पूरा लेने के लिये सारी परियोजनाओं पर युद्धस्तर पर काम करना शुरू कर दिया है।

इंडस ट्रीटी के अंतर्गत भारतीय हिस्से के पानी का युद्ध स्तर पर 100% पानी का उपयोग करने के लिए शुरू की गई परियोजनाओं का निर्णय, मोदी सरकार का एक ऐसा निर्णय है जिसके पाकिस्तान के लिए घातक परिणाम, अपरिवर्तनीय है।

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