सोनिया राज में अवैध रूप से भारत से बाहर भेजे गए 30 लाख 60 हज़ार करोड़ रुपये

आज किसी राष्ट्र में अभिजात्य वर्ग द्वारा की गयी चोरी के बारे में रिसर्च करते हुए एक थिंकटैंक (Global Financial Integrity) की रिपोर्ट पढ़ने लगा। सोचा, भारत के भी आकंड़े देख लिए जाए।

इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2004 से 2013 के दौरान भारत से 510 बिलियन डॉलर या एक डॉलर का 60 रुपये भाव के अनुसार 30,60,000 करोड़ रुपये (तीस लाख साठ हज़ार करोड़ रुपये) से अधिक धन अवैध रूप से भारत से बाहर भेजा गया।

जी हाँ, तीस लाख साठ हज़ार करोड़ रुपये। यानि कि यह धन सोनिया सरकार के 10 वर्षो के शासन के समय गैरकानूनी तरीके से भारत से ट्रांसफर किया गया।

इस दौरान, अवैध रूप से धन ट्रांसफर करने के मामले में भारत विश्व में चौथे स्थान पर था; पहले तीन स्थान पर चीन, रूस और मेक्सिको थे।

औसतन हर वर्ष लगभग 51 बिलियन डॉलर या 3,06,000 करोड़ रुपये (तीन लाख साठ हज़ार करोड़ रुपये) भारत से बाहर अवैध रूप से भेजे जाते थे। एक तरह से भारत के सालाना रक्षा बजट से भी अधिक।

28 जनवरी 2019 में वर्ष 2015 की रिपोर्ट रिलीज़ हुई। इसके अनुसार वर्ष 2015 में कुल 9.8 बिलियन डॉलर या 58000 करोड़ रुपये अवैध रूप से भारत से बाहर भेजा गया।

इस वर्ष किसकी सरकार थी? प्रधानमंत्री मोदी की।

अगले वर्ष जब 2016 की रिपोर्ट आएगी, तो मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा कागज़ी या फर्जी कम्पनियों (shell companies) को बंद करना, अवैध धन संचित करने वाले देशों जैसे कि मॉरिशस, सेशेल्स, स्विट्ज़रलैंड इत्यादि देशो से संधि करके ऐसी चोरी पर रोक लगाना, नोटबंदी और बैंक अकाउंट को आधार से लिंक करने के कारण ऐसे गैरकानूनी ट्रांसफर एक बिलियन डॉलर या 6000 करोड़ रुपये से भी कम हो सकते है।

वर्ष 2018 में GST के कारण ऐसे ट्रांसफर घटकर कुछ सौ करोड़ ही रह जायेंगे।

यह होता है सही नीतियों और दृढ़ नेतृत्व का असर।

बाकी काला धन समाप्त करने के नारे लगाने और लॉलीपॉप पकड़ाने को राहुल और केजरीवाल तो हैं ही।

प्रधानमंत्री मोदी पर विश्वास बनाये रखें।

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