उस विलेन की समस्या ही राहुल G की समस्या है, काँग्रेस की समस्या है

विजय आनंद की कालजयी रचना… thrillers का बाप… ‘जॉनी मेरा नाम’ फ़िल्म का एक दृश्य है… विलेन प्रेमनाथ ने अपने बड़े भाई सज्जन को बरसों से अपने अड्डे पे क़ैद कर रखा है।

एक दिन दोनों भाइयों का संवाद होता है। बड़ा भाई, छोटे से पूछता है कि आखिर तुझे मुझसे समस्या क्या है?

प्रेमनाथ जवाब देता है कि समस्या तुम नहीं बल्कि तुम्हारी शराफत है… दारू तुम नहीं पीते, जुआ तुम नहीं खेलते, अय्याशी तुम नहीं करते, चोरी डकैती धोखा फ्रॉड गबन घोटाला भ्रष्टाचार तुम नहीं करते… तो सारी दुनिया तुमसे मेरी तुलना करती है और गरियाती है… तुम्हारी शराफत ही मेरे जी का जंजाल बन गयी है। तुम भी अगर अय्याश, जुआरी, शराबी, भ्रष्ट होते तो मुझे कोई point out न करता…

ठीक यही समस्या राहुल G की है, Congress की है।

पिछले दिनों भारत के engineers द्वारा देश में निर्मित पूर्णतया स्वदेशी semi high speed ट्रेन 18 जो अपने trial run पर थी और वाराणसी से दिल्ली वापस आ रही थी, वो एक पशु से टकरा जाने के कारण खड़ी हो गयी और उसमें कुछ तकनीकी खराबी आ गयी।

राहुल G समेत सम्पूर्ण विपक्ष ने इस ‘विफलता’ को celebrate करना शुरू कर दिया… Make in India के तहत स्वदेश में निर्मित ट्रेन 18 की विफलता पर टीका टिप्पणी होने लगी। पूरे Make in India को ही फेल घोषित किया जाने लगा।

अंत में रेल मंत्री पीयूष गोयल को सामने आ के बताना पड़ा कि असल विफलता — सफलता क्या होती है।

Congress के गांधी खानदान ने 55 साल के अपने शासनकाल में अमेठी रायबरेली में एकमात्र विकास कार्य जो किया वो था रायबरेली में रेलवे की Modern Coach Factory… रेल के coach बनाने का कारखाना।

UPA-1 में 2007 में इसकी नींव पड़ी… 2010 में बन के तैयार हुई और 2010 से ले के 2014 तक इन 4 सालों में एक भी नए coach का निर्माण नहीं हुआ… कपूरथला और चेन्नई में RCF और ICF में बने coaches की सिर्फ मरम्मत, overhauling और dent-paint होता था जिसे refurbishing कहते हैं। MCF रायबरेली ने UPA के शासनकाल में 4 साल में सिर्फ 375 कोच refurbish किये।

फिर जब मई 2014 में मोदी जी आये तो उन्होंने हिसाब किताब लिया। पूछा कि क्या करते हो भैया? काहे नहीं बना एक्को कोच 4 बरिस में…

जवाब मिला कि Sir, UPA द्वारा खरीदी गयी सब मशीनें नाकारा हैं, फ़र्ज़ी हैं…

मोदी जी ने कहा ठीक करो, नई मंगाओ चाहे कुछ करो… हमको नहीं पता… नये कोच बनाने के लिए लगाई है MCF… बनाना शुरू करो… और मोदी जी के आदेश पर अगस्त 2014 में MCF में स्थापना के 7 साल बाद पहला कोच बना।

2014-15 में मोदी सरकार के पहले साल में 140 कोच बने।
2015-16 में 285 कोच बने।
2016-17 में 576 कोच बने।
और 2017-18 में 711 कोच बने।

2017 में जब पीयूष गोयल को रेल मंत्रालय का चार्ज मिला तो वे खुद रायबरेली गए और रेलकर्मियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि आज आप अपनी कुल क्षमता का 70% उत्पादन कर रहे हैं पर मैं जानता हूँ कि आप में अपार क्षमता है और आप इसे दोगुना भी कर सकते हैं।

MCF रायबरेली के कामगारों engineers ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 2018-19 में कुल 1422 कोच बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया। पीयूष गोयल कहते हैं कि उनको पूरा विश्वास है कि हमारे नौजवान इस लक्ष्य को हासिल करके रहेंगे जोकि उनकी कुल क्षमता का 140% से भी ज़्यादा होगा।

गौरतलब है कि MCF रायबरेली में 130-140 Kmph की स्पीड से दौड़ने वाले जर्मन टेक्नोलॉजी के LHB coaches बनते हैं…

राहुल G… इसे कहते हैं काम करना… ये है Make In India… और इसे कहते हैं सफलता… आपने जहां 7 साल में एक भी कोच नया नहीं बनाया, वहां मोदी जी एक साल में 1400 कोच बना रहे हैं…

राहुल G जानते हैं कि मोदी सरकार की विफलता, Make In India की विफलता, भारत की विफलता से ही उनका अस्तित्व है… यदि मोदी सफल हो गए तो उनका अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा…

इसी लिए राहुल G दिन-रात Make In India की विफलता की कामना किया करते हैं। भारत की विफलता की कामना किया करते हैं।

बाकी समाचार ये है कि पूर्णतया स्वदेशी ट्रेन 18 पूरी तरह कामयाब है और वाराणसी दिल्ली के बीच सरपट दौड़ रही है… चेन्नई स्थित ICF बोले तो Integral Coach Factory को 14 डिब्बों की ऐसी 100 ट्रेन बनाने का order दिया गया है।

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY