पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने और गहरी कर दी है विभाजन रेखा

एक तरफ जहाँ बहुसंख्यक लोग उद्वेलित है, वीरगति के प्राप्त सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति हृदय से संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीँ दूसरी ओर विश्वविद्यालय के शिक्षक, वित्तीय क्षेत्र, बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत कुछ सनातनी, भारतीय सेना के विरूद्ध लिख रहे हैं।

मीडिया वालों का तो नाम ही नहीं लिया क्योंकि उनकी सोच पर तो कब से लोग प्रश्न चिह्न लगा रहे हैं। उनका नाम लेकर मैं उन्हें प्रचार नहीं देना चाहता।

उनके लेख से कुछ बाते सामने आ रही हैं और मेरे मन में कुछ प्रश्न उठ रहे हैं। संक्षिप्त में:

  • इस समूह में मैंने एक बात कॉमन देखी, यह सभी मोदी सरकार के घोर विरोधी हैं। एक तरह से वे प्रधानमंत्री मोदी से घृणा करते हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता और पारिवारिक बैकग्राउंड का मजाक उड़ाते हैं और अपने आप को उनसे श्रेष्ठ समझते हैं।
  • किसी व्यक्ति या विचारधारा का विरोध करना, मज़ाक उड़ाना, यहाँ तक कि घृणा करने का मैं अभिव्यक्ति की आज़ादी के मूलभूत अधिकार के रूप में सम्मान करता हूँ, भले ही वह व्यक्ति प्रधानमंत्री क्यों ना हो, भले ही वह विचारधारा सनातनी ही क्यों ना हो।
  • लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का विरोध करने का अर्थ राष्ट्र-विरोध तो नहीं है, कि आप भारतीय सेना पर मनगढ़ंत आरोप लगाना शुरू कर दें और आतंकवाद को डिफेंड करना शुरू कर दें।
  • यहाँ तक कि इन लोगों ने भारतीय संस्थाओं – जैसे कि सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, CAG, सेना – को भी अपनी कुत्सित विचारधारा का शिकार बना दिया।

इन में से कुछ के फेसबुक पेज पर मैंने देखा कि ये लोग जस्टिस लोया के लिए न्याय मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी आप संतुष्ट नहीं हैं। और तो और, आप ने मुख्य न्यायाधीश को भी नहीं छोड़ा।

आप लिखते है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी पसंद के जजों की नियुक्ति कर रहे हैं। आपको यह भी नहीं पता कि जज अपने आप को स्वयं नियुक्त कर रहे हैं और सरकार का इसमें कोई रोल नहीं है।

  • लेकिन जैसे आप सनातनी विचारधारा का मज़ाक उड़ाते हैं, वैसे ही क्या आप में किसी निराकार भगवान का कार्टून भी बनाने की हिम्मत रखते हैं? या किसी ‘पवित्र’ पुस्तक का भी मज़ाक उड़ा सकते हैं? या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कार्टून बनाये जाने की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सपोर्ट करेंगे?
  • आप प्रधानमंत्री मोदी से नफरत करते हैं। चलिए माना। लेकिन आप किस पार्टी को विजयी और किस व्यक्ति को प्रधानमंत्री देखना चाहेंगे, इस बात पर आप चुप क्यों है?

क्यों नहीं आप अपने प्रधानमंत्री पद के कैंडिडेट के बारे में खुल के लिखें और हमें भी बताएं कि उनकी क्या विशेषता है, कहाँ तक पढ़े हैं, सार्वजानिक जीवन में क्या पहाड़ उखाड़े है?

  • आप कहते है कि प्रधानमंत्री मोदी कश्मीर समस्या को सुलझा नहीं पाए तथा मिलिट्री संसाधन से समस्या नहीं सुलझाने वाली। उन्हें बात-चीत से समाधान निकलना चाहिए।

सहमत। अब ज़रा यह तो बताइये कि काँग्रेसियों और वी पी सिंह सरकार इस समस्या को क्यों नहीं सुलझा पायी? वे तो बात-चीत का रास्ता अपना रहे थे और साथ में, बिरयानी भी खिला रहे थे।

  • अच्छा, अब यह भी बताते जाइये कि बात-चीत में आप क्या ‘ऑफर’ करेंगे? वे किसी पुस्तक की बात करते हैं और कहते हैं कि वे साथ नहीं रह सकते। इस डिमांड में उन्हें आतंकी देश का आतंकी सहयोग प्राप्त है। आप सेक्युलर संविधान की बात करेंगे। इस बात-चीत में किस बिंदु पर सहयोग हो सकता है?
  • क्या अरविंद केजरीवाल पढ़े-लिखे माने जाएंगे या उनके बैच का टॉपर पढ़ा-लिखा माना जाएगा? या फिर वह उमर शेख से जो लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ा था और जिसने अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की गर्दन रेतकर पाकिस्तान में हत्या कर दी थी। या फिर 19 आतंकवादियों को जिन्होंने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया था। वह सब या तो इंजीनियर थे या फिर पायलट। अल क़ाएदा का नेता अल-ज़वाहिरी डॉक्टर है।

अगर पढ़ा लिखा व्यक्ति प्रधानमंत्री होना चाहिए तो क्या यह नहीं होना चाहिए कि सभी पढ़े-लिखे लोग एक कंपटीशन दें और जो उसमें टॉप करे वह प्रधानमंत्री बने। लेकिन फिर व्यवस्था की सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि सारे विधायक और सांसद भी पढ़े लिखे हों। इससे तो लालू प्रसाद और उनके पुत्रों का टिकट ही कट जाएगा।

लेकिन शशि थरूर का क्या होगा? उन्होंने PhD करी है और उसी संगठन में वह भी काम कर चुके हैं। लेकिन समस्या यह है कि अगर शशि थरूर को अपनी पढ़ाई के बल पर प्रधानमंत्री होना चाहिए, तो फिर राहुल गांधी का क्या होगा? वह तो शशि थरूर से कम पढ़े लिखे हैं। इस पूरे प्रकरण में सोनिया गांधी की महत्वाकांक्षा का क्या होगा? और फिर प्रियंका, वह कहां तक पढ़ी लिखी हैं?

  • वैसे हम अपने पूज्य ग्रंथों के साथ ‘पवित्र’ विशेषण नहीं जोड़ते हैं क्योंकि हमारे ग्रंथों और विचारधारा को किसी सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं। क्योंकि हमारी विचारधारा सतत है, सनातनी है, आदि है, अनंत है, सत्य है, शिव है, सुन्दर है।

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