सरकार पर न बनाएं दबाव, कुश्ती लड़ कर नहीं हथियारों से होगा युद्ध का फैसला

सच से मुंह मत चुराइये और सेना तथा सरकार पर दबाव मत बनाइये क्योंकि युद्ध का फैसला कुश्ती लड़कर नहीं हथियारों से होगा।

पूरा लेख ध्यान से पढ़िए क्योंकि…

देश ने 30 साल से कोई तोप नहीं खरीदी।

देश ने 31 साल से कोई आधुनिक बमवर्षक लड़ाकू विमान नहीं खरीदा।

2009 में देश की सेना ने 3 लाख 86 हज़ार बुलेटप्रूफ जैकेट, 1.48 लाख बैलेस्टिक हेलमेट मांगे। पर मई 2014 तक सेना को एक भी नहीं दिए गए।

मई 2014 में वो जब सरकार छोड़कर गए तो सेना को 8.5 लाख अत्याधुनिक बंदूकों की कमी के साथ छोड़ गए।

2014 में ही CAG रिपोर्ट यह भी बता रही थी कि युद्ध की स्थिति में सेना के पास केवल 10 दिन का गोला बारूद है।

हथियारों की यह 30 साल लम्बी कंगाली 2-4 साल में नहीं खत्म होती क्योंकि यह चीजें किसी दुकान में रेडीमेड नहीं मिलती। जब कोई देश ऑर्डर देता है तब उसे बेचने वाला देश अपने यहां बनाता है।

ध्यान रहे कि…

मोदी ने 1.86 लाख बुलेटप्रूफ जैकेट, 1.5 लाख बैलेस्टिक हेलमेट देश में ही बनवाकर सेना को दे दिए हैं।

मोदी ने धनुष और सारंग तोप देश में ही बनवाई हैं और पहली तोप सेना को इसी जनवरी में मिली है।

मोदी ने विश्व स्तरीय K-9 होवित्जर तोप देश में बनवाई है। इसी जनवरी में सेना को पहली तोप मिली है।

मोदी ने 59000 करोड़ के राफेल खरीदे, पहली खेप इस वर्ष सितम्बर में मिलेगी।

मोदी ने 40,000 करोड़ के 5 S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम रूस से खरीदे, जो अगले साल सितंबर में मिलेंगे।

मोदी ने रूस और अमेरिका से 7.5 लाख अत्याधुनिक बंदूकें खरीदीं जो किस्तों में मिलना शुरू हुई हैं।

उपरोक्त सभी खबरें आप सभी मित्रों ने कभी ना कभी पढ़ी ही होंगी।

यह तैयारी किस के लिए हो रही है?

लेकिन अब जब मुसीबत गले पड़ ही गयी है तो इसका सामना तो देश की सेना करेगी ही। लेकिन जिन हालात का ऊपर जिक्र किया है उनमें सेना को केवल बल से नहीं बल्कि बुद्धि से भी काम लेना है। इसके लिये थोड़ा समय लगेगा। वह समय उसे दीजिये।

आज यह इसलिए लिखा क्योंकि कल से देख रहा हूं कि कुछ मठाधीश इधर-उधर की कतरनों, सच्ची झूठी कही सुनी के सहारे सोशल-मीडियाई जेम्स बॉण्ड बनकर यह ऐलान करते घूम रहे हैं कि मानो भारतीय सेना आज रात को ही हमला करने जा रही है।

ऐसी अफवाहें बहुत घातक हैं। क्योंकि या तो ऐसा कोई हमला कुछ घण्टों के भीतर ही होता, जिसमें पाकिस्तान को सम्भलने का मौका नहीं मिलता। लेकिन ऐसा क्यों नहीं हुआ इसका कारण केवल सेना जानती है और हमसे आपसे करोड़ों गुना अधिक बेहतर जानती है।

अतः सेना द्वारा अब जो हमला या कार्रवाई होनी है उसमें 1-2 हफ्ते भी लग सकते हैं। तब तक अपने धैर्य और संयम के बांध मत टूटने दीजिये।

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