विज्ञान वरदान या अभिशाप : Solar Fan के कारण आप हो जाएँगे इस व्यक्ति के फैन

टेक्नोलॉजी दो धारी तलवार है। आज “परमाणु” उर्जा से विश्व भर में बिजली पहुंच चुकी है और अभी अगर “परमाणु” युद्ध छिड़ जाये तो मेरा यह लेख समाप्त होने तक दुनिया समाप्त हो सकती है।

लगभग हर रोज़ टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग के विषय मे कुछ ना कुछ छपता रहता है। अकाउंट हैक कर के पैसे निकालने की घटनाएं तो अब आम होने लगी हैं। परन्तु इसी बीच टेक्नोलॉजी के सदुपयोग के कई ऐसे जीवंत उदाहरण हैं जो अखबार के पन्नों में अपनी जगह नहीं बना पाते हैं।

तस्वीर बेंगलुरु की निवासी 75 वर्षीय सेल्वम्मा की है जो भुट्टे की रेहड़ी लगा कर गुज़र बसर करती हैं। हर रोज़ की तरह सेल्वम्मा कोयले की आंच पर भुट्टे सेंक रही थी। हाथ में एक प्लास्टिक का पंखा था सेल्वम्मा के बूढ़े हाथ उसे ज़ोर से हिला कर कोयले की आंच को तेज कर रही थी।
इसी बीच पुष्कर नामक एक नवयुवक सेल्वम्मा की रेहड़ी पर आया और उसने एक भुट्टा सेंकने को कहा। सेल्वम्मा ने भुट्टे को कोयले पर रखा और ज़ोर से पंखा झलने लगी। कुछ ही क्षण बाद बूढ़े हाथ थक गये और सेल्वम्मा अपने बाएं हाथ से अपने दाएं हाथ को दबाने लगी।

पुष्कर ने वृद्धा से पूछा के क्या उसके हाथ में कोई दिक्कत है तो सेल्वम्मा ने जवाब दिया कि दोनों हाथों की नसें अब कमज़ोर पड़ चुकी हैं। कुछ ही क्षण पंखा झलने के पश्चात हाथ मे ज़ोर से दर्द उठता है और हाथ अपने आप रुक जाता है। असहनीय दर्द होता है।

पुष्कर से वृद्धा की यह हालत देखी ना गयी। परन्तु बाकी लोगों की तरह उन्होंने सेल्वम्मा के प्रति सहानुभति जता कर उन्हें कुछ अधिक पैसे देने का प्रयास नहीं किया। उसने कुछ ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास किया जिससे वृद्धा को अपने कमज़ोर हाथों का प्रयोग ही ना करना पड़े।

पुष्कर ने वृद्धा की मदद के लिए सेल्को फाउंडेशन का दरवाज़ा खटखटाया। यह एनजीओ सतत ऊर्जा के लिए समाधानों की दिशा में काम करता है। सेल्को फाउंडेशन अल्टरनेट एनर्जी सोर्स जैसे सोलर एनर्जी आदि के उपकरणों के द्वारा ऊर्जा संरक्षण के कार्य मे बेहतरीन काम कर रहा है।

फाउंडेशन से जुड़े कुछ युवा इंजीनियर वृद्धा की रेहड़ी पर पहुंचे। असल में दरकार एक पंखे की थी जो प्लास्टिक के झलने वाले पंखे की जगह ले सके।

एक डिज़ाइन बनाया गया। एक सोलर पैनल के साथ एक सौर ऊर्जा से चलने वाले एक पंखे को जोड़ दिया गया। सोलर बैट्री के चार्ज होने पर यह पँखा सूरज छिपने के कई घंटे बाद भी बखूबी काम करता है। जो काम हाथ का पँखा कर रहा था अब वही काम सौर ऊर्जा से चलने वाला पँखा कर रहा है। पुष्कर और उनकी टीम ने सेल्वम्मा की रेहड़ी को हाईटेक बना दिया है।

अम्मा के वृद्ध हाथ अब जोर ज़ोर से पँखा झलते हुये थकते नहीं हैं। यह काम अब सोलर पैनल से जुड़ा सोलर पँखा करता है।

इस बात पर बहस हो सकती है के टेक्नोलॉजी वरदान है या अभिशाप ! परंतु इंसान अगर चाहे तो टेक्नोलॉजी वरदान बन सकती है। एक वृद्धा के बूढ़े हाथों का कंपन महसूस कर उसे एक सोलर फैन उपलब्ध करवा देना एक वरदान ही तो है।

बरहाल दिन भर अगर आप टेक्नोलॉजी के दुरूपयोग की खबरों से रूबरू होते हैं तो समझ लें के मीडिया केवल सिक्के का एक पहलू दिखा रहा है। इस वृद्धा के आराम पा रहे हाथों को देख कर टेक्नोलॉजी के सकारात्मक पहलू का एहसास होता है। विश्व भर में ऐसे कई “पुष्कर” हैं जो इसी टेक्नोलॉजी को किसी ना किसी की ज़िंदगी बेहतर बनाने में उपयोग कर रहे हैं।

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