पुलवामा-पाकिस्तान-चीन-अरब

जो पाकिस्तान कल तक कटोरा लेकर भीख मांग रहा था, जिसने सऊदी अरब के शेख से धन पाने के लिए उनका स्वागत किसी गुलाम की तरह किया, वो अचानक भारत के 42 सैनिक की हत्या नहीं कर सकता। विशेषकर जब वो दिवालिया होने वाला हो।

कुछ दिन पीछे चलते हैं, भारत ने आतंकी मसूद अज़हर को जब संयुक्त राष्ट्र से प्रतिबंधित करवाना चाहा तो चीन ने कड़ा विरोध किया था और वीटो लगा दिया था। इस बार भी जहाँ सभी देश इस घटना की भर्त्सना कर रहे हैं, चीन पाकिस्तान का समर्थन कर रहा है।

चीन पाकिस्तान के कंधे पर बंदूक रखकर भारत पर लक्ष्य संधान करता रहता है। चीन किसी भी देश से सामने से नहीं लड़ता। वो सदैव छद्म युद्ध ही लड़ता रहा है। एक ओर वो भारत में अपना व्यापार बढ़ा रहा है और दूसरी ओर पाकिस्तान के सहारे भारत पर हमला भी कर रहा है। उत्तर पूर्व के आतंकी संगठन हों या नक्सली, सभी को चीन से प्रत्यक्ष या परोक्ष सहायता मिलती रही है।

आतंकवाद हो या कोई अन्य गतिविधि, बिना आर्थिक सहयोग के उसे पूर्ण नहीं किया जा सकता। आतंकवाद, क्रांति, युद्ध इन सबके लिए धन लगता है और कुशल प्रशासक वही होता है जो इस धन के स्रोत पर प्रहार करता है।

आतंकवादियों को इस समय पाकिस्तान अपने पैसे से नहीं पाल सकता। ये चीन और सऊदी अरब के पैसे से ही पल सकते हैं। वास्तव में समस्त संसार की सारी गतिविधियों का मूल यही अर्थ है। आपको ध्यान होगा कि भामाशाह के धन से ही महाराणा प्रताप अपना युद्ध अनवरत जारी रख सके थे।

कोई भी आतंकी पेट से जन्म नहीं लेता। उसे आतंकी बनाया जाता है। आतंकी बनाने के लिए दो पुस्तक अधिक उत्तरदायी हैं, एक है कुरान, दूसरी है दास कैपिटल। इन्हीं दोनों से प्रेरित हो लोग अतिवादी बनते हैं। आतंकी मात्र मोहरे होते हैं। इन्हें संचालित करने वाले सफेदपोश लोग होते हैं, जिनकी राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा बहुत उच्च होती है। प्रहार शीर्ष पर हो तो नीचे के लोग अपने आप सुधर जायेंगे।

मुस्लिम जेहादी आतंकवादी मदरसे से निकलते हैं। सभी मदरसों को बंद कर देना चाहिए। धार्मिक पहचान को मिटा देना चाहिए और देश में एक समान नागरिक कानून लाना चाहिए।

चीन जानता है कि जिस दिन पाकिस्तानी जेहादी भारत से लड़ना बंद कर देंगे वो उइगर मुसलमानों के लिए चीन से लड़ना आरम्भ कर देंगे। इसलिए वो इन जेहादियों का मुँह भारत की ओर किये रहता है और अपने देश में इन पर कड़े प्रतिबंध लगाए रखता है।

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