राजस्थान सरकार की क्षुद्रता : बलिदानी के अंतिम दर्शन से लोगों को किया वंचित

भारत की रक्षा करने वाले जवान की आतंकवादी द्वारा मृत्यु हो और उसका पार्थिव शरीर उसके गांव अंतिम संस्कार के लिए आ रहा हो, तब क्या कोई राजनैतिक दल, तुच्छता कर सकता है?

मैं सोचता था कि यही एक क्षण है जब लोग राजनीति से ऊपर उठ कर, देश की रक्षा में बलिदान हुए जवान को कृतज्ञता से श्रद्धांजलि देंगे और जनता को देने देंगे।

लेकिन काँग्रेस एक ऐसा दल है जो अपवाद स्वरूप है। अभी फोन पर पता चला इस गमगीन माहौल में भी काँग्रेसी अपनी क्षुद्रता दिखाने से बाज़ नही आये हैं।

राजस्थान से आए इस फोन कॉल से सूचना मिली है कि वहां के जिला राजसमंद के बिनोल ग्राम के निवासी नारायण लाल गुर्जर, पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुए।

उनके पार्थिव शरीर को आज उनके गांव पहुंचना था, जिसकी सूचना जब शहर में मिली तो प्रातः से ही पूरे राजसमंद शहर की जनता अपने-अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकान, शोरूम व ऑफिस बंद कर के अंतिम दर्शन करने के लिए सड़कों पर आ गयी।

घरों में चूल्हे नहीं जले, स्कूल कॉलेज बंद हो गए… छोटे छोटे बच्चे हाथों में तिरंगा लिये सड़कों किनारे खड़े थे। इस भीड़ में बच्चों के साथ महिलाएं भी हाथ में फूल मालाएं व तिरंगा ले कर आंसू भरी आंखों से देश के इस सपूत की राह तक रही थीं।

स्थानीय प्रशासन से जैसे ही राजस्थान की काँग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को यह पता चला कि पूरा शहर अंतिम दर्शन के लिए सड़क पर है, उन्होंने आदेश दिया कि ज्यादा लोगों को अंतिम संस्कार में जाने से रोका जाए।

शायद गहलोत का ख्याल था कि पार्थिव शरीर को देख कर लोगों को संवेदनाएं काँग्रेस के विरुद्ध भड़केंगी और यह काँग्रेस की पाकिस्तान व कश्मीरी अलगावादियों से बातचीत करने की नीति को नुकसान पहुंचाएगा।

इसका परिणाम यह हुआ कि एक तरफ शहर आंखें बिछाए अपने लाल का इंतजार करता रहा और दूसरी तरफ प्रशासन ने अंतिम मौके पर, बिना किसी सूचना के अंतिम यात्रा का मार्ग बदल दिया।

बलिदानी नारायण लाल गुर्जर के पार्थिव शरीर को शहर से बायपास कर सीधे उनके गांव की ओर मोड़ दिया जो शहर से लगभग 12 किमी दूर था। जब अंतिम दर्शनों के लिए खड़ी लाखों जनता को यह बात देर से पता चली तो दु:ख में डूबी जनता का सब्र टूट गया।

राजसमंद की जनता आक्रोशित है… राजस्थान की सरकार ने शहीद के अंतिम दर्शनों से भी वंचित कर दिया। वे लोग सुबह से वीरगति को प्राप्त अपने राजसमंद के सपूत का इंतज़ार कर रहे थे और राजस्थान की काँग्रेसी सरकार ने गुपचुप तरीके से पार्थिव शरीर को गांव पहुंचा दिया।

काँग्रेस से अपनी हीनता और क्षुद्रता का जो परिचय दिया, उसको धता बताते हुए पूरे राजसमंद की आक्रोशित जनता, अंतिम दर्शन करने के लिए पैदल ही बिनोल गांव की ओर कूच कर गयी। इसका परिणाम यह हुआ कि एक बलिदानी के अंतिम संस्कार पर श्रद्धांजलि देने पूरा शहर बिनोल गांव में समाहित हो गया।

राजसमंद में हुई घटना और उसकी प्रतिक्रिया में जनता का पैदल ही गांव कूच कर जाना बहुत कुछ कह जाता है। यह जनता है, जो सब जानने लगी है।

यदि काँग्रेस की सरकारें बलिदानियों के अंतिम संस्कार पर यह सोच कर राजनीतिक दिमाग लगा रही हैं कि जनता का आक्रोश पाकिस्तान व कश्मीरी आतंकवादियों के विरुद्ध नहीं भड़के और जनता की संवेदनाओं को, और वे इस आक्रोश को वोट के नुकसान के तराजू पर तौलेंगे तो यह काँग्रेस की गलतफहमी है कि इससे काँग्रेस के पाप छिप जाएंगे।

आज आज भारत का बच्चा-बच्चा यह जान गया है कि काँग्रेस का हाथ आतंकवादियों के साथ है और उनके हाथ भारत की सुरक्षा में लगे लोगों के बहे खून से सने हुए है।

[मौके पर मौजूद श्री दीपक जैन चोरड़िया (Deepak Jain Chordia) से प्राप्त जानकारी पर आधारित]

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