ये समय सरकार को कोसने का नहीं, बल्कि विश्वास और हिम्मत देने का है

खेल हो या लड़ाई का मैदान हर कोई जीतने के लिए ही खेलता है। पिछले 5 वर्षों में कश्मीर में जितने आतंकी मारे गए उतने इतिहास में पहले कभी नहीं मारे गए। आतंकी नया कमांडर बनाते नहीं कि सेना उसे ठोंक देती है। सेना को इतना फ्री हैंड पहले कभी नहीं दिया गया।

250 किलो से ज़्यादा विस्फोटक कब किसने और कैसे पहुँचाया, कौन इस हमले के पीछे था, किसने मदद की, किसने साज़िश रची ये सब सुरक्षा एजेंसियाँ पता कर ही लेंगी।

देश गुस्से और दुःख से भरा है, हर कोई अपने हिसाब से प्रतिक्रिया दे रहा है। लेकिन संकट की इस घड़ी में हमें सेना और सरकार के साथ खड़े होना है।

ये समय सरकार को कोसने का नहीं बल्कि विश्वास दिलाने और हिम्मत देने का है और सरकार इस पूरे षडयंत्र की तह तक जाकर इसका उचित प्रतिशोध लेगी ये विश्वास है।

आतंकी कश्मीर के आगे नहीं जा पा रहे, जहाँ चाहें वहाँ धमाके नहीं कर पा रहे, उनके लोग रोज़ मारे जा रहे हैं तो वो भी कुछ न कुछ करने की फ़िराक़ में थे। कल उनको मौका मिल गया और देश ने अपने बेशकीमती बहादुर जवान खो दिए, कई घायल हैं।

इस देश की विडंबना ये है कि यहाँ ‘असली आतंकवादी’ यहाँ के सिस्टम में, राजनीति में, वकालत में, अदालतों में, पत्रकारिता में, साहित्य में, फिल्मों में, सोशल वर्कर्स के रूप में, हमारे कुछ दोस्तों, परिचितों के रूप में हमारे आसपास ही मौजूद हैं। इनको एकदम से ख़त्म कर पाना असंभव है।

मैदान पर जो टीम खेलती हैं उसके पीछे उससे बड़ी टीम उनके लिए मैदान के बाहर काम करती है। ऐसे ही इन ज़मीन पर आकर तांडव मचाने वाले आतंकियों के पीछे उनसे बड़े और उनसे कहीं ज़्यादा ताक़तवर आतंकी उनके लिए इन सारी जगहों पर काम करते हैं।

आज भी रावण से ज़्यादा विभीषण बदनाम है जबकि वो रामजी के साथ खड़ा था, अन्याय के विरुद्ध खड़ा था। लेकिन ये सारे विभीषण अन्याय के साथ, देश और इस देश की जनता के खिलाफ खड़े हैं।

एक सामान्य नागरिक सुप्रीम कोर्ट के जिन महँगे वकीलों को अनुबंधित करने की सोच भी नहीं पाता वो ‘दो कौड़ी के महँगे वकील’ देश को तोड़ने वालों के केस मुफ्त में लड़ते हैं, आधी रात को आतंकियों के लिए सुप्रीम कोर्ट खुलवा देते हैं।

जब सरकार कार्रवाई करेगी तब फिर हम देखेंगे कि कोई आएगा और कहेगा कि ये मत करो ये ग़लत है, कोई फिर सबूत मांगेगा, कोई फिर इसे खून की दलाली कहेगा। कोई मानवाधिकार संगठन रोयेगा, कोई सेना को गुंडा कहेगा।

कईयों को कल से ही कश्मीर नीति में खामियाँ नज़र आने लगी है, पैलेट गन मत चलाओ, कमर के ऊपर गोली मत मारो, बातचीत करो, वो बच्चे हैं, नादान हैं, अभी ऐसा कहने वाले भी बहुत आएंगे।

पाकिस्तान दुश्मन देश है ये दुनिया जानती है लेकिन देश को चुनौतियाँ बाहर से कम भीतर से ज़्यादा है, दुश्मन बाहर कम भीतर ज़्यादा हैं। इज़राइल छोटा सा देश है लेकिन किसी देश की हिम्मत नहीं उससे पंगा लेने की क्योंकि वहाँ का हर नागरिक वहाँ की सरकार के साथ, अपने सैनिकों के साथ खड़ा रहता है बिना किसी सवाल जवाब, शंका कुशंका के।

इस वक़्त जोश और होश दोनों हाई रखना है।

|| जय हिंद ||

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