पाकिस्तान, सर्जिकल स्ट्राइक, हमला, बदला…

नहीं मित्र! भारत का सबसे बड़ा शत्रु पाकिस्तान नहीं है।

पाकिस्तान तो वही कर रहा है जो एक देश अपने शत्रु के साथ करता है। उसका काम है भारत को प्रताड़ित करना, और वह वही कर रहा है।

भारत के सबसे बड़े शत्रु भारत में बैठे हैं। आँख उठा कर देखिये अपने चारों ओर, असंख्य गद्दार ऐसे मिल जाएंगे जिन्होंने 44 सैनिकों के बलिदान पर दो रोटी अधिक खाई है।

ये चौवालीस शव किसी के लिए उसके मज़हब की जीत है तो किसी के लिए वर्तमान सरकार को गरियाने का एक मौका…

सोशल मीडिया में इस हत्याकांड का जश्न मनाते हिजड़ों की फौज को देखिए, कश्मीर में जश्न मनाते सुअरों का झुंड देखिये, हमले को ‘वेलेंटाइन सर्जिकल स्ट्राइक’ कह कर खुश हो रहे इंजीनियरों को देखिए और सोचिये कि पाकिस्तान बड़ा शत्रु है या सबसे बड़े शत्रु भारत में बैठे ये हरामखोर हैं।

एक आत्महत्या पर पूरे देश को महीनों तक जलाने और चिल्लाने वाले गिद्धों को ढूंढिए, वे आज कहीं नहीं दिखेंगे। वे अपनी माँद में शराब पी कर कर पड़े होंगे कहीं.. उनके लिए न राष्ट्र महत्वपूर्ण है, न इन सैनिकों की मृत्यु। इनके लिए महत्वपूर्ण है इनकी हवस, और उसके लिए ये देश को किसी के हाथ भी बेच देंगे। राष्ट्र के सबसे बड़े शत्रु ये हैं।

1962 के भारत-चीन युद्ध में चीन का समर्थन करने वाले भारतीय याद हैं आपको? दारू की बोतल और मांस के दो टुकड़ों के लिए अपनी माँ को भी बेच सकने वाले इन नीच सुअरों को पहचानिए, भारत के सबसे बड़े शत्रु ये हैं। ये आज भी सेना के विरुद्ध हैं। इनके लिए आज भी कश्मीरी जेहादी ‘मासूम बच्चे’ हैं।

भारत के सबसे बड़े शत्रु वे स्वघोषित बुद्धिजीवी हैं जिनके लिए आतंकवादी अब भी भटके हुए नौजवान हैं। कश्मीर में जो हो रहा है वह उग्रवाद, अतिवाद नहीं है, वह विशुद्ध जेहाद है। जेहाद को उग्रवाद कह कर झुठलाने वाले बुद्धिजीवियों को पहचानिए, ये मातृभूमि के कभी भी सगे नहीं हुए।

हम और आप दिन भर नेताओं को गालियां देते हैं न, पर भारत के नेताओं में भी इन हरामखोरों से अधिक नैतिकता है। कल विपक्ष के नेता राहुल और प्रियंका ने भी कहा कि इस विपत्ति की घड़ी में हम सरकार के साथ हैं। पर आँख उठा कर देखिये इन टुच्चे पत्रकारों और लुच्चे साहित्यकारों को, ये इस दुर्दिन में भी राष्ट्र के साथ नहीं। कोई इंटेलिजेंस को दोष दे रहा है, कोई सरकार को दोष दे रहा है, कोई सेना को दोष दे रहा है, लेकिन इन कुत्तों को आज भी आतंकी दोषी नहीं लगते।

आज ही एक लेखक को पढ़ा। उस दुष्ट को इस बात की चिंता नहीं कि 44 माओं की गोद सूनी हो गयी, उसे इस बात की बेचैनी है कि हिन्दू इस घटना पर इतने उग्र क्यों हो रहे हैं। उसके अनुसार हमें उग्र नहीं होना चाहिए, हमें पाकिस्तान से बात करनी चाहिए।

भारत के सबसे बड़े शत्रु वे नपुंसक भी हैं जो हमेशा भारत को बातचीत की सलाह देते रहते हैं। सैकड़ों बार बातचीत हो चुकी है, पर क्या कभी माना है पाकिस्तान? क्या कभी मानेगा पाकिस्तान? ये एजेंडेबाज़ लोग यह नहीं बताते कि आखिर भारत क्या करे कि उनका प्यारा पाकिस्तान भारत पर प्रहार करना बंद कर दे…

भारत के सबसे बड़े शत्रु हैं नवजोत सिंह सिद्धू जैसे विदूषक, जो इस बड़े आक्रमण के बाद भी पाकिस्तान के लिए प्रेम दिखाने से नहीं डरते…

याकूब की फाँसी को रोकने के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवाने और खोलने वाले लोग भी आज सरकार को दोष दे रहे हैं। समझिए कि ये चाहते क्या हैं… “अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल ज़िंदा हैं” चिल्लाने वाले सरकार से प्रश्न पूछ रहे हैं। समझिए कि ये चाहते क्या हैं… मित्र! भारत को पाकिस्तान के साथ साथ इनसे भी लड़ना होगा।

पाकिस्तान बहुत छोटी चीज़ है मित्र! और भारत की सेना बड़े बड़ों को सीधा करने की क्षमता रखती है। इन 44 शवों का प्रतिशोध आज नहीं तो कल ले लेगी भारतीय सेना, पर पाकिस्तान मानेगा नहीं। जबतक भारत में गद्दारों की यह फौज रहेगी, पाकिस्तान को ऊर्जा मिलती रहेगी और वह भारत पर प्रहार करता रहेगा।

और मित्र, इन गद्दारों से सेना नहीं लड़ेगी। इनसे हमें लड़ना होगा, इनके मुंह पर हमें थूकना होगा। गद्दारों को खुल कर गद्दार कहना होगा। उनका सामाजिक बहिष्कार करना होगा। और यह हमें ही करना होगा। जबतक इनका फन नहीं कुचला जाता, कुछ बदलने वाला नहीं…

हमारे पड़ोस में एक छोटा सा देश है भूटान। पाकिस्तानी जेहादियों की परिभाषा के अनुसार भूटान भी काफिर देश है, पर उनकी औकात नहीं कि वे भूटान से उलझ सकें। क्योंकि वे जानते हैं कि भूटान में भारत जैसी गद्दारों की फौज नहीं… भारत को कम से कम भूटान बनना होगा।

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