आज उन सभी लोगों को जवाब देना होगा जो…

ॐ शांति शांति शांति।

गुस्सा पालना सीखो पार्थ, उसे व्यर्थ मत करो, पालो अपने अंदर पालो, इतना पालो कि जिस दिन ये गुस्सा बाहर आये ज्वाला बन कर आये और इस ज्वाला में दुश्मन जल कर खाक हो जाये।

मिलेगी, इसकी सज़ा मिलेगी, बराबर मिलेगी, बहुत बड़ी कीमत चुकाओगे नामुरादों, जो तुम्हारी नस्लें याद रखेंगी।

कल तक जो पाकिस्तान की गोदी में बैठे थे उनका आज क्या कहना है? ‘इन्हें हटाइये हमें लाइये’ वालों का क्या कहना है?

इमरान खान और पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष बाजवा से गले मिलने और अपना सीना ठोकने वाले कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू का आज क्या कहना है? अपने रास्ता खुलवाया था ना सिद्धू साहब? लीजिये आपके साथ गले मिलने वाले आपके सबसे खास दोस्त ने आतंकवादी भेज दिए, आपका गले मिलना 46 सैनिकों की शहादत से चुकाया जा रहा है, बहुत बड़ी कीमत अदा की है देश ने आपकी मूर्खता की।

हिंदुस्तान के मुकाबले पाकिस्तान से ज़्यादा प्यार मिलने का दावा करने वाले नसीरुद्दीन शाह को आज डर लग रहा है कि नहीं? क्यों लगे भला? उनका लड़का थोड़े ही मारा गया है। कोई बात नहीं नसीर मियां, एक और आतंकवादी के लिए दया याचिका बनाइये और भेज दीजिये राष्ट्रपति और CJI को… डूब मरो गद्दारों।

आज उन सभी लोगों को जवाब देना होगा जो मुम्बई हमले के आतंकवादी अजमल कसाब, याकूब मेमन और अफ़ज़ल गुरु जैसे कई आतंकवादियों के लिए दया याचिका लिखते, साईन करते और अपने सीने से चिपकाए घूमते फिरते थे।

जवाब देना होगा उन सभी लोगों को जो आतंकवादियों के लिए रात 2 बजे कोर्ट के दरवाज़े खुलवाते हैं। आज तक इन लोगों ने देश के जवानों के लिए कुछ नहीं किया, जानते हैं क्यों? क्योंकि इनका दिल जवानों के लिए नहीं आतंकवादियों के लिए धड़कता है, क्योंकि इन्हें जवानों की ज़िंदगी से कोई लेना देना नहीं है इन्हें आतंकवादियों की ज़िंदगी प्यारी है।

जवाब आज उन नेताओं को, खास कर ‘मम्मी’ को भी देना होगा जो आतंकवादियों की लाशें देख कर फूट फूट कर रोने लगी थी, रोना तो कल भी आया होगा क्योंकि एक फिदायीन जो मारा गया। बहुत अफसोस हो रहा होगा? कभी ये अफसोस उन सैनिकों के लिए भी हुआ होता जो आपकी रक्षा में दिन रात अपनी जान हथेली पर लिए घूमते हैं, हद दर्जे की एहसान फरामोशी है साहब।

आज जवाब उन लोगों को भी देना होगा जो पैलेट गन के इस्तेमाल से मानवता को खतरा बता रहे थे, आज जवाब उन लोगों को भी देना होगा जो आतंकवादियों के मददगारों को भटका हुआ नौजवान कहते हैं।

आज जवाब उन लोगों को भी देना होगा जो आतंकवादियों के जनाज़े में शामिल होते हैं, क्या मुम्बई क्या कश्मीर ये हर जगह पाए जाते हैं और आपके बच्चों के खून के प्यासे हैं। आज जवाब उन मौलवियों को भी देना होगा जो इनके अंतिम संस्कार में कलमा पढ़ने जाते हैं, ये कैसा संस्कार?

जवाब उन लोगों को भी देना होगा जो पढ़ने लिखने वाले बच्चों को जिहाद सिखाते हैं, उन्हें कॉलेज यूनिवर्सिटी में देश विरोधी नारे लगाना सिखाते हैं, और बाद में यही पढ़े लिखे युवा आतंकवादी बन कर लाशों के ढेर लगाते हैं। जवाब उन लोगों को भी देना होगा जो इन देशविरोधी मानसिकता वालों को पढ़ने वाला बच्चा कहते हैं।

आज जवाब उन Presstitutes प्रेश्याओं को भी देना होगा जो आतंकवादी को स्कूल टीचर का बच्चा बताते फिरते हैं, आतंकवादियों का महिमा मंडन करते हैं, आतंकवादियों को बेचारा भटका हुआ बताते हैं, उनके लिए हैशटैग चलाते हैं और उनके लिए कैंडल मार्च निकालते हैं, उनके लिए दया मांगते हैं और सरकार पर उन्हें बरी करने के लिए दबाव बनाते हैं।

एक बार फिर कहता हूँ एक-एक को कीमत चुकानी होगी, अपने खून से कीमत चुकानी होगी।

और एक आखिरी बात इस लेख पर कोई रोयेगा नहीं, एक भी आंसू नहीं छलकना चाहिए, जब तक एक एक लाश न गिरा लें तब तक आँखें नम नहीं होनी चाहिए।

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