भारत इज़राइल क्यों नहीं बनता?

लोगों को आज प्रतिशोध चाहिए। बस मोदी टैंक लेके घुसे, और सब पाकिस्तानियों को ख़त्म कर दे। हम चाहते हैं, रातोंरात इज़राइल मोड में आ जाये।

नहीं, ऐसा नहीं होगा। मोदी है, तो मुझे पूरी अपेक्षा और विश्वास है कि बदला होगा, भीषण होगा, सौ गुना हाहाकारी होगा। पर इंडिया इज़राइल नहीं बन सकता, और ना ही बन पाएगा।

छोटे से इज़राइल पर आस पास के 10 देश अटैक कर दे, पर तब भी वो छः दिन के अंदर उन्हें धूल चटा कर वापस उन्हीं के घर में बिठा देता है। एक छोटे से देश पर कोई एक ग्रेनेड फेंकने से पहले 10 बार सोचता है, क्योंकि खुद पर हुए नुकसान से 10 गुना नुकसान वापस झेलना पड़ेगा।

भारत इज़राइल क्यों नहीं बन सकता?

क्योंकि इज़राइल में कोई JNU नहीं, जहां इज़राइल के युवा ‘इज़राइल, तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे लगा सकें।

इज़राइल में कोई सरकार चुने जाने के दो महीने के अंदर गंभीर आरोपों में घिरी नलिनी सुंदर नामक किसी नक्सली को क्लीन चिट नहीं देती।

क्योंकि इज़राइल जब ऑपेरशन Munich करता है तो वहां का विपक्ष सबूत मांग कर देश व सेना को अपमानित नहीं करता।

क्योंकि वहां ना तो आतंकवादियों के लिए रात दो बजे कोर्ट खुलते हैं और ना ही वहां के पत्रकार आतंकियों की लिए मानवाधिकार का रंडी रोना रोते हैं। और ना ही वहां के पत्रकार आतंकी को टेररिस्ट कहने के बजाय मिलिटेंट या उग्रवादी कहते हैं।

क्योंकि इज़राइल के कोई जाट, गुर्जर, मराठा इज़राइल के पब्लिक प्रॉपर्टी को नहीं जलाते। वहां देश सर्वोपरि होता है, जाति या धर्म नहीं।

क्योंकि वहां के नेता, सेनाध्यक्ष को कुत्ता, गुंडा नहीं कहते। टैक्सपेयर्स के पैसों पर पढ़ने वाले शहला रशीद या कन्हैया कुमार जैसे जोंक नहीं है वहाँ जो आर्मी को रेपिस्ट बताते फिरें।

क्योंकि वहां के अभिनेता अपनी धरती पर जहां वो पैदा हुए हैं, जहां वो सफल हुए हैं, उस पर शर्मिंदा नहीं होते। असहिष्णुता का नाटक नहीं करते।

क्योंकि वहां लोग नेतन्याहू या उसकी पार्टी का विरोध करते करते इज़राइल विरोधी नहीं हो जाते।

यहाँ तो आपको हज़ारों मिलेंगे जिनके मन में एक अजीब सी खुशी है कि बस इसी बहाने मोदी, भाजपा पर कीचड़ उछालेंगे कि बहुत कूद रहे थे कि कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ।

क्योंकि कर्ज़माफी, बेरोज़गारी भत्ते और जातिवाद के चक्कर में इज़राइल के लोग बॉर्डर से जुड़े राज्य, वो राज्य जहां सिमी या नक्सली पनपने का डर हो – आतंकवादियों और नक्सलियों के हिमायती को नहीं सौंपते।

क्योंकि वहां के युवा देश तोड़ने की बातें नहीं करते, वहां के नेता ऐसे देश विरोधी लगाने वाले छात्रों के पीछे नहीं खड़े होते, और ना ही वहां की जनता किसी बात के लालच में आकर ऐसे नेताओं के पीछे खड़ी होती है। वहां का विपक्ष अपने धुर विरोधी ईरान में जाकर ये नहीं कहता कि आप नेतन्याहू को हटाने में हमारी मदद करो।

आज जो पाकिस्तान को साफ करने की बात कर रहे हैं, और सच में युद्ध हो जाये तो प्याज-पेट्रोल-टमाटर महंगे हो गए तो सड़कों पर आ जायेंगे। दाल फ्राई खाने का शौकीन देश टमाटर महंगे होना नहीं सहन कर सकता।

बरगद बन जाने की बातें करते हैं गमले में उगे हुए लोग।

नहीं बन सकते हैं हम इज़राइल। क्योंकि इज़राइल अपनी टेक्नोलॉजी, अपने आयुधों या हथियारों से इज़राइल नहीं है। इज़राइल अपने नागरिकों के कारण इज़राइल है। और इसी तरह से भारत अपने ‘नागरिकों’ की वजह से ही भारत है। इसे कोई मोदी या कोई भी और आकर नहीं बदल सकता, जब तक हम ही नहीं दृढ़निश्चियी हों।

आज शायद बाहर का पता नहीं, अंदर तो एक जबरदस्त सर्जिकल स्ट्राइक की आवश्यकता है। ये नहीं हो पाया तो लुटेरे लूटने के लिए तैयार बैठे हैं।

वक़्त ये भी है कि हम इज़राइल बनें, कि हमारे चुने हुए प्रतिनिधियों को विश्वास हो कि कुछ भी हो, देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए देश एक रहेगा, सिर्फ ऐसे युद्ध काल में ही नहीं, वरन हमेशा। नहीं तो ऐसे ही देश पर चोट दर चोट आती रहेगी।

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