नारी सशक्तिकरण : Victim और Empowered दोनों महसूस नहीं किया जा सकता एक साथ

जब अमेरिका का पिछला चुनाव हुआ था तो एक तरफ थे ट्रम्प दूसरी तरफ हिलेरी। ट्रम्प के साथ खड़ी थी वह जनता जो डिप्लोमेसी से परेशान थी। वह खुल कर कह रही थी कि हमें दूसरे देश के लोगों को रोजगार नहीं देना है जब अपना ही आटा गीला हो; हम शरणार्थी नहीं चाहते; हम इस्लाम को आतंकवाद का रखवाला मानते हैं।

सर्वे पर सर्वे हुये कि ट्रम्प जैसे बिना लाग-लपेट के बात करने वाले को आखिर ऐसे अमेरिका में समर्थन कौन दे रहा है, जहाँ सबको ज्यादा मॉडर्न, ज्यादा अच्छा, ज्यादा दयालु, ज्यादा लिबरल दिखने की पड़ी है!

उसके वोटर थे मिडल क्लास, लोवर मिडल क्लास और सबसे ज्यादा गरीबी से जूझते लोग। वे लोग जो ज़मीनी हकीकत को पढ़ने के बजाय जी रहे होते हैं। उन्हें सबसे ज़्यादा फर्क पड़ता है क्योंकि शरणार्थी उनकी जमीन और नौकरी पर कोई गैरकानूनी तरीके से कब्जा करते हैं।

ट्रम्प के विरोध में सबसे बड़ा हथियार कौन था? फेमिनिज्म। उसके पुराने वीडियो वायरल किये जा रहे थे, लड़कियों से लिपटते-चिपकते हुये। हालाँकि ऐसा कोई वीडियो नहीं आया जिसमें लड़की खुद भी खुश ना दिख रही हो।

फेमिनिज्म का चेहरा बन गयी उस वक्त हिलेरी क्लिंटन। अब चूंकि बात स्त्री शक्ति की थी तो हिलेरी की सशक्त छवि बनाते हुये एक मजबूत व एक कमजोर स्त्री के बीच का फर्क बताना जरूरी था। इस फर्क को बताने के लिये घसीटा गया ट्रम्प की बेटी और उसकी पत्नी को।

उसकी बेटी सफलतापूर्वक अपना बिजनेस चला रही है अपने पिता के बिजनेस से अलग भी। उसे ना तो पिता से शिकायत है ना पति से। पर पूरी pseudo liberal मीडिया चिल्लाने लगी, ” हाय, ये बेचारी लड़की। ट्रम्प ने जरूर अत्याचार किया होगा।” ग्रेजुएशन की हुई बित्ता भर की लड़कियां जिनके पैरेंट्स ने जिंदगी भर जितना इनकी पढ़ाई-लिखाई पर खर्च किया होगा उतना इवांका ट्रम्प एक हफ्ते में कमाती है, इवांका पर तरस खाती हुयी गम के आँसू बहा रही थी।

बेटी से भी ज्यादा घसीटा गया तो पत्नी को। वह मॉडल रह चुकी थी तो पहले उसकी मॉडलिंग तस्वीरों पर हमला हुआ। ट्रम्प ने सपोर्ट दिखाते हुये कह दिया कि उसकी पत्नी के life choices से उसे कोई समस्या नहीं है। जब सामने से कोई शोषण नजर नहीं आया तो हर न्यूज चैनल टुच्चे किस्म के बॉडी- लैंग्वेज एक्सपर्ट को बुलाने लगा जोकि ये ढूंढ रहा था कि मिलेनिया के चेहरे पर खौफ दिखता है या नहीं।

आज भी एक बहुत बड़ा तबका ये साबित करने की कोशिश कर रहा है कि मिलेनिया ट्रम्प के विरोध में सिर्फ इसीलिये नहीं बोल रही है क्योंकि वह खौफजदा है।

जबकि पति से कई बार धोखा खाने और बिल क्लिंटन पर लगे हैरासमेंट के मामले के बाद भी उसके खिलाफ मुँह नहीं खोलने वाली हिलेरी क्लिंटन अचानक ही सशक्तिकरण का उदाहरण बन गयी।

इस पूरे मामले में हुआ क्या था? वही जो सबरीमाला में हुआ। जबरदस्ती किसी को विक्टिम बता कर उसकी हक की लड़ाई के नाम पर अपना एजेंडा थोपना।

मानसिक रूप से मजबूत होना, आर्थिक रूप से सबल होना, अत्याचार का विरोध करना, अपने व्यक्तिगत विकास की सम्भवनाएँ तलाशना; ये सब इंसानी ज़रूरते हैं। हर व्यक्ति के लिये ज़रूरी।

हाँ, यह ज़रूर है आर्थिक क्षेत्रों में स्त्रियों की उपस्थिति आज भी कम है। पर आर्थिक रूप से सबल होना बस आज की महंगी होती जीवनशैली को मेंटेन रखने के लिये ज़रूरी है, इससे यह तय नहीं होता कि आप मानसिक रूप से बहुत सशक्त इंसान हैं। आज पश्चिम में जो तलाक की रेट है वह सशक्त होने की निशानी नहीं है, यह पुरुष-स्त्री की उस कमज़ोरी को दिखाती है जो हर चीज में सिर्फ सहजता चाहते हैं, रिश्ते में थोड़ा चैलेंज नहीं झेल पाते। इंटेलिजेंस की मनोवैज्ञानिक परिभाषा जोकि आपके adjustment और adaptation की capacity को महत्वपूर्ण समझती है, उसके विरोधाभास में आज खड़ी है स्त्री सशक्तिकरण की परिभाषा।

यानी अगर आप rebellion नहीं हो, तो आप कमज़ोर हो। अगर आप अपनी परम्परावादी ज़िंदगी में खुश हैं, तो आप कमज़ोर हैं। अगर आपके बच्चे आपकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी प्रायोरिटी हैं, तो यकीनन आप उस स्त्री से कमज़ोर है जो मातृत्व के खिलाफ ओपन लेटर लिख सकती है। अगर आप पति से बहुत प्यार करती हैं, तो ज़रूर ही आप उस स्त्री जितनी मज़बूत नहीं हैं जो तीन बार तलाक ले चुकी है।

हमारे समाज में भी बहुत से घटिया स्त्री द्वेषी स्टीरियोटाइपिंग रहे हैं लेकिन उसे हटाने के बजाय, एक equally unhealthy और polar opposite स्टिरियोटाइपिंग की रचना हो रही है जोकि आने वाले समय में हर उस स्त्री को विक्टिम महसूस करवायेगी जो इनकी सशक्तिकरण की सँकरी परिभाषा के अंदर फिट ना होती हो।

Victim और empowered दोनो साथ में महसूस नहीं किया जा सकता।

हाँ, ये ज़रूर होगा कि आप खुद को पीड़ित मान कर, दुनियाभर को गलत समझ कर, अपने unique और बगावती होने की झूठी gratification को जिये।

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