अखिलेश कूदे बुआ की गोदी, मुलायम बोले – मोदी मोदी

“मैं चाहता हूं नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनें” – मुलायम सिंह यादव

यह संसद में दिया गया संबोधन है जो आँन रिकॉर्ड होने के कारण अपिरवर्तनीय है और जो भी किंतु-परंतु करते हुए सपाइयों के स्पष्टीकरण आएंगे वह अमान्य ही होंगे क्योंकि यह कथन किसी सभा-रैली का नहीं जिसके अन्यार्थ किए जाएं या कहा जाए कि नेताजी के कथन को छोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है।

इस कथन से एक बात तो स्पष्ट है कि वर्तमान भारत के वे सभी नेता खौफज़दा हैं जिनके नाम भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। यह खौफ है एक राष्ट्रवादी सरकार के केन्द्र में होने का, एक ईमानदार, दृढ़ निश्चयी व्यक्ति के प्रधानमंत्री होने का।

मेरा मानना है कि वर्तमान दौर में सबसे चतुर नेता सिर्फ मुलायम सिंह ही हैं जो वक्त की नब्ज़ को सही समय पर पढ़ लेते हैं।

आज उन्होंने जो इबारत पढ़ ली वह उन्हीं का माद्दा है वरना लालू, चिदंबरम और राहुल जैसे ‘चतुरों’ की कमी नहीं है, जो सब कुछ स्पष्ट देखते हुए भी शेर को ललकारने की हिमाकतें नहीं छोड़ पा रहे।

मुलायम सिंह भी यदि यही हिमाकत करते तो निश्चित ही उनका बाकी का जीवन कष्टमय गुज़रता लालू की तरह। पर वह मंझे हुए नेता हैं अपने पुत्र की तरह बकलोल नहीं। और शायद इसी गुण के चलते उन्होंने सोनिया गांधी के पीएम बनने की महत्वाकांक्षा को विफल किया था।

अब देखने वाली बात यही है कि सपा-बसपा गठबंधन की इस एक बयान ने कैसे लंका लगा दी है। यू पी फिर निर्णायक होगा इस चुनाव में और चुनाव का पहला रुझान स्पष्ट बता रहा है कि विपक्षी किस तरह जाल में फंसे पंक्षी जैसे फड़फड़ा रहे हैं।

लिख कर रख लें… अबकी बार, 400 पार।

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