कल्ले खान डॉन – 3

बदचलन रुबीना मैडम याद हैं ना आपको? [देखें – कल्ले खान डॉन – 1 और कल्ले खान डॉन – 2] उनकी एक लड़की भी थी, रुखसाना नाम था उसका।

रुखसाना का जन्म एक बदनाम लेकिन मालदार परिवार में हुआ था। बदनाम गलियों में पली बढ़ी रुखसाना शुरू से ही शातिर थी। रुखसाना जवान हुई तो बेहद खूबसूरत सुडौल कद काठी, लंबी, एकदम गोरी चिट्टी, रंग गुलाबी, मोहल्ले के लड़कों में वो गुलबदन नाम से मशहूर थी।

अब्बू के इंतकाल के बाद रुखसाना टूट सी गयी थी। रुखसाना को कहीं न कहीं पता था कि अपने अब्बू की औलाद न हो कर नाजायज़ औलाद है, भाई मंदबुद्धि और नकचढ़ा, माँ बदचलन, किसी के पास भी रुखसाना के लिए समय नही था।

रुखसाना के कदम बस यहीं डगमगा गए, रुखसाना भी अपनी माँ के नक्शे कदम पर चल पड़ी। रोज़ नया बॉयफ्रेंड तलाशती रुखसाना की अय्याशियां आम हो चली थीं। उधर भाई को नशे की लत लग चुकी थी, लेकिन इन दोनों के लिए बदचलन रुबीना के पास समय ही नही था।

रूखसाना जवान हो चली थी और बदनाम भी। बदचलन रुबीना उसके लिए कोई ढंग का लड़का ना ढूंढ पा रही थी। करीबी लोगों को पता था कि पार्टी भले ही मालदार है पर माँ बदचलन है और बेटी बदनाम, ऐसे में भला कौन रिश्ता जोड़ेगा?

रूखसाना को निकाह करना था पर कोई ढंग का लड़का नहीं मिल रहा था। आखिर उसकी नज़र एक पॉकेटमार लड़के पर जा टिकी। अल्बर्ट ना तो उसकी जात का था न धर्म का, पर अल्बर्ट ने सोचा कि ये सोने का अंडा देने वाली मुर्गी है, सो अल्बर्ट ने रूखसाना को अपने चंगुल में फंसा लिया और दोनों ने निकाह कर लिया।

शुरू में सबकुछ बहुत अच्छे से चला, rosy picture you see, इसके बाद रूखसाना को पता चला कि अल्बर्ट की जेब तो खाली है। अल्बर्ट छोटी मोटी चोरी, पॉकेटमारी कर के कुछ थोड़ा बहुत जुगाड़ कर लाता, कुछ दिन तक मायके से पैसे मांगती रही रूखसाना, फिर एक दिन उसने अल्बर्ट से कहा कि ऐसा कब तक चलेगा?

अल्बर्ट ने उसे एक आईडिया सुझाया बोला मेरे धंधे में आ जा, तू बड़े घर से है तेरी बड़े लोगों में पहचान है, बड़ी बड़ी पार्टियों में जाएंगे बड़े मुर्गे हलाल करेंगे। तू खूबसूरत है, सुडौल है, तेरी काया पर लोग मर मिटेंगे, उनका ध्यान तेरे बदन पर होगा और मैं धीरे से हाथ साफ कर दिया करूँगा।

रूखसाना गुलबदन ने पहले तो इनकार किया लेकिन फिर राज़ी हो गयी। रूखसाना गुलबदन के घर रोज़ बड़ी बड़ी पार्टियां हुआ करती थी लेकिन नशेड़ी भाई ने उसे वहां आने से मना कर रखा था, लेकिन जल्दी ही रूखसाना गुलबदन ने अपनी जुगाड़ लगा ली और घर वापसी कर दी। कोई कुछ न कहे इसलिए उसने अपने आपको उच्च कुल का बताना शुरू कर दिया।

इधर अल्बर्ट ने रूखसाना गुलबदन को पूरी ट्रैनिंग दे दी थी, कैसे खिलखिला कर हँसना है, कैसे अपनी लटों में उंगलियां चलानी है, कैसे अपना पल्लू गिरना है, कैसे सामने वाले को अपने ऊपर लट्टू करना है।

इधर रूखसाना गुलबदन मुर्गे (लालची मर्द किसी मुर्गे से कम नहीं होते, हलाल होने चले आते हैं) को बातों में उलझा कर अपना पल्लू गिरा कर अपनी सुडौल काया के दर्शन करवाती और जैसे ही सामने वाला ललचाई निगाहों से उसके बदन को निहारता, अल्बर्ट धीरे से हाथ साफ कर देता।

ये सिलसिला बदस्तूर जारी रहा। रूखसाना गुलबदन सिर्फ पार्टी के समय जाती और अपनी अदाएं दिखाती, अल्बर्ट हाथ साफ कर देता, दोनों अपना काम कर के निकल जाते और अगली पार्टी का इंतज़ार करने लगते। दोनों की मोटी कमाई होने लगी।

रूखसाना गुलबदन का चोरी का कारोबार चल निकला था। अब उसने बाकायदा अपनी एक गैंग बना ली थी नाम था गुलाबी गैंग। इस बार रूखसाना गुलबदन की नज़र एक बहुत बड़ी पार्टी पर है। अगर यहाँ हाथ मार लिया तो पूरी ज़िंदगी ऐश में निकल जायेगी।

लेकिन एक समस्या है इस पार्टी में। सुभाष सर भी आ रहे हैं… अरे वही ईमानदार कड़क मिजाज़ नए प्रिंसिपल सर, उनको अदाएं दिखा कर पटाना नामुमकिन है। अब देखना ये है कि बदचलन रुबीना और गुलबदन रूखसाना कितने कामयाब होते हैं? सुभाष सर क्या कर पाते हैं? क्या वो मेहमानों की जेब कटने, उन्हें लुटने, बर्बाद होने से बचा पाएंगे?

तो मित्रों, आप सब भी चौकन्ने रहना। गुलाबी कपड़ों में गुलाबी गैंग सक्रिय हो चुकी है। कहीं गुलाबी रंग, सुडौल काया, उलझी लटों या नाक के चक्कर में उलझ मत जाना, वर्ना आपका बटुआ नहीं, इस बार तिजोरी साफ हो जाएगी। फिर न कहिएगा कि पहले बताया नही था। बाद में रोने से कुछ नहीं होता। कई राज्य वाले रो रहे हैं आप भी उनकी लाइन में लग जाएंगे बस, अगर देश की तिजोरी को बचाना है तो सुभाष सर को प्रिंसिपल बना दीजिये, वर्ना देश का खज़ाना लुटना तय है।

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