राहुल गांधी स्वयं चुटकला भी बन गए और हमें हंसी भी नहीं आ रही

पश्चिमी राष्ट्रों में कुछ समय से यह चिंता का विषय है कि हम एक ऐसे समय में रह रहे है जिसमे सत्य अब महत्वपूर्ण या प्रासंगिक नहीं है। ऐसी स्थिति या राजनीति को post-truth या ‘सत्योपरांत’ के विशेषण से सुशोभित किया गया। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने post-truth को वर्ष 2016 के शब्द के रूप में सम्मानित … Continue reading राहुल गांधी स्वयं चुटकला भी बन गए और हमें हंसी भी नहीं आ रही