बारी बरसी खटन गया सी खट के लेयांदा टिपू के पप्पा, पप्पू की मम्मी भूल के मोदी गाल में भरे गोल गप्पा

एक तरफ एक ऐसा बेटा जिसको पढ़ा पढ़ा कर माँ परेशान है लेकिन वह अपने दम पर कुछ बोल ही नहीं पाता, तो दूसरी तरफ है एक वो बेटा जो उस बाप की तरफ ऊंगली उठाकर बोलता है जिस बाप ने ऊंगली पकड़ा कर चलना सिखाया.

जब बेटा बाप के कंधे से ऊपर चला जाता है तो बाप का सीना फक्र से और चौड़ा हो जाता है, लेकिन जब वही बेटा बाप की छाती पर मूंग दलने लगता है तो बाप छाती पीट पीटकर रोता है. और जो बाप बेटे की उस गुस्ताख़ी पर छाती पीटकर रो नहीं सकते, वो मोदी के द्वार पर ही अंतिम सहारा खोजते नज़र आते हैं.

यहाँ हमेशा की तरह राष्ट्रवादी खेमा दो भागों में विभक्त हो गया है. एक कह रहा है कि यह मुलायम की चाल है, मोदी के पूर्ण बहुमत के आह्वान से लोगों का ध्यान भटकाने की. हमें राम मंदिर जाते कार सेवकों का नरसंहार नहीं भूलना चाहिए. दुश्मन को दोस्त बनाया लेकिन कहते हैं ना जब किसी से दोस्ती की जाए तो दुश्मनों की भी राय ली जाए.

तो जहाँ मुलायम सिंह का इतिहास कोई बहुत साफ़ सुथरा नहीं रहा है, वे अपनी बात से कई बार मुकरते देखे गए हैं. ऐसे में उनकी इस बात का क्या रहस्य यह तो उनके जैसी भले लम्बी नाक न हो लेकिन तेज़ नाक वाला षडयंत्र सूंघकर बताने वाला ही जाने.

तो वहीं दूसरे खेमे का कहना है चूंकि अब सब लोगों के काले चिट्ठे मोदीजी खोल रहे हैं तो ऐसे में धीरे धीरे सबका मोदी की तरफ झुकाव होना बहुत ही स्वाभाविक है. और वैसे भी हमारे मोदीजी तो विदेशी दुश्मनों को भी एक चांस दोस्ती का अवश्य देते हैं तो यह तो फिर भी अपने ही देश के लोग हैं.

तो चुनाव के पहले का यह मुद्दा राजनीति के ऊँट को किस करवट बिठाएगा यह तो भविष्य के गर्भ में छुपा है. लेकिन हाँ सोशल मीडिया वालों को कुछ दिन के लिए नए जोक्स बनाने के लिए एक नया मुद्दा मिल गया है.

लेकिन इस माहौल में भी जिनकी आँखें खुली, कान सजग और नाक षडयंत्र सूंघने जितनी तेज़ रहती है, वही मोदीजी की इस लम्बी पारी में साथ चल पाएगा. तो आपको लम्बे रास्ते पर दूर तक साथ चलाए रखने के लिए मोदीजी की राष्ट्रनीति स्वयं रास्ता बनाकर देती जाएगी. फिलहाल तो आगामी लोकसभा चुनाव तक साथ चलिए और मोदीजी को एक बार फिर प्रधानमंत्री बनाइये.

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