केंद्र सरकार ने 302 ग़ैर सरकारी संगठनों पर लगाया प्रतिबंध

8 फरवरी को आये इस समाचार में एक बात सामने आयी कि केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर में चल रहे राष्ट्र विरोधी गैर सरकारी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब इसमें राष्ट्र विरोधी क्या है क्या नहीं ये तो बहस का विषय है, मगर सरकार ने जो जवाब दिया है वो बहस का विषय नहीं हो सकता, वह शाश्वत सत्य है।

सरकार ने कहा कि FCRA अधिनियम 2011 के नियम 17(1) के तहत इन सभी गैर सरकारी संगठनों इनके लाइसेंस रद्द किये गए हैं। उसका कारण यह है कि इन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है।

इन संगठनों ने पिछले करीब 3-4 सालों से अपनी आय, अपने कार्यों का ब्यौरा सरकार को नहीं दिया, जबकि इसके लिए वह सरकार को उत्तरदायी हैं। इसके बाद भी सरकार ने इनके पास नोटिस भेजे और एक माह का समय दिया, ताकि वे अपने रिटर्न भरे, सरकार को अपना लेखा जोखा दे; मगर नहीं! इनमें से कई संगठनों ने तो सरकार को जवाब तक नहीं दिया।

अब ऐसे में सरकार ने अपने अधिकारों का प्रयोग किया और 302 गैर सरकारी संगठन के लाइसेंस रद्द कर दिए। ग़ौरतलब है कि इन संगठनों ने अपनी जानकारियां साल 2011 के बाद से नहीं दी थी, और वर्तमान केंद्र सरकार ने 20,000 से अधिक संगठनों के लाइसेंस अभी तक रद्द कर चुकी है।

इनका काम राष्ट्र विरोधी है या नहीं, ये तो बाद की बात है; मगर ये सोचने का विषय है कि आखिर ऐसे में ये संगठन ऐसे क्या काम करते हैं, जिनकी जानकारी सरकारी को नहीं दे सकते? अपने दान की जानकारी सरकार से साझा नहीं कर सकते?

इससे भी ज़्यादा गौर करने वाली बात यह है कि इन्हें संरक्षण मिलता है अनेक शिक्षाविदों से व अन्य कई संस्थाओं से, जो इनके समर्थन में सरकार को जानकारी देने के ख़िलाफ़ खड़े हैं।

ब ये हमें तय करना है कि हम किनके साथ खड़े हैं, और किनके विरुद्ध ?

सन्दर्भ 

https://www.firstpost.com/india/fcra-licences-of-20000-ngos-cancelled-act-being-used-as-weapon-to-silence-organisations-3181560.html/amp

https://www.amarujala.com/india-news/302-ngo-licence-cancelled-taking-foreign-donations-and-violating-laws

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