रामलिंगम मारा गया और आप खामोश हैं!

हामिद अंसारी दस साल तक उप राष्ट्रपति रहने के उपरान्त मुखर हैं कि मुसलमान भयभीत हैं।

आमिर खान की दूसरी और हिंदू पत्नी डरी हुई है।

शाहरुख खान को भारत में हमेशा उतना डर लगता है, जितना अमेरिका के एयरपोर्ट पर चड्डी उतारे जाते समय भी नहीं लगता।

नसीरुद्दीन शाह को अपनी संकर संतान की चिंता हो रही है।

स्वरा भास्कर और उस जैसी कई हीरोइनें अपने हिंदू होने पर शर्मसार हैं।

शशि थरूर के नज़रिए से ‘हिंदी, हिंदू और हिंदुत्व’ इंडिया की सबसे बड़ी समस्या हैं।

मनीष तिवारी के अनुसार, ‘हिंदुस्तान का कोई अस्तित्व नहीं है। यह असंवैधानिक शब्द है’।

राहुल गांधी के अनुसार आरएसएस आईएसआईएस से भी ज्यादा खतरनाक है। हिंदू आतंकवाद किसी भी अन्य आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक है।

बंगाल में वामपंथी शासन के दौरान हज़ारों राजनीतिक हत्याएं हुईं। इतनी कि आज तक बंगाल के विभिन्न हिस्सों में दबे हुए कंकाल बरामद होते हैं। नक्सलवाद और माओवाद की आड़ में हज़ारों नागरिक शहीद कर दिए गए। लेकिन कम्युनिस्ट, गुंडे या आतंकवादी नहीं बने।

केरल में हज़ारों लोग वामी गुंडों का शिकार बने। उनका शिकार कैसे किया जाना चाहिए, यह वहां के एक बड़े वामी नेता के श्रीमुख से सुना गया। लेकिन वे अब भी गुंडों का समूह नहीं, राजनीतिक पार्टियां हैं।

पिछले समय में देशभर में लिंचिंग में सौ से अधिक लोग मारे गए। ऎसी ज्यादातर घटनाओं के पीछे बच्चा चोरी आदि की अफवाहें मूल कारण है। लेकिन इन हादसों में सिर्फ छह लोग हलाक होते ही/भी, गौरक्षक गौगुंडे हो गए। वामपंथियों से पोषित दलालों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, तो गौरक्षकों के खिलाफ, और वहां से भी उनकी मंशा के अनुरूप निर्णय और आदेश आ गए।

देश भर से समाचार आ रहे हैं। हिंदू लड़कियों के अपहरण, सामूहिक बलात्कार और खाड़ी देशों में बेचने की कोशिश, राजस्थान से कश्मीर ले जाकर सामूहिक बलात्कार और जबरन गौमांस खिलाने का प्रयास, संबंध बनाने से मना करने पर ह्त्या कर सूटकेस में शव डाल कर फेंका आदि।

लेकिन यह सब डरी हुई कौम के लक्षण हैं। आतंकवादी तो हिंदू है।

यह सब किसलिए है? इसके प्रतिनिधि नपुंसक हैं।

हिंदू मंदिरों की ज़मीनें देशभर में खुर्द-बुर्द हो रही हैं। उन पर कब्ज़े हो रहे हैं। बड़ी कमाई वाले मंदिरों पर रिसीवर बैठा कर सरकारी कब्ज़ा हो रहा है और उनकी कमाई हिंदू समाज के बजाय विरोधियों के पल्लवन पर खर्च हो रही है।

और यह नपुंसक कौम, अपने पास जो मौजूद है, उसे बचाने, उसकी खैर-खबर लेने के बजाय नए राम मंदिर के पीछे पड़ी है। उसे पाकर क्या कर लोगे? दस-बीस साल बाद वहां भी कोई सरकारी ट्रस्ट होगा, जो उसकी कमाई आपके विरोधियों को बांट रहा होगा।

एक तरफ यह स्थिति है, दूसरी तरफ भगवा पहने मसखरे महात्मा गांधी के पुतले को गोली मारने का अभिनय कर फरार हो रहे हैं। हिंदुत्व के सबसे बड़े दुश्मन ये गधे ही हैं। इसलिए कि कुछ सार्थक करने के बजाय धर्म पर कालिख पोतने का काम ही ये करते हैं।

हिंदू समाज को उठना होगा। सही प्रतिनिधि चुनने होंगे और ऐसे अधम कीटों का जूताभिषेक भी खुद ही करना होगा। तभी आप रामलिंगम जैसे अपने साथियों को बचा पाएंगे, अन्यथा रामलिंगम बलिदान देते रहेंगे और शाह और अंसारी जैसे जिहादियों की अंगुलियां आपकी तरफ ही उठती रहेंगी।

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