नया दिन, नया झूठ : फिर एक बार कांग्रेस का प्रोपगंडा उजागर

हिन्दू अखबार ने आदतानुसार नया जुमला फैंका कि Rafale डील में मोदी सरकार ने “Anti Corruption Clause” हटा दिया….वो भी डील के ऐन पहले। ये भी बताया गया कि अम्बानी को फायदा पहुँचाने के लिए डील की टर्म्स and कंडीशन्स को बदला गया।

अब ज़ाहिर है, TRP लायक खबर है तो हाथों हाथ फैलनी ही थी। Wire, Print, NDTV ने दनादन आर्टिकल लिख डाले, प्रेस कांफ्रेंस हो गयी, चौकीदार चोर है के नारे लगा लिए…. भ्रम फैलना शुरू हो गया… लेकिन किसी ने कुछ सवालों पर ध्यान ही नहीं दिया।

  1. कि MMRCA डील और मोदी सरकार की Government-To-Government डील में कोई फर्क है क्या?
  2. क्या कोई clause बदला गया है भी या नहीं?

यहाँ जवाब सीधा सा है, पहले वाली डील और नई डील में अंतर है। MMRCA में जब कोई हल नहीं निकला, और UPA के समय फण्ड ना होने से डील अटकी, उसके बाद Offset के मुद्दे पर बात नहीं बनी, तब जा कर वायुसेना की ज़रूरतों को देखते हुए Government-To-Government डील की गई।

दोनों डील में मुख्य फर्क ये होता है कि दोनों सरकारें उच्च स्तर पर डील करती हैं, इससे डिलीवरी जल्दी मिलती है, गारंटी बेहतर मिलती है, और सबसे बड़ी बात, कोई बिचौलिया नहीं होता, इस वजह से डिस्काउंट भी बेहतर मिल जाता है।

दूसरे प्रश्न का जवाब है, नहीं, कोई clause नहीं बदला गया क्योंकि डील का प्रकार ही बदल गया था, तो नए डील के clause ही अपनाए गए हैं।

अब सवाल ये भी उठता है कि Government to Government डील की पालिसी किसने बनाई?

इस जवाब से आप चौंक जाएंगे। जो पालिसी मोदी सरकार अपना रही है, उसे 2013 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में UPA सरकार ने बनाया और इसे Defence Procurement Policy 2013 के नाम से जाना जाता है। उस समय AK Antony रक्षा मंत्री थे।

कृपया चित्र में clause 71 और 72 देखें।

अब अगर ये पालिसी गलत है, इसके clause गलत हैं…… तो UPA दोषी हुई ना?

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